शिमला : अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राष्ट्रीय प्रवक्ता एवं ठियोग से विधायक कुलदीप सिंह राठौर ने शुक्रवार को शिमला में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित कर देश में वोटर लिस्ट में की जा रही कथित धांधलियों और विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया को लेकर केंद्र सरकार तथा चुनाव आयोग पर कड़ा प्रहार किया है। राठौर ने मुख्य चुनाव आयुक्त को तत्काल बर्खास्त करने तथा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृह मंत्री अमित शाह से इस्तीफे की मांग की है। पत्रकारों से बातचीत करते हुए कुलदीप सिंह राठौर ने आरोप लगाया कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) की आड़ में देशभर में 13 करोड़ से अधिक मतदाताओं के नाम वोटर लिस्ट से काट दिए गए हैं। उन्होंने कहा कि "पेन के एक ही स्ट्रोक" से इतने नागरिकों का मताधिकार छीन लिया गया, जो दुनिया के कई देशों की कुल आबादी से भी अधिक है। राठौर ने कहा कि विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने साक्ष्यों के साथ उजागर किया है कि किस तरह भाजपा के पक्ष में वोटों को जोड़ा जा रहा है और जो वोट पक्ष में नहीं लग रहे, उन्हें काटा जा रहा है। राठौर ने कहा कि देश में इस समय अराजकता की स्थिति बनी हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे और नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी लगातार आगाह कर रहे थे कि देश का लोकतंत्र और संविधान खतरे में है। आज यह सच्चाई सभी के सामने है।ऐसे में लोकतंत्र, संविधान और न्याय की रक्षा के लिए कांग्रेस सड़कों पर उतरकर संघर्ष कर रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि पहले केंद्रीय एजेंसियों का दुरुपयोग किया गया और अब चुनाव आयोग को हाईजैक कर लिया गया है। उन्होंने पश्चिम बंगाल और बिहार में वोट काटे जाने का मुद्दा उठाते हुए वहां की सरकारों के गठन पर भी सवाल खड़े किए।
विरोध प्रदर्शनों को दबाने का आरोप
कांग्रेस नेता ने कहा कि जब राहुल गांधी के नेतृत्व में 300 सांसद चुनाव आयोग के कार्यालय जा रहे थे, तो उन्हें रोक दिया गया। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन रोकने के लिए धारा 163 लगा दी गई। दिल्ली में एक लाख से अधिक पुलिसकर्मी और 30 हजार अर्धसैनिक बल तैनात कर जनता व विपक्ष की आवाज दबाने का प्रयास किया गया। उन्होंने कहा कि संविधान का अनुच्छेद 19 नागरिकों को शांतिपूर्ण प्रदर्शन का अधिकार देता है, लेकिन सरकार इसका भी हनन कर रही है।
मुख्य चुनाव आयुक्त पर कोर्ट की अवमानना का चले मामला
राठौर ने मुख्य चुनाव आयुक्त (ज्ञानेश कुमार) पर सत्ताधारी दल के दबाव में एकतरफा काम करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि चुनाव आयोग के फैसलों में तीनों सदस्यों की सहमति अनिवार्य होती है, लेकिन मुख्य चुनाव आयुक्त भाजपा के एजेंडे पर अकेले फैसले ले रहे हैं। उन्होंने कहा कि फॉर्म-6 को लेकर मुख्य चुनाव आयुक्त ने सुप्रीम कोर्ट की अनुमति की बात कहकर देश को गुमराह किया, जिसे खुद चीफ जस्टिस ने गलत ठहराया। ऐसे में मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ सुओ मोटो एक्शन लेकर 'अवमानना मामला' चलाया जाना चाहिए।
सुप्रीम कोर्ट से हस्तक्षेप की गुहार
राठौर ने कहा कि भाजपा के वरिष्ठ नेता मुरली मनोहर जोशी ने भी चुनाव प्रक्रिया में पारदर्शिता की बात कही है। देशवासियों को उनके संवैधानिक अधिकारों से वंचित किया जा रहा है और प्रदर्शनकारियों को धमकियां दी जा रही हैं। उन्होंने कहा कि अब देश का लोकतंत्र बचाने के लिए सुप्रीम कोर्ट को खुद आगे आकर कड़ा संज्ञान लेना होगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि लोकतंत्र और संविधान को बचाने के लिए शुरू हुआ यह आंदोलन अब रुकने वाला नहीं है।