शिमला : हिमाचल प्रदेश में 55,103 करोड़ रुपये की राष्ट्रीय राजमार्ग परियोजनाओं और 15,624 करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को गति देने पर जोर दिया गया है। केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण तथा रसायन एवं उर्वरक मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने शुक्रवार को प्रदेश में सड़क, रेल, स्वास्थ्य, ऊर्जा और औद्योगिक क्षेत्र से जुड़ी प्रमुख विकास परियोजनाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्वीकृत परियोजनाओं को निर्धारित समयसीमा में पूरा करने और केंद्र से प्राप्त धनराशि का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने पर बल दिया।
नड्डा ने कहा कि हिमाचल जैसे पहाड़ी राज्य में सड़क और रेल संपर्क का सीधा संबंध पर्यटन, रोजगार, किसानों-बागवानों की उपज को बाजार तक पहुंचाने, मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाने और आपदा के दौरान राहत कार्यों से है। इसलिए विकास परियोजनाओं में गुणवत्ता, सुरक्षा और समयबद्धता का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए।
किशाऊ परियोजना से छह राज्यों को मिलेगा लाभ
समीक्षा बैठक में 15,624 करोड़ रुपये की किशाऊ बहुउद्देशीय परियोजना को महत्वपूर्ण बताया गया। सितंबर 2026 में इसे राष्ट्रीय परियोजना घोषित किया गया था। इसके तहत 15 सितंबर को हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, हरियाणा, राजस्थान और दिल्ली के बीच समझौता हुआ।
टोंस नदी पर प्रस्तावित इस परियोजना से जल भंडारण, सिंचाई और जलविद्युत उत्पादन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है। इसके माध्यम से लगभग 97 हजार हेक्टेयर भूमि को सिंचाई सुविधा उपलब्ध करवाने और 1,476 मिलियन यूनिट जलविद्युत उत्पादन का अनुमान है। राष्ट्रीय परियोजना के तहत लागत का लगभग 90 प्रतिशत केंद्र सरकार और शेष 10 प्रतिशत संबंधित राज्य वहन करेंगे।
इसके अलावा करीब 7,000 करोड़ रुपये की रेणुकाजी बांध परियोजना और 1,800 करोड़ रुपये की लूहरी स्टेज-I जलविद्युत परियोजना की प्रगति का भी उल्लेख किया गया।
25 राष्ट्रीय राजमार्गों का 2,592 किलोमीटर नेटवर्क
हिमाचल प्रदेश में 25 राष्ट्रीय राजमार्गों का कुल नेटवर्क 2,592 किलोमीटर है। इनमें 1,244 किलोमीटर सड़कें भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई), 779 किलोमीटर सड़कें सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय और 569 किलोमीटर सड़कें सीमा सड़क संगठन के अंतर्गत आती हैं। एनएचएआई की परियोजनाओं में कुल 55,103 करोड़ रुपये का निवेश है।
बैठक में कीरतपुर-मनाली, पठानकोट-मंडी, परवाणू-शिमला और शिमला-मटौर कॉरिडोर की विशेष समीक्षा की गई। करीब 12,939 करोड़ रुपये की कीरतपुर-मनाली परियोजना के कई प्रमुख खंड पूरे हो चुके हैं। पंडोह-टकोली खंड को मार्च 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। इस मार्ग में 31 सुरंगें शामिल हैं, जिनकी कुल लंबाई लगभग 44 किलोमीटर है।
परवाणू-सोलन-शिमला बाईपास परियोजना पर लगभग 8,950 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। परवाणू-सोलन खंड पूरा हो चुका है, जबकि सोलन-कैथलीघाट खंड सितंबर 2027 और शिमला बाईपास सितंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है।
पठानकोट-मंडी कॉरिडोर पर करीब 10,805 करोड़ रुपये के कार्य 2028-29 तक पूरे करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, शिमला-मटौर कॉरिडोर पर लगभग 10,226 करोड़ रुपये के प्रस्तावित कार्य 2029-30 तक पूरे किए जाने हैं। ब्यास नदी के आसपास राजमार्गों की सुरक्षा और बाढ़ एवं भूस्खलन से क्षतिग्रस्त सड़कों की स्थायी बहाली के मुद्दे पर भी चर्चा की गई।
पीएमजीएसवाई के तहत 26,506 किलोमीटर सड़कें स्वीकृत
प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत हिमाचल प्रदेश में 4,170 सड़कों के लिए लगभग 13,697 करोड़ रुपये की लागत से 26,506 किलोमीटर सड़कें स्वीकृत की गई हैं। इनमें से 23,601 किलोमीटर सड़कें बनकर तैयार हो चुकी हैं और लगभग 90 प्रतिशत पात्र बसावटों को सड़क संपर्क उपलब्ध करवाया गया है।
नड्डा ने पहले चरण की शेष नौ सड़कों को मार्च 2027 तक पूरा करने और पीएमजीएसवाई-4 के तहत स्वीकृत 25 कार्यों के ठेके जल्द आवंटित करने के निर्देश दिए। उन्होंने ग्रामीण और दुर्गम क्षेत्रों में सड़क संपर्क सुनिश्चित करने के साथ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर निगरानी बढ़ाने को कहा।
रेल परियोजनाओं में लंबित मामले सुलझाने पर जोर
करीब 13,410 करोड़ रुपये की भानुपल्ली-बिलासपुर-बेरी रेल परियोजना के भानुपल्ली-बिलासपुर खंड को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। बिलासपुर-बेरी खंड में भूमि अधिग्रहण से जुड़े लंबित मामलों को शीघ्र सुलझाने की जरूरत बताई गई।
वहीं, 1,540 करोड़ रुपये की चंडीगढ़-बद्दी रेल लाइन को दिसंबर 2027 तक पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना पर लगभग 1,160 करोड़ रुपये खर्च हो चुके हैं, जबकि राज्य की हिस्सेदारी में से करीब 231 करोड़ रुपये अभी हस्तांतरित किए जाने हैं। नड्डा ने लंबित राशि शीघ्र उपलब्ध करवाने पर जोर दिया।
स्वास्थ्य सुविधाओं के विस्तार के लिए करोड़ों का प्रावधान
बैठक में प्रदेश के स्वास्थ्य ढांचे को मजबूत करने के लिए स्वीकृत परियोजनाओं की भी समीक्षा की गई। बिलासपुर स्थित एम्स के लिए 1,400 करोड़ रुपये से अधिक, चंबा, नाहन और हमीरपुर मेडिकल कॉलेजों के लिए लगभग 547 करोड़ रुपये, ऊना स्थित पीजीआई सैटेलाइट सेंटर के लिए 495 करोड़ रुपये और आईजीएमसी शिमला के सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक के लिए करीब 200 करोड़ रुपये का प्रावधान किया गया है।
जापान अंतरराष्ट्रीय सहयोग एजेंसी (जाइका) की सहायता से संचालित 1,422 करोड़ रुपये की स्वास्थ्य परियोजना के तहत हमीरपुर, नाहन, नेरचौक, टांडा, चंबा और आईजीएमसी शिमला में चिकित्सा सुविधाओं को सुदृढ़ किया जाना है। इसमें उन्नत एमआरआई, कैंसर उपचार और अन्य आधुनिक सुविधाएं विकसित करने की योजना है।
प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन के तहत स्वीकृत कार्यों में तेजी लाने के निर्देश भी दिए गए। योजना के तहत स्वीकृत नौ क्रिटिकल केयर ब्लॉकों में से एक पूरा हुआ है। 12 एकीकृत जनस्वास्थ्य प्रयोगशालाओं में से किसी का निर्माण पूरा नहीं हुआ है, जबकि 73 ब्लॉक जनस्वास्थ्य इकाइयों में से 29 तैयार हो चुकी हैं।
नड्डा ने कहा कि स्वास्थ्य क्षेत्र में धनराशि की स्वीकृति तभी सार्थक होगी, जब इसका लाभ मरीजों को ग्रामीण जांच सुविधाओं, आपातकालीन उपचार और जिला स्तर पर विशेषज्ञ सेवाओं के रूप में मिले।
बल्क ड्रग पार्क और औद्योगिक परियोजनाओं की समीक्षा
ऊना के बल्क ड्रग पार्क के लिए 1,000 करोड़ रुपये की केंद्रीय अनुदान सहायता का प्रावधान है। इसमें से 225 करोड़ रुपये जारी किए जा चुके हैं, जबकि लगभग 117 करोड़ रुपये खर्च हुए हैं। मेडिकल डिवाइस पार्क के लिए प्रस्तावित लगभग 100 करोड़ रुपये की परियोजना को राज्य सरकार ने अक्तूबर 2024 में वापस ले लिया था और 30 करोड़ रुपये की किस्त लौटा दी थी।
बैठक में आपदा के बाद पुनर्बहाली, पुनर्निर्माण और पूंजीगत निवेश के लिए केंद्र से मिली सहायता पर भी चर्चा हुई। नड्डा ने कहा कि स्वीकृत संसाधनों का पारदर्शी और प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के साथ विकास परियोजनाओं की नियमित निगरानी जरूरी है, ताकि इनका लाभ प्रदेश के लोगों तक समय पर पहुंच सके।