शिमला(हिंद जनपथ ब्यूरो) : हिमाचल प्रदेश में युवाओं को तकनीकी रूप से दक्ष बनाने और रोजगार के नए अवसर उपलब्ध करवाने के लिए प्रदेश सरकार डिजिटल तकनीक और कौशल विकास पर जोर दे रही है। आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) के दौर में युवाओं को आधुनिक तकनीकों से जोड़ने के साथ तकनीकी शिक्षा को रोजगार से जोड़ने की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं।
तकनीकी शिक्षा विभाग ने युवाओं और उद्योगों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने के लिए ‘तकनीकी रोजगार सेतु’ पोर्टल शुरू किया है। इस डिजिटल प्लेटफॉर्म पर विद्यार्थी अपनी शैक्षणिक योग्यता, कौशल, प्रशिक्षण और प्रमाणपत्रों की जानकारी अपलोड कर रोजगार के लिए आवेदन कर सकते हैं। पोर्टल पर अब तक 164 संस्थान पंजीकृत हो चुके हैं। इनमें 136 आईटीआई, 18 पॉलिटेक्निक, पांच इंजीनियरिंग कॉलेज और पांच फार्मेसी कॉलेज शामिल हैं।
26 हजार से अधिक छात्रों का पंजीकरण
प्रदेश के डिजिटल पहचान प्लेटफॉर्म ‘हिम एक्सेस’ के माध्यम से अब तक 26,168 छात्रों का पंजीकरण किया जा चुका है, जबकि 23,054 छात्रों की कौशल मैपिंग पूरी हो चुकी है। इस पोर्टल पर 97 नियोक्ता भी पंजीकृत हैं। इसके माध्यम से इलेक्ट्रीशियन और प्लंबर जैसे कुशल कामगारों की सेवाएं भी प्राप्त की जा सकेंगी, जिससे युवाओं के लिए स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे।
विदेशों में तकनीकी ज्ञान हासिल कर रहे विद्यार्थी
प्रदेश के युवाओं को वैश्विक तकनीकी विकास से परिचित करवाने के लिए अंतरराष्ट्रीय एक्सपोजर विजिट आयोजित की जा रही हैं। इसके तहत आईटीआई के 30 प्रशिक्षुओं ने कजाकिस्तान के अल्माटी में विभिन्न औद्योगिक इकाइयों का दौरा किया। वहीं, इंजीनियरिंग कॉलेजों के 44 मेधावी विद्यार्थियों ने जापान में शैक्षणिक भ्रमण के दौरान रोबोटिक्स, अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी, एयरोस्पेस और आधुनिक विनिर्माण तकनीकों की जानकारी हासिल की।
तकनीकी संस्थानों के आधुनिकीकरण पर जोर
प्रदेश सरकार पॉलिटेक्निक, इंजीनियरिंग कॉलेजों और आईटीआई संस्थानों को आधुनिक बनाने की दिशा में कार्य कर रही है। इसके लिए विभिन्न तकनीकी संस्थानों को 35.34 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को बेहतर प्रशिक्षण सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उन्हें उद्योगों की जरूरतों के अनुरूप तैयार करना है।
प्रदेश सरकार तकनीकी शिक्षा, कौशल विकास और डिजिटल आधारभूत संरचना को मजबूत बनाकर युवाओं के लिए रोजगार एवं स्वरोजगार की संभावनाएं बढ़ाने पर जोर दे रही है। इन प्रयासों से युवाओं की दक्षता बढ़ाने, नवाचार को प्रोत्साहित करने और आत्मनिर्भर हिमाचल के लक्ष्य को साकार करने में मदद मिलेगी।