बिहार में एनकाउंटर के मामले एक के बाद एक सुलग रहे हैं। आरा में भरत तिवारी का मामला शांत भी नहीं हुआ था कि भागलपुर एनकाउंटर की साजिश का जिन्न प्रकट हो गया है। सेंट्रल जेल के बाहर से गत वर्ष अविनाश श्रीवास्तव का कथित अपहरण कर एनकाउंटर की साजिश रचने के मामले में हाईकोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया। इस मामले में न्यायमूर्ति अरुण कुमार झा ने भागलपुर जेल के अधीक्षक, पटना के चौक थानाध्यक्ष और दारोगा को कोर्ट में हाजिर होने के लिए कहा है।
इसके साथ ही हाईकोर्ट की ओर से बिहार के डीजीपी और जेल महानिरीक्षक और पटना के एसपी से जवाब तलब किया गया है। मामले की अगली सुनवाई चार सप्ताह बाद होगी। अधिकारियों को जवाब तैयार करने के लिए मोहलत दी गई है। अविनाश श्रीवास्तव की पत्नी की याचिका पर मामले की सुनवाई हुई।
क्या है मामला
याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता अधिवक्ता ओम प्रकाश कुमार पेश हुए। याचिका के मुताबिक, अविनाश श्रीवास्तव को 29 नवंबर 2025 की सुबह भागलपुर सेंट्रल जेल से जमानत पर रिहा किया गया था। आरोप है कि जेल के मुख्य द्वार से बाहर निकलते ही सादे कपड़ों में आए दो लोगों ने उनसे हाथापाई की और जबरन वाहन में बैठाकर साथ ले गए। इसके बाद उन्हें बरौनी तथा सबलपुर थाना क्षेत्र में ले जाया गया, जहां पुलिसकर्मी कथित रूप से उनका एनकाउंटर करने के लिए उचित स्थान की तलाश कर रहे थे। इसके बाद अविनाश श्रीवास्तव को पटना सिटी के चौक थाना में पीछे के रास्ते से लाया गया।
पुलिस पर गंभीर आरोप
आरोप है कि एक दिसंबर की आधी रात उन्हें रेलवे ओवरब्रिज के समीप ले जाकर उनकी जेब में जबरन गोलियां और कमर में एक देशी कट्टा रख दिया गया। इसके बाद उन्हें जान से मारने की धमकी देकर एक कथित स्वीकारोक्ति बयान का वीडियो बनाया गया। इसमें दबाव डालकर अपराध स्वीकार कराया गया।
आरा के भरत तिवारी एनकाउंटर ने बिहार पुलिस की कार्यशैली पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। इस कांड की आग बिहार के बाहर भी सुलग रही है। पुलिस ने भोजपुर के बिलौटी गांव के भरत तिवारी को पांच गोलियां मारकर मौत के घाट उतार दिया था। इसमें छह पुलिस कर्मियों को निलंबित किया गया। पूरे बिहार में आन्दोलन शुरू होने के बाद पुलिस वालों पर एफआईआर दर्ज कर कार्रवाई शुरू की गयी है। पटना हाईकोर्ट के रिटायर जज की अध्यक्षता में मामले की न्यायिक जांच कराई जा रही है।