धर्मशाला : हिमाचल प्रदेश की वादियों में सफर का अंदाज अब बदलने लगा है। पठानकोट से मंडी तक बन रहा फोरलेन अब महज एक प्रोजेक्ट नहीं, बल्कि पहाड़ों की बदलती तकदीर की तस्वीर पेश कर रहा है। कभी अपनी घुमावदार सडक़ों और जानलेवा मोड़ों के लिए कुख्यात यह मार्ग अब तेज, सुरक्षित और सुगम यात्रा का आधुनिक पर्याय बन रहा है। इंजीनियरिंग के इस कमाल ने न केवल सफर का समय घटाया है, बल्कि पर्यटन और स्थानीय व्यापार को भी एक नई रफ्तार दे दी है। परियोजना की सबसे बड़ी कामयाबी शाहपुर क्षेत्र के घटनालू और भाली जैसे तीखे मोड़ों का खात्मा है।
पहले यहां एक के बाद एक दर्जनों ऐसे ब्लाइंड मोड़ आते थे, जहां बरसात और धुंध के समय गाड़ी चलाना मौत को दावत देने जैसा था। अब सफर को और भी सुगम बनाने के लिए पुलों और सुरंगों का जाल बिछाया जा रहा है। शाहपुर के पास संकरे पुहाड़ा पुल पर लगने वाले लंबे जाम अब इतिहास बन चुके हैं, क्योंकि यहां नया फोरलेन पुल शुरू कर दिया गया है। वहीं, चंबी पुल का काम भी युद्ध स्तर पर जारी है, जिसका 70 फीसदी हिस्सा मुकम्मल हो चुका है। उम्मीद है कि जून महीने तक यहां से भी यातायात सुचारू हो जाएगा।
अब नजदीक हो गए दूर लगने वाले जिले
पठानकोट से मंडी तक के इस कायाकल्प से पड़ोसी राज्य पंजाब और हिमाचल के कांगड़ा, मंडी व हमीरपुर जिलों के बीच की दूरियां सिमट गई हैं। यह फोरलेन न केवल सफर को छोटा कर रहा है, बल्कि हिमाचल के पर्यटन मानचित्र पर एक सुनहरे अध्याय की शुरुआत भी है। अब सैलानी सुरक्षित और कम समय में प्रदेश की वादियों का आनंद ले सकेंगे। आलम यह है कि जिस खराब व घुमावदार मोड़ों वाली सडक़ों पर घंटो सफर करना पड़ता था अब वहां मिनटों में पहुंच रहे हैं।