शिमला : हिमाचल प्रदेश में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर अब निगरानी और कार्रवाई का दायरा बढ़ाया जाएगा। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जागरूकता अभियान तेज कर दिया है। बुधवार को आयोजित प्रेस वार्ता में बोर्ड के सदस्य सचिव सुशील कुमार सिंगला (IFS) ने नए नियमों के प्रमुख प्रावधानों की जानकारी देते हुए आमजन, संस्थानों, स्थानीय निकायों और बल्क वेस्ट जनरेटरों से नियमों का अनिवार्य रूप से पालन करने की अपील की।
सदस्य सचिव ने बताया कि ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 एक अप्रैल 2026 से लागू हो चुके हैं और इन्होंने वर्ष 2016 के नियमों का स्थान लिया है। नए नियम शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों के अलावा वाणिज्यिक, संस्थागत तथा सरकारी प्रतिष्ठानों पर भी लागू होंगे।
चार श्रेणियों में करना होगा कचरे का पृथक्करण
नए नियमों के तहत घरों और प्रतिष्ठानों से निकलने वाले कचरे को स्रोत पर ही चार श्रेणियों में अलग करना अनिवार्य किया गया है। इनमें गीला कचरा, सूखा कचरा, सेनेटरी कचरा और विशेष देखभाल वाला कचरा शामिल हैं। गीले कचरे में रसोई, खाद्य एवं अन्य जैव-अवक्रमणीय कचरा आएगा, जबकि सूखे कचरे में कागज, गत्ता, प्लास्टिक, कांच और धातु जैसी पुनर्चक्रण योग्य सामग्री शामिल होगी।
इसी तरह इस्तेमाल किए गए डायपर, सैनिटरी टॉवल और पैड आदि को सेनेटरी कचरे की श्रेणी में रखा गया है। सीएफएल बल्ब, फ्लोरोसेंट ट्यूब, एक्सपायर्ड दवाइयां, पेंट के डिब्बे, इस्तेमाल की गई सिरिंज, टूटे पारे वाले थर्मामीटर और बैटरियां विशेष देखभाल वाले कचरे में शामिल होंगी।
सेनेटरी कचरे की सुरक्षित पैकिंग जरूरी
बोर्ड ने स्पष्ट किया कि सेनेटरी कचरे को निर्माताओं या ब्रांड की ओर से उपलब्ध कराए गए पाउच अथवा रैपिंग सामग्री में सुरक्षित रूप से लपेटकर ही निर्धारित स्थान पर सौंपना होगा।
कचरा जलाने और खुले में फेंकने पर प्रतिबंध
सुशील कुमार सिंगला ने कहा कि कचरे को जलाना, जमीन में दबाना, खुले में फेंकना अथवा नालियों, जलस्रोतों और सार्वजनिक स्थानों पर डालना प्रतिबंधित है। ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के नियम-4 तथा संविधान के अनुच्छेद 51A(g) के तहत नागरिकों, वाणिज्यिक प्रतिष्ठानों, स्कूलों और सरकारी विभागों की जिम्मेदारी है कि वे कचरे को स्रोत पर अलग-अलग करें और निर्धारित व्यवस्था के माध्यम से उसका उचित प्रसंस्करण एवं निपटान सुनिश्चित करें।
BWGs को नोटिस, नियम न मानने पर कट सकती है बिजली-पानी
सुप्रीम कोर्ट के 18 अगस्त 2026 के सिविल अपील संख्या 6174/2023 में दिए गए आदेश का हवाला देते हुए सदस्य सचिव ने बताया कि नियमों के क्रियान्वयन की निगरानी की जा रही है। जिला उपायुक्तों को स्थानीय निकायों के साथ समन्वय कर छह सप्ताह के भीतर बल्क वेस्ट जनरेटर (BWGs) की पहचान करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके बाद स्थानीय निकाय चिन्हित BWGs को लिखित नोटिस जारी करेंगे। नियमों के अनुरूप कचरे का पृथक्करण, प्रसंस्करण या प्रबंधन नहीं करने वाले BWGs के खिलाफ जिला उपायुक्त की विशेष सेल कार्रवाई कर सकेगी। इसके तहत बिजली और पानी की आपूर्ति अस्थायी रूप से काटने की कार्रवाई का प्रावधान भी बताया गया है।
विद्यार्थी बनेंगे ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’
कचरा पृथक्करण की आदत विकसित करने में विद्यार्थियों की भूमिका को महत्वपूर्ण बताते हुए सिंगला ने कहा कि स्कूल एवं उच्च शिक्षा विभाग शैक्षणिक पाठ्यक्रम में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन से संबंधित सैद्धांतिक और व्यावहारिक मॉड्यूल शामिल कर रहे हैं। विद्यार्थियों को ‘हाउसहोल्ड सुपरवाइजर’ के रूप में प्रशिक्षित किया जाएगा, ताकि वे अपने परिवारों को घर में 100 प्रतिशत कचरा पृथक्करण के लिए प्रेरित कर सकें। इस व्यवस्था से संबंधित ऑडिट रिपोर्ट समय-समय पर जिला उपायुक्तों को भेजी जाएगी।
कचरा प्रसंस्करण केंद्रों का रोज होगा ऑडिट
उन्होंने बताया कि कचरा प्रसंस्करण सुविधाओं का विस्तृत ऑडिट प्रतिदिन किया जाएगा। इसमें स्रोत पर कचरे के पृथक्करण, उसके प्रसंस्करण, निपटान और उपयोग की स्थिति की समीक्षा होगी। इसके अलावा कचरे के अंतरराज्यीय आवागमन पर भी निगरानी रखी जाएगी।
राज्य सरकार ने 9 अप्रैल 2026 की अधिसूचना के माध्यम से राज्य स्तरीय समिति और जिला स्तरीय क्रियान्वयन समितियों का गठन किया है। इन समितियों को प्रदेश के शहरी, ग्रामीण और विशेष अधिसूचित क्षेत्रों में ठोस अपशिष्ट प्रबंधन नियम, 2026 के प्रभावी क्रियान्वयन, निगरानी और अनुपालन सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई है।
बोर्ड ने प्रदेशवासियों से अपील की कि स्वच्छ और प्रदूषण मुक्त हिमाचल के लिए कचरे का स्रोत पर पृथक्करण केवल नियम नहीं, बल्कि सामूहिक जिम्मेदारी के रूप में अपनाया जाए।