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एक-एक डायलॉग के लिए घंटों मेहनत करते थे पंकज कपूर, परफेक्शन ने बनाया अभिनय की दुनिया का बड़ा नाम

Updated on Friday, May 29, 2026 14:02 PM IST

मुंबई : अभिनेता पंकज कपूर ने अभिनय को सिर्फ पेशा नहीं, बल्कि एक कला की तरह जिया। उनके निभाए किरदार आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं। चाहे उनका टीवी का मशहूर जासूस 'करमचंद' का किरदार हो, भ्रष्ट व्यवस्था से परेशान 'मुसद्दी लाल' की भूमिका हो।

उन्होंने कई गंभीर और दमदार किरदार निभाए। वह अपने किरदार को असली दिखाने के लिए दर्जनों बार रिहर्सल करते थे। कई बार दूसरे कलाकार थक जाते थे, लेकिन पंकज तब तक संतुष्ट नहीं होते थे जब तक सीन बिल्कुल वैसा उनके मन के मुताबिक न हो जाए। यही परफेक्शन बाद में उनकी सबसे बड़ी पहचान बन गया।

पंकज कपूर का जन्म 29 मई 1954 को पंजाब के लुधियाना में हुआ था। बचपन से ही उन्हें अभिनय और मंच की दुनिया आकर्षित करती थी। पढ़ाई में अच्छे होने के बावजूद उनका मन अभिनय में ही लगता था। उन्होंने राष्ट्रीय नाट्य विद्यालय (एनएसडी) में दाखिला लिया और वहीं से अभिनय की बारीकियां सीखीं। एनएसडी से निकलने के बाद उन्होंने कई साल थिएटर किया। साथी कलाकार बताते थे कि अगर किसी डायलॉग में भाव ठीक से नहीं आ रहा हो तो पंकज उसे बार-बार बोलते थे, जब तक कि वह पूरी तरह संतुष्ट न हो जाएं।

उनकी यही मेहनत उन्हें फिल्मों तक लेकर गई। पंकज कपूर को पहला बड़ा मौका रिचर्ड एटनबरो की फिल्म 'गांधी' से मिला। इस फिल्म में उन्होंने प्यारेलाल नय्यर का किरदार निभाया था। इसके बाद उन्होंने श्याम बेनेगल की 'आरोहण', 'मंडी' और कुंदन शाह की 'जाने भी दो यारो' जैसी फिल्मों में काम किया।

फिल्म 'एक डॉक्टर की मौत' में पंकज कपूर ने वैज्ञानिक डॉ. दीपांकर रॉय का किरदार निभाया था। इस भूमिका के लिए उन्होंने लंबे समय तक रिसर्च की थी। बताया जाता है कि वह शूटिंग के दौरान खुद को बाकी लोगों से थोड़ा अलग रखते थे, ताकि किरदार की अकेलेपन और संघर्ष वाली भावना चेहरे पर साफ दिखाई दे। इस फिल्म में उनके अभिनय को इतना पसंद किया गया कि उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इसी तरह फिल्म 'मकबूल' में 'अब्बा जहांगीर खान' के किरदार के लिए उन्होंने अपने चलने, बोलने और बैठने तक के तरीके में बदलाव किया था।

टीवी की दुनिया में भी पंकज कपूर का सफर शानदार रहा। 'करमचंद', 'मुंगेरीलाल के हसीन सपने' और 'ऑफिस ऑफिस' जैसे सीरियल्स ने उन्हें घर-घर में लोकप्रिय बना दिया। खासकर 'ऑफिस ऑफिस' में मुसद्दी लाल का किरदार आज भी लोगों को याद है। इस शो की शूटिंग के दौरान भी वह हर सीन को पूरी गंभीरता से तैयार करते थे। भले ही वह कॉमेडी सीन ही क्यों न हो। कई बार सेट पर मौजूद लोग उनकी टाइमिंग और एक्सप्रेशन देखकर हंस पड़ते थे।

पंकज कपूर ने अपने करियर में तीन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार और एक फिल्मफेयर पुरस्कार जीते। उन्हें हमेशा एक ऐसे अभिनेता के रूप में देखा गया, जो किरदार के लिए खुद को पूरी तरह बदल सकता है। उन्होंने फिल्मों के साथ-साथ निर्देशन और लेखन में भी हाथ आजमाया। उनकी फिल्म 'मौसम' काफी चर्चा में रही, जिसमें उनके बेटे शाहिद कपूर मुख्य भूमिका में नजर आए थे।

 

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