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दुनिया

अमेरिकी लैब्स में चीनी नागरिकों की पहुंच पर उठे सवाल, दो वरिष्ठ सीनेटरों ने राष्ट्रीय सुरक्षा को लेकर जताई चिंता

Updated on Wednesday, June 24, 2026 13:56 PM IST

वाशिंगटन : अमेरिका के राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में चीनी नागरिकों की मौजूदगी और उनकी पहुंच को लेकर अब अमेरिकी राजनीति में बहस तेज हो गई है। अमेरिका के दो वरिष्ठ रिपब्लिकन सीनेटरों ने ट्रंप प्रशासन से इस मुद्दे पर तुरंत सख्त कदम उठाने की मांग की। उनका कहना है कि इससे संवेदनशील शोध, अत्याधुनिक तकनीक और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़ी महत्वपूर्ण जानकारियों के चीन के हाथ लगने का खतरा बढ़ रहा है।

अर्कांसस से सीनेटर टॉम कॉटन और यूटा से सीनेटर माइक ली ने अमेरिकी ऊर्जा मंत्री क्रिस राइट को एक पत्र लिखकर चिंता जताई। दोनों सांसदों ने कहा कि ऊर्जा विभाग (डीओई) के आंकड़े बताते हैं कि लंबे समय से बौद्धिक संपदा की चोरी और तकनीक हस्तांतरण को लेकर चिंताओं के बावजूद बड़ी संख्या में चीनी नागरिक अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं में आते, काम करते और शोध करते रहे हैं।

पत्र में दोनों सीनेटरों ने लिखा कि वे इस बात को लेकर गंभीर रूप से चिंतित हैं कि ऊर्जा विभाग अब भी चीन के नागरिकों को राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक पहुंच दे रहा है, जहां वे अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

ऊर्जा विभाग के आंकड़ों का हवाला देते हुए उन्होंने बताया कि वित्त वर्ष 2025 में लगभग 1,900 अल्पकालिक यात्राएं चीनी नागरिकों द्वारा की गईं। इसके अलावा करीब 1,300 दीर्घकालिक शोध नियुक्तियां और लगभग 2,100 औपचारिक रोजगार पदों पर भी चीनी नागरिक जुड़े रहे।

सीनेटरों ने यह भी बताया कि इसी अवधि के दौरान चीनी नागरिकों ने राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं की विभिन्न सुविधाओं तक 5,000 से अधिक बार प्रत्यक्ष या दूरस्थ पहुंच हासिल की।

उनका कहना है कि हालिया आंकड़े साफ तौर पर दिखाते हैं कि यह व्यवस्था अमेरिका के शोध तंत्र को विदेशी खुफिया गतिविधियों और तकनीकी हस्तांतरण के जोखिम में डाल रही है, जिसका फायदा अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों को मिल सकता है।

पत्र में दोनों सांसदों ने कहा कि चीन उभरती तकनीकों की दौड़ में अमेरिका का सबसे बड़ा प्रतिस्पर्धी है। उनका आरोप है कि चीन अमेरिकी बौद्धिक संपदा और तकनीकों की चोरी कर अमेरिका से आगे निकलने की कोशिश कर रहा है। उन्होंने कहा कि यह बात अच्छी तरह से दस्तावेजों में दर्ज है, फिर भी दशकों से चीनी वैज्ञानिकों को अमेरिकी राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक पहुंच दी जा रही है।

सीनेटरों ने ऊर्जा विभाग से यह भी पूछा कि उसकी सुरक्षा व्यवस्था चीन के राष्ट्रीय खुफिया कानून को किस तरह ध्यान में रखती है। उनका दावा है कि यह कानून चीनी नागरिकों को जरूरत पड़ने पर चीनी खुफिया एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए बाध्य करता है।

उन्होंने यह जानकारी भी मांगी कि क्या चीनी नागरिकों को नियंत्रित तकनीकों, निर्यात-नियंत्रित तकनीकों या अन्य संवेदनशील शोध क्षेत्रों तक पहुंच दी जा रही है।

सांसदों ने सवाल उठाया कि आखिर चीनी नागरिक अब भी अमेरिकी वैज्ञानिकों के साथ क्यों काम कर रहे हैं, रिमोट एक्सेस को कम करने के लिए क्या कदम उठाए जा रहे हैं, क्या ऊर्जा विभाग गैर-गोपनीय शोध कार्यक्रमों में उनकी भागीदारी सीमित करने की योजना बना रहा है और क्या विभिन्न प्रयोगशालाओं में चीनी शोधकर्ताओं की संख्या को लेकर कोई प्रतिखुफिया आकलन किया गया है।

पत्र में उन्होंने कहा कि ये आंकड़े न तो छोटे हैं और न ही सामान्य। उनके अनुसार यह अमेरिका की राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं, वहां काम करने वाले वैज्ञानिकों और उनके शोध विषयों को ऐसे प्रतिद्वंद्वी देश के सामने उजागर करता है जो अमेरिका को पीछे छोड़ने की कोशिश कर रहा है।

सीनेटरों ने निष्कर्ष में कहा कि राष्ट्रीय सुरक्षा और महत्वपूर्ण तकनीकों की रक्षा का ऊर्जा विभाग का मिशन तब तक पूरा नहीं हो सकता, जब तक हर साल हजारों चीनी नागरिक राष्ट्रीय प्रयोगशालाओं तक पहुंच बनाते रहेंगे।

जनवरी में भी टॉम कॉटन, माइक ली और नौ अन्य सीनेटरों ने इस मुद्दे को लेकर ऊर्जा विभाग से कार्रवाई की मांग की थी। इसके अलावा मार्च 2025 में उन्होंने अमेरिकी टेक्नोलॉजी को दुरुपयोग से बचाने वाला कानून (जीएटीई एक्ट) नामक विधेयक भी पेश किया था। उनका कहना है कि यह कानून अमेरिका के प्रतिद्वंद्वी देशों के नागरिकों की डीओई प्रयोगशालाओं तक पहुंच को सीमित करेगा।

अमेरिका की राष्ट्रीय प्रयोगशालाएं एआई, उन्नत कंप्यूटिंग, ऊर्जा प्रणालियों, सामग्री विज्ञान और परमाणु सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में महत्वपूर्ण शोध करती हैं। इन्हें अमेरिका की तकनीकी बढ़त और राष्ट्रीय सुरक्षा का प्रमुख आधार माना जाता है।

 

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