केलांग/शिमला : केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने सोमवार को लाहौल-स्पीति के केलांग में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद (आईसीएमआर) के उच्च पर्वतीय आयुर्विज्ञान एवं जन स्वास्थ्य अनुसंधान केंद्र की आधारशिला रखी। यह केंद्र हिमालयी क्षेत्रों में रहने वाले लोगों और दुर्गम ऊंचाई वाले क्षेत्रों में तैनात सशस्त्र बलों के जवानों की स्वास्थ्य संबंधी चुनौतियों पर शोध करेगा। इसके माध्यम से कम ऑक्सीजन, अत्यधिक ठंड और बदलती जलवायु का मानव स्वास्थ्य पर पड़ने वाले प्रभावों का वैज्ञानिक अध्ययन किया जाएगा।
नड्डा ने कहा कि हिमालयी क्षेत्रों की भौगोलिक परिस्थितियां देश के अन्य हिस्सों से अलग हैं। ऐसे में यहां रहने वाले जनजातीय समुदायों की स्वास्थ्य संबंधी जरूरतों को समझने और प्रभावी चिकित्सा समाधान विकसित करने के लिए विशेष अनुसंधान आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह केंद्र उच्च पर्वतीय क्षेत्रों में निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
आईसीएमआर, सेना और एम्स बिलासपुर मिलकर करेंगे शोध
अनुसंधान केंद्र में आईसीएमआर, सशस्त्र बल चिकित्सा सेवाएं और एम्स बिलासपुर मिलकर काम करेंगे। इन संस्थानों की विशेषज्ञता के माध्यम से ऊंचाई का मानव शरीर पर पड़ने वाले प्रभावों, बीमारियों की शीघ्र पहचान और उपचार के लिए प्रभावी चिकित्सा प्रोटोकॉल विकसित किए जाएंगे।
केंद्रीय रक्षा राज्य मंत्री संजय सेठ ने कहा कि सशस्त्र बलों के व्यावहारिक अनुभव और आईसीएमआर की वैज्ञानिक विशेषज्ञता का समन्वय अत्यधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्वास्थ्य चुनौतियों के समाधान में सहायक होगा। इससे सीमावर्ती क्षेत्रों में तैनात जवानों के साथ स्थानीय समुदायों को भी लाभ मिलेगा।
ड्रोन से दवा आपूर्ति और एआई पर भी होगा शोध
केंद्र में उच्च पर्वतीय वातावरण के प्रति शरीर के अनुकूलन, मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य, बच्चों की वृद्धि, पोषण और हिमालयी क्षेत्रों में बीमारियों के स्वरूप का अध्ययन किया जाएगा। दुर्गम इलाकों में स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच बढ़ाने के लिए ड्रोन से दवाओं की आपूर्ति, डिजिटल स्वास्थ्य सेवाओं और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के इस्तेमाल की संभावनाओं पर भी शोध होगा।
आईसीएमआर के महानिदेशक डॉ. राजीव बहल ने कहा कि केंद्र में प्रयोगशाला अनुसंधान के साथ स्थानीय समुदायों को भी जोड़ा जाएगा। इसका उद्देश्य केवल शोध पत्र प्रकाशित करना नहीं, बल्कि अनुसंधान के माध्यम से लोगों के स्वास्थ्य में वास्तविक सुधार लाना है।
हिमालयी राज्यों को मिलेगा फायदा
नेता प्रतिपक्ष एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर ने इसे उच्च पर्वतीय क्षेत्रों की स्वास्थ्य समस्याओं के समाधान की दिशा में महत्वपूर्ण पहल बताया। उन्होंने कहा कि यहां होने वाला शोध हिमाचल प्रदेश के अलावा देश और दुनिया के अन्य हिमालयी क्षेत्रों के लोगों के लिए भी उपयोगी होगा।
मंडी की सांसद कंगना रनौत ने कहा कि इस केंद्र की स्थापना से दुर्गम हिमालयी क्षेत्रों में स्वास्थ्य संबंधी अनुसंधान को बढ़ावा मिलेगा और स्थानीय लोगों के स्वास्थ्य एवं कल्याण में सुधार होगा।
उल्लेखनीय है कि केलांग में करीब एक दशक पहले स्थापित आईसीएमआर के फील्ड स्टेशन के आधार पर इस केंद्र को विकसित किया जाएगा। यहां अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं और विशेषज्ञ मानव संसाधन के साथ वर्षभर अनुसंधान गतिविधियां संचालित की जाएंगी। इस अवसर पर नड्डा ने वैज्ञानिक प्रदर्शनी का उद्घाटन किया, केंद्र की वेबसाइट और संस्थागत वीडियो का शुभारंभ किया तथा स्मारक विशेष डाक आवरण जारी किया। उन्होंने 'ग्रीन आईसीएमआर कैंपस पहल' के तहत पौधरोपण भी किया।