शिमला : भारतीय उच्च अध्ययन संस्थान (आईआईएएस), शिमला की स्थापना के 60 वर्ष पूर्ण होने के अवसर पर 24 और 25 सितंबर को ‘आत्मनिर्भर भारत की संधान यात्रा: अतीत से वर्तमान और भविष्य की ओर’ विषय पर दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी आयोजित की जाएगी। इसमें देशभर के शिक्षाविद, चिंतक, शोधकर्ता और विभिन्न क्षेत्रों के विशेषज्ञ आत्मनिर्भर भारत की अवधारणा, भारतीय विकास-दृष्टि और विकसित भारत@2047 की आकांक्षा पर मंथन करेंगे।
संगोष्ठी का उद्घाटन 24 सितंबर को होगा। उद्घाटन सत्र में पूर्व राज्यपाल आरिफ मोहम्मद खान मुख्य अतिथि होंगे, जबकि समापन सत्र में हिमाचल प्रदेश के राज्यपाल कविंदर गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहेंगे।
आईआईएएस के निदेशक प्रो. हिमांशु कुमार चतुर्वेदी के अनुसार, संगोष्ठी का उद्देश्य आत्मनिर्भरता को केवल आर्थिक या तकनीकी क्षमता तक सीमित न रखकर मानव विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य, सामाजिक समरसता, सुशासन, नवाचार और राष्ट्रीय चेतना से जोड़कर समझना है। संगोष्ठी में स्वराज और स्वदेशी से लेकर आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत@2047 तक की वैचारिक यात्रा पर भी चर्चा होगी।
एकात्म मानव दर्शन पर होगा विशेष विमर्श
संगोष्ठी में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानव दर्शन के संदर्भ में भारतीय विकास-दृष्टि पर विशेष चर्चा होगी। बदलती वैश्विक परिस्थितियों में इस दर्शन की प्रासंगिकता, समावेशी विकास और सतत विकास के संदर्भ में इसके विभिन्न आयामों पर विशेषज्ञ अपने विचार रखेंगे।
इसके अलावा वैश्विक आर्थिक और तकनीकी बदलाव, पर्यावरणीय चुनौतियां, शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार, ग्रामीण विकास, महिला भागीदारी, सामाजिक विषमता और शासन व्यवस्था जैसे विषय भी चर्चा के केंद्र में रहेंगे।
ग्रामीण विकास से तकनीक तक कई विषयों पर चर्चा
संगोष्ठी में ‘समग्र शिक्षा और आत्मनिर्भर भारत’, ‘आत्मनिर्भर भारत के लिए समग्र स्वास्थ्य’, ‘एकात्म मानव दर्शन और समग्र ग्रामीण विकास’, ‘लैंगिक पूरकता—विकसित भारत के लिए महिला-नेतृत्व वाला विकास’ तथा ‘एकात्म मानव दर्शन और सामाजिक समरसता’ जैसे विषयों पर सत्र आयोजित होंगे।
दीनदयाल शोध संस्थान के उपाध्यक्ष अतुल जैन एकात्म मानव दर्शन और समग्र ग्रामीण विकास पर विचार रखेंगे। पद्मश्री चैतराम पवार बारिपाड़ा एकीकृत विकास परियोजना का केस स्टडी प्रस्तुत करेंगे। तकनीकी विकास और विकसित भारत के संबंधों के साथ उभरती तकनीकी चुनौतियों पर भी विशेषज्ञ चर्चा करेंगे।
देशभर के विद्वान होंगे शामिल
राष्ट्रीय संगोष्ठी में राष्ट्रीय शैक्षिक योजना एवं प्रशासन संस्थान (NIEPA) की कुलपति प्रो. शशिकला वांजरी, हेमवती नंदन बहुगुणा गढ़वाल विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. श्री प्रकाश सिंह, नॉर्थ लखीमपुर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. मुकुल बोरा, गुजरात विश्वविद्यालय की पूर्व कुलपति प्रो. नीरजा गुप्ता, यूजीसी की पूर्व सदस्य एवं केंद्रीय विश्वविद्यालय हरियाणा की पूर्व प्रो-वाइस चांसलर प्रो. सुषमा यादव, दीनदयाल उपाध्याय विश्वविद्यालय की वरिष्ठ प्रोफेसर प्रो. निधि चतुर्वेदी, सिक्किम विश्वविद्यालय की प्रोफेसर वीणू पंत और महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, मोतिहारी के पूर्व कुलपति प्रो. संजीव कुमार शर्मा सहित कई विद्वान भाग लेंगे।
इसके अलावा स्वास्थ्य, अर्थशास्त्र, कानून, ग्रामीण विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा, सामाजिक नीति और शासन से जुड़े विशेषज्ञ भी विभिन्न सत्रों में अपने विचार रखेंगे।
आईआईएएस के अनुसार, दो दिवसीय संगोष्ठी का व्यापक उद्देश्य भारत की सभ्यतागत विरासत, वर्तमान चुनौतियों और भविष्य की आकांक्षाओं के बीच संवाद स्थापित करना है। इसमें इस बात पर विचार होगा कि आत्मनिर्भरता को आर्थिक और तकनीकी क्षमता के साथ-साथ मानव विकास, सामाजिक समावेशन, पर्यावरणीय स्थिरता और संस्थागत क्षमता के व्यापक संदर्भ में किस प्रकार समझा जा सकता है।