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राष्ट्रीय

सियोल में भारतीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन, राजनाथ सिंह ने वीर सैनिकों को दी श्रद्धांजलि

Updated on Thursday, May 21, 2026 20:42 PM IST

रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह और दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने बुधवार को सियोल के इमजिनगैक पार्क में भारतीय युद्ध स्मारक का संयुक्त रूप से उद्घाटन किया। कोरियाई युद्ध की 75वीं वर्षगांठ के अवसर पर निर्मित यह स्मारक भारतीय सैनिकों के साहस, बलिदान और मानवीय सेवा को समर्पित है।

कोरियाई युद्ध में भारतीय सेना के योगदान को श्रद्धांजलि
यह स्मारक कोरियाई युद्ध के दौरान भारतीय सेना की 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस और कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया (सीएफआई) की वीरता और मानवीय योगदान की याद में बनाया गया है। दोनों नेताओं ने स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर भारतीय सैनिकों को श्रद्धांजलि दी।

राजनाथ सिंह ने साझा इतिहास को बताया मजबूत नींव
अपने संबोधन में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कहा कि कोरियाई प्रायद्वीप में शांति स्थापना और मानवीय सहायता में भारत की भूमिका ऐतिहासिक रही है। उन्होंने कहा कि भारत और दक्षिण कोरिया का साझा इतिहास तथा बलिदान दोनों देशों की विशेष रणनीतिक साझेदारी की मजबूत नींव हैं।

उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों के योगदान को याद करना दोनों देशों के लोगों के बीच आपसी समझ और ऐतिहासिक संबंधों को और मजबूत करता है। स्मारक निर्माण में सहयोग के लिए उन्होंने दक्षिण कोरिया सरकार और वहां के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय का आभार जताया।

दक्षिण कोरिया ने भारतीय सैनिकों के बलिदान को सराहा
दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्री क्वोन ओह-यूल ने कोरियाई युद्ध में भारत की भूमिका की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि भारतीय सैनिकों की मानवीय सेवा और बलिदान ने दोनों देशों के बीच अटूट मित्रता को मजबूत किया है।

सैनिकों के सम्मान में समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर
कोरियाई युद्ध में भाग लेने वाले सैनिकों को सम्मानित करने और आपसी सहयोग बढ़ाने के उद्देश्य से दोनों देशों के बीच एक समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए गए। इस अवसर पर सैनिकों के बलिदान और योगदान पर आधारित एक संस्मरण भी जारी किया गया।

‘मरून एंजल्स’ के नाम से प्रसिद्ध हुई थी भारतीय टुकड़ी
कोरियाई युद्ध के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल (डॉ.) ए.जी. रंगराज के नेतृत्व में 60 पैरा फील्ड एम्बुलेंस ने भीषण संघर्ष के बीच हजारों घायल सैनिकों और नागरिकों का उपचार किया था। उनकी असाधारण सेवा और मानवीय दृष्टिकोण के कारण उन्हें ‘मरून एंजल्स’ कहा गया।

युद्धबंदियों के प्रत्यावर्तन में भारत की अहम भूमिका
युद्धविराम के बाद भारत ने कस्टोडियन फोर्स ऑफ इंडिया के माध्यम से युद्धबंदियों के प्रत्यावर्तन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। 1953 के युद्धविराम समझौते के बाद लेफ्टिनेंट जनरल के.एस. थिमैया के नेतृत्व में तटस्थ राष्ट्र प्रत्यावर्तन आयोग का गठन किया गया था।

सीएफआई ने निष्पक्षता, पेशेवरता और करुणा के साथ अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन किया, जिसके लिए उसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली। लेफ्टिनेंट जनरल थिमैया का नेतृत्व आज भी कोरियाई युद्ध में भारत की शांतिपूर्ण भूमिका का प्रतीक माना जाता है।

‘हिंद नगर’ क्षेत्र में बनाया गया स्मारक
भारतीय युद्ध स्मारक उसी क्षेत्र में स्थापित किया गया है जहां 1954 में सीएफआई ने ‘हिंद नगर’ की स्थापना की थी। यहां लगभग 22 हजार युद्धबंदियों को शांतिपूर्ण प्रत्यावर्तन तक रखा गया था। इस परियोजना को भारत सरकार के रक्षा मंत्रालय के वित्तीय सहयोग से विकसित किया गया है।

समारोह में शामिल हुए वरिष्ठ अधिकारी और पूर्व सैनिक
समारोह में दोनों देशों के वरिष्ठ अधिकारी, सैन्य प्रतिनिधि, पूर्व सैनिक, राजनयिक समुदाय के सदस्य और कई विशिष्ट अतिथि शामिल हुए। लेफ्टिनेंट कर्नल ए.जी. रंगराज की भतीजी कल्पना प्रसाद भी इस अवसर पर मौजूद रहीं। दक्षिण कोरिया के पूर्व सैनिक मामलों के मंत्रालय ने इस महीने को कर्नल रंगराज के सम्मान में समर्पित किया है।

चार दिवसीय यात्रा का हुआ समापन
भारतीय युद्ध स्मारक के उद्घाटन के साथ रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की वियतनाम और दक्षिण कोरिया की चार दिवसीय यात्रा का समापन हुआ। यह समारोह भारत-दक्षिण कोरिया के साझा इतिहास और मानवीय सहयोग के एक महत्वपूर्ण अध्याय को पुनर्जीवित करने का प्रयास माना जा रहा है।

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