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दुनिया

तुलसी गबार्ड ने बायोलैब्स के प्रतिबंधित दस्तावेज किए जारी, एनआईएआईडी के पूर्व निदेशक पर लगाए गंभीर आरोप

Updated on Friday, June 19, 2026 17:12 PM IST

वाशिंगटन : अमेरिका की राष्ट्रीय खुफिया निदेशक तुलसी गबार्ड ने हाल ही में अमेरिकी-वित्त पोषित जैविक प्रयोगशालाओं (बायोलैब्स) से संबंधित पहले से प्रतिबंधित (वर्गीकृत) दस्तावेजों को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि इससे पता चलता है कि अमेरिका के राष्ट्रीय एलर्जी एवं संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के पूर्व निदेशक एंथनी फौसी ने कोरोना महामारी की शुरुआत पर खुफिया आकलन को प्रभावित किया और बाद में कांग्रेस के सामने कसम खाकर ऐसे कनेक्शन को खारिज किया था।

राष्ट्रीय खुफिया निदेशक के दफ्तर (ओडीएनआई) ने इस दस्तावेज को जारी किया। गबार्ड का यह कदम ट्रंप प्रशासन के उस प्रयास में एक बड़ा कदम है, जिसमें महामारी की उत्पत्ति की फिर से समीक्षा करने और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान अमेरिकी सरकारी एजेंसियों, वैज्ञानिकों और खुफिया अधिकारियों की भूमिका की जांच करने की बात कही गई है।

गबार्ड के अनुसार, नए जारी किए गए बातचीत और दस्तावेजों से पता चलता है कि जब वायरस नैचुरली निकला या चीन के वुहान की लैब से, इसपर बहस तेज हुई तो कैसे फौसी ने राष्ट्रीय एलर्जी और संक्रामक रोग संस्थान (एनआईएआईडी) के निदेशक के तौर पर काम करते हुए खुफिया अधिकारियों के साथ बातचीत की।

गैबार्ड ने कहा, “कोविड-19 महामारी की वजह से हमारे लाखों साथी, अमेरिकियों और दुनिया भर के अनगिनत लोगों को बहुत मुश्किल भरे दौर से गुजरना पड़ा। सालों के झूठ, सेंसरशिप और छिपाने के बाद, अमेरिकी लोग पारदर्शिता, सच्चाई और जवाबदेही के हकदार हैं।”

उन्होंने आरोप लगाया कि “डॉ. फौसी जैसे राजनीतिक स्वार्थी नेताओं ने अपने गलत कामों और सत्ता के दुरुपयोग को छुपाया, खुफिया जानकारी में हेरफेर किया, कांग्रेस से झूठ बोला और देश को सुरक्षित रखने के लिए जरूरी सूचानाओं तक निर्वाचित राष्ट्रपति की पहुंच सीमित करके उनकी छवि को कमजोर किया।”

ओडीएनआई ने कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के पारदर्शिता संबंधी निर्देश के तहत उसने एक वर्ष तक चली गोपनीय दस्तावेजों को सार्वजनिक करने की समीक्षा प्रक्रिया संचालित की। इस दौरान अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों की गवाही भी एकत्र की गई। इन अधिकारियों ने आरोप लगाया कि वायरस की उत्पत्ति को लेकर आधिकारिक आकलनों पर सवाल उठाने के कारण उनके खिलाफ प्रतिशोधात्मक कार्रवाई की गई।

ओडीएनआई ने दावा किया कि फौसी के खुफिया अधिकारियों के साथ अच्छे संबंध थे, जिससे वह कोविड-19 की शुरुआत के बारे में चर्चा में अहम भूमिका निभा पाए। इसमें आरोप लगाया गया कि फौसी ने खुफिया एजेंसियों से सलाह लेने वाले विशेषज्ञों के बारे में सुझाव दिए और ऐसे आकलन बनाने में मदद की जिन्हें बाद में वैज्ञानिक सहमति के तौर पर सबके सामने पेश किया गया।

जुलाई 2021 के एक इंटेलिजेंस कम्युनिटी ईमेल में कहा गया था कि अधिकारी फौसी के सुझावों पर आगे बढ़ना चाहते थे क्योंकि उन्हें “एक एसएमई के तौर पर देखा जाता था, जिसके पास मौजूदा और ऐतिहासिक रिसर्च के बारे में बहुत जानकारी है और जो शायद ज्यादातर लोगों से बेहतर जानता है कि असली कोरोनावायरस विशेषज्ञ कौन हैं।”

तत्कालीन बाइडेन सरकार ने कोविड-19 की उत्पत्ति को लेकर 90 दिनों की समीक्षा बैठक की थी। इसे लेकर दस्तावेज में बताया गया है कि 2021 में खुफिया अधिकारी ने 90-दिनों की समीक्षा के दौरान फौसी की तरफ से रिकमेंड किए गए वैज्ञानिक तक पहुंचने को लेकर चर्चा कर रहे थे। आंतरिक पत्राचार में उन्हें एक सब्जेक्ट मैटर एक्सपर्ट बताया गया था, जिनकी रिकमेंडेशन्स को समीक्षा प्रक्रिया के लिए जरूरी माना गया था।

फौसी ने 2024 में कोरोना वायरस महामारी पर हाउस सिलेक्ट सबकमेटी के सामने अपनी गवाही में वायरल रिसर्च के बारे में इंटेलिजेंस एजेंसियों के साथ बातचीत की जानकारी से इनकार किया। रिपोर्ट में कहा गया है कि डॉक्यूमेंट्स में इंटेलिजेंस अधिकारियों और कोविड-की उत्पत्ति की जांच के बीच कई बातचीत दिखाई गई हैं।

उस समय कुछ सरकारी कम्युनिकेशन ने इस दावे को खारिज कर दिया था कि वायरस को लैब में बनाया गया था, जबकि दूसरों ने लैबोरेटरी एक्सीडेंट सिनेरियो और वुहान इंस्टीट्यूट ऑफ वायरोलॉजी की क्षमताओं की जांच की।

लॉरेंस लिवरमोर नेशनल लेबोरेटरी द्वारा मई 2020 में तैयार किए गए एक आकलन में यह निष्कर्ष निकाला गया कि वुहान में “लैबोरेटरी में बदले गए कोरोना वायरस के गलती से फैलने” के लिए हालात मौजूद थे और लेबोरेटरी और प्राकृतिक उत्पत्ति की परिकल्पनाओं को बराबर महत्व दिया गया।

ओडीएनआई रिलीज में अनियमितताओं का खुलासा करने वाले अधिकारियों के आरोप भी शामिल हैं कि जिन खुफिया विश्लेषकों ने लैब-लीक हाइपोथीसिस का समर्थन किया, उन्हें परेशानी झेलना पड़ी, किनारे कर दिया गया या अलग राय रखने से रोका गया। गबार्ड ने कहा कि इनमें से कई शिकायतों को आगे की समीक्षा के लिए इंटेलिजेंस कम्युनिटी इंस्पेक्टर जनरल के पास भेज दिया गया है।

कोविड-19 की शुरुआत महामारी के सबसे विवादित मुद्दों में से एक है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियां लंबे समय से बंटी हुई हैं, कुछ का मानना है कि यह जानवरों से प्राकृतिक रूप से फैला है और कुछ लैब से जुड़ी घटना को ज्यादा संभावित वजह मानते हैं।

 

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