गुरुग्राम(हिंद जनपथ ब्यूरो) : आम तौर पर अपने सौम्य स्वभाव और मुस्कुराते चेहरे के लिए जाने जाने वाले हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का गुरुग्राम की समीक्षा बैठक में बिल्कुल नया और सख्त रूप देखने को मिला। प्रशासनिक लापरवाही और लालफीताशाही पर कड़ा रुख अपनाते हुए मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को दो टूक चेतावनी दी है कि हरियाणा में सिर्फ कुर्सी पर बैठकर फाइलें चलाने का दौर अब खत्म हो चुका है।
बैठक की शुरुआत ही मुख्यमंत्री के कड़े तेवरों के साथ हुई। अपनी ड्यूटी में लापरवाही बरतने के आरोप में मुख्यमंत्री ने तुरंत प्रभाव से प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के रीजनल ऑफिसर के खिलाफ कार्रवाई के निर्देश जारी किए। इस त्वरित एक्शन से पूरे प्रशासनिक अमले में हड़कंप मच गया और यह संदेश साफ हो गया कि कोताही किसी भी स्तर पर बर्दाश्त नहीं होगी।
सबूत सामने रखकर पूछा-'ज़मीन पर समस्या जस की तस क्यों?'
बैठक में उस वक्त अफसर बगले झांकते नजर आए जब मुख्यमंत्री ने अधिकारियों द्वारा भेजी गई 'समस्या समाधान' की कागजी रिपोर्ट का सीधे ग्राउंड रियलिटी से मिलान कर दिया। मुख्यमंत्री ने ठोस प्रमाणों के साथ अधिकारियों के सामने पोल खोली कि जिस समस्या को फाइलों में सुलझा हुआ दिखाया गया था, वह ज़मीन पर जस की तस बनी हुई थी। मुख्यमंत्री ने स्पष्ट किया कि वह खुद पहचान छिपाकर आम नागरिकों से सीधे फीडबैक लेते हैं, इसलिए कागजी आंकड़ों से उन्हें गुमराह नहीं किया जा सकता।
ढिलाई बरती तो बिगड़ेगी ACR;
प्रशासनिक सुस्ती को खत्म करने के लिए मुख्यमंत्री ने सबसे बड़ा चाबुक चला दिया है। उन्होंने निर्देश दिए कि गुरुग्राम में तैनात अधिकारियों की केवल ऑफिस परफॉर्मेंस नहीं, बल्कि 'ग्राउंड परफॉर्मेंस' को उनकी ACR में दर्ज किया जाएगा। मुख्यमंत्री ने साफ कहा- "सरकार की योजनाओं और दावों का मूल्यांकन कागजों पर नहीं, बल्कि धरातल पर दिखने वाले परिणामों से होगा। अधिकारियों को दफ्तरों से निकलकर सड़कों पर उतरना होगा और जनता की समस्याओं का स्थायी समाधान सुनिश्चित करना होगा।"
गुरुग्राम को मिले बड़े प्रोजेक्ट्सः
बैठक में केवल ढिलाई पर चाबुक ही नहीं चला, बल्कि शहर के इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने के लिए अहम फैसले भी लिए गए। जैसे शहर में पेयजल व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए 69.585 किलोमीटर लंबी भूमिगत पाइपलाइन परियोजना को हरी झंडी दी गई। दिल्ली से लाकर गुरुग्राम की सीमा में अवैध रूप से कूड़ा डालने वाले वाहनों को जब्त कर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए गए। सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट के लिए जोनवार व्यवस्था लागू करने और जन-शिकायतों की रैंडम क्रॉस-चेकिंग करने के कड़े आदेश जारी किए गए।
क्या अब बदलेगी हरियाणा की ब्यूरोक्रेसी?
गुरुग्राम की इस बैठक से मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पूरी राज्य मशीनरी को यह स्पष्ट संकेत दे दिया है कि सरकार का फोकस अब केवल कार्रवाई के आश्वासनों पर नहीं, बल्कि प्रत्यक्ष परिणामों पर है। इस बैठक के बाद अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सीएम का यह 'ऑन-ग्राउंड मोड' हरियाणा की लालफीताशाही को बदलने में कितना कारगर साबित होता है।