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युवाओं की क्षमता को दिशा देने के लिए सरकार और विश्वविद्यालयों में बेहतर तालमेल जरूरी: पीएम मोदी

Updated on Friday, August 21, 2026 15:09 PM IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नीतियां बनाने में नये दृष्टिकोण लाने के लिए सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक सहयोग का बृहस्पतिवार को आह्वान किया। मोदी ने युवा पीढ़ी तक पहुंचने की अपनी कोशिशों के तहत कहा कि इस तरह के व्यापक जुड़ाव से नए और अनोखे विचार सामने आ सकते हैं। प्रधानमंत्री ने सचिवों के साथ तीसरी उच्च-स्तरीय बैठक की अध्यक्षता करते हुए सामूहिक प्रयासों के महत्व को रेखांकित किया और कोविड-19 महामारी तथा पश्चिम एशिया संकट के अनुभव का उल्लेख किया, जब अलग-अलग विभागों के अधिकारियों ने मिलकर काम किया था।

प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) द्वारा जारी एक बयान के मुताबिक प्रधानमंत्री ने नीति-निर्माण में नए नजरिए के लिए सरकारी विभागों, विश्वविद्यालयों और युवाओं के बीच अधिक संवाद का आह्वान किया। प्रधानमंत्री की ये टिप्पणियां पिछले महीने दिल्ली के जंतर-मंतर और देश के अन्य हिस्सों में राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट) के प्रश्नपत्र लीक को लेकर हुए छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के बीच आईं। छात्रों के विरोध-प्रदर्शनों के कारण धर्मेंद्र प्रधान को शिक्षा मंत्री के पद से इस्तीफा देना पड़ा। इन विरोध प्रदर्शनों के बीच प्रधानमंत्री ने स्वयं कई बार सोशल मीडिया के ज़रिए छात्रों को संदेश दिया।

मोदी ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर जारी एक पोस्ट में कहा कि सचिवों के साथ हुई बैठक में उन्होंने आधारभूत अवसंरचना और संपर्क, सुरक्षा और विदेश मामलों से जुड़े मंत्रालयों और विभागों के भविष्य की कार्ययोजना पर चर्चा की। उन्होंने कहा, ‘‘डेटा और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभावी इस्तेमाल, विश्वविद्यालयों के साथ अधिक जुड़ाव और अलग-अलग क्षेत्रों में अनुसंधान और नवोन्मेष पर अधिक ध्यान देने की जरूरत पर जोर दिया गया।’’ प्रधानमंत्री ने कहा कि सचिवों को तात्कालिक मुद्दों और सांख्यिकी के बारे में सोचने के साथ-साथ देश के भविष्य को आकार देने के लिए दीर्घकालिक दृष्टिकोण से भी सोचना चाहिए।

उन्होंने रेखांकित किया कि अलग-थलग रहकर काम करना केवल एक संगठनात्मक समस्या नहीं, बल्कि सोच-समझ की भी समस्या है। उन्होंने अधिकारियों से अपनी जिम्मेदारियों को पूरी तरह अपनाने का आग्रह किया। प्रधानमंत्री ने डेटा को राष्ट्रीय परिसंपत्ति और भविष्य के लिए एक संसाधन बताते हुए, इंसानी दखल और समझ को बनाए रखते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) के प्रभावी इस्तेमाल का आह्वान किया। मोदी ने अलग-अलग उपयोग के लिए आंकड़ों के एकत्र करने और उनके प्रबंधन के तरीकों में अंतर की ओर भी इशारा किया और ऐसे समाधान खोजने का आह्वान किया जिनसे बेहतर आपसी तालमेल संभव हो सके।

उन्होंने अनुसंधान और नवोन्मेष पर विशेषकर रक्षा क्षेत्र पर अधिक ध्यान देने का आह्वान किया ताकि इसे वैश्विक स्तर पर अधिक प्रतिस्पर्धी बनाया जा सके। प्रधानमंत्री ने भारत के समुद्री क्षेत्र को मजबूत करने के लिए एक व्यापक दृष्टिकोण की जरूरत पर भी चर्चा की। उन्होंने रेखांकित किया कि पोत निर्माण को आधारभूत संरचना का का दर्जा दिया गया है। मोदी ने साथ ही यह आकलन करने का आह्वान किया कि क्या तय किए गए लक्ष्य हासिल हो रहे हैं या नहीं। प्रधानमंत्री ने भारत के लिए बंदरगाह विकास से आगे बढ़कर बंदरगाह-आधारित विकास की ओर बढ़ने की जरूरत को दोहराया।

प्रधानमंत्री ने देश के समुद्री अवसंरचना का पूरा लाभ उठाने के लिए विनिर्माण इकाइयों और निर्यात उन्मुख इकाइयों के बीच बेहतर संपर्क की जरूरत को रेखांकित किया। उन्होंने वरिष्ठ अधिकारियों को कनिष्ठ साथियों के साथ अधिक व्यक्तिगत और अनौपचारिक संबंध स्थापित करने और अलग-अलग कैडर और विभागों के बीच मज़बूत नेटवर्क बनाने के लिए प्रोत्साहित किया। बयान के अनुसार सचिवों ने प्रमुख प्राथमिकताओं और इन्हें लागू करने में आने वाली चुनौतियों पर अपने दृष्टिकोण साझा किए।

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