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Haryana में निवेश का महाअभियान, मुंबई से खुलेगा उद्योगों के लिए नया द्वार...सैनी सरकार का करोड़ों के निवेश और 15 लाख रोजगार पर फोकस

Updated on Saturday, August 22, 2026 19:24 PM IST

चंडीगढ़ : हरियाणा को देश के प्रमुख औद्योगिक और निवेश केंद्र के रूप में स्थापित करने की दिशा में मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी की सरकार ने अब अपनी रणनीति को जमीन पर उतारने की तैयारी तेज कर दी है। नई औद्योगिक नीतियों के बाद सरकार का अगला बड़ा लक्ष्य निवेशकों तक सीधे पहुंच बनाना और प्रदेश में बड़े औद्योगिक प्रोजेक्ट आकर्षित करना है।

इसी रणनीति के तहत अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ग्लोबल इन्वेस्टर समिट ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ से पहले देश के प्रमुख औद्योगिक शहरों में रोड शो और निवेशक बैठकें आयोजित की जाएंगी।

इस अभियान की निगरानी मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के साथ मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर और उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के स्तर पर की जा रही है। सरकार का जोर केवल नीतियों की जानकारी देने पर नहीं, बल्कि निवेशकों को तैयार प्रोजेक्ट, जमीन, बुनियादी ढांचा, सुविधाएं और समयबद्ध मंजूरी की व्यवस्था का भरोसा दिलाने पर है।

10.55 लाख करोड़ निवेश, 15 लाख रोजगार का लक्ष्य
हरियाणा सरकार ने हाल ही में मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति और हरियाणा प्रगतिशील एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति-2026 लागू की हैं। इन नीतियों को प्रदेश की औद्योगिक अर्थव्यवस्था को नई गति देने की महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
मेक इन हरियाणा औद्योगिक नीति के तहत करीब 5 लाख करोड़ रुपये का निवेश आकर्षित करने और 10 लाख नए रोजगार पैदा करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति के माध्यम से करीब 55 हजार करोड़ रुपये के निवेश और 5 लाख रोजगार सृजन का लक्ष्य निर्धारित किया गया है।

सरकार की व्यापक रणनीति के तहत इन पहलों से कुल 10.55 लाख करोड़ रुपये का निवेश और 15 लाख रोजगार के अवसर सृजित करने का लक्ष्य है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के नेतृत्व में सरकार अब इसी लक्ष्य को निवेशकों के सामने प्रमुखता से रखने जा रही है।

नीतियों को कागज से जमीन तक पहुंचाने की चुनौती
इस पूरी प्रक्रिया में मुख्यमंत्री के चीफ प्रिंसिपल सेक्रेटरी राजेश खुल्लर की भूमिका अहम मानी जा रही है। सरकार की औद्योगिक नीतियों को प्रभावी तरीके से लागू कराने के साथ-साथ विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना बड़ी प्राथमिकता है।
वहीं उद्योग एवं वाणिज्य विभाग के आयुक्त एवं सचिव डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के स्तर पर नई औद्योगिक नीतियों के तहत मिलने वाले प्रोत्साहनों और सुविधाओं को लागू करने की विस्तृत रूपरेखा तैयार की जा रही है। एमएसएमई एवं निर्यात संवर्धन नीति में 37 आर्थिक और 23 सुविधाओं से जुड़े बदलाव किए गए हैं। सरकार की कोशिश है कि निवेशकों को आवेदन से लेकर स्वीकृति और प्रोत्साहन प्राप्त करने तक की प्रक्रिया सरल और पारदर्शी मिले तथा उन्हें अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें।

मुंबई से शुरू होगा निवेश जुटाने का अभियान
‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ की तैयारियों का पहला बड़ा चरण मुंबई से शुरू होने जा रहा है। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी 23 से 25 अगस्त तक मुंबई में निवेशकों और उद्योग जगत के प्रमुख लोगों के साथ संवाद करेंगे।

23 अगस्त की शाम मुख्यमंत्री रोड शो के माध्यम से उद्योगपतियों को हरियाणा की औद्योगिक संभावनाओं और नई नीतियों की जानकारी देंगे। इसके बाद करीब 200 उद्योगपतियों और कारोबारियों के साथ डिनर का कार्यक्रम प्रस्तावित है।
24 अगस्त को निवेशकों के साथ ब्रेकफास्ट बैठक होगी। इसके बाद मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में प्लानरी सेशन आयोजित किया जाएगा, जिसमें करीब 250 उद्योगपति और कारोबारी शामिल हो सकते हैं। शाम को उद्योग जगत के प्रमुख प्रतिनिधियों के साथ वन-टू-वन बैठकें प्रस्तावित हैं। 25 अगस्त को हरियाणा सरकार के वरिष्ठ अधिकारी निवेशकों के साथ बिजनेस-टू-गवर्नमेंट और वन-टू-वन बैठकों में निवेश संभावनाओं पर चर्चा करेंगे।

मुंबई के बाद बेंगलुरु और हैदराबाद पर नजर
मुंबई के बाद बेंगलुरु और हैदराबाद में भी रोड शो प्रस्तावित हैं। आईटी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटोमोबाइल, एयरोस्पेस, स्टार्टअप, फार्मा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में इन शहरों की बड़ी कंपनियों को देखते हुए सरकार की नजर इन बाजारों पर है।
हरियाणा सरकार पारंपरिक औद्योगिक क्षेत्रों के साथ-साथ नए और उभरते सेक्टरों में भी बड़े निवेश आकर्षित करना चाहती है। इसके लिए मुख्यमंत्री और वरिष्ठ अधिकारियों की टीम संभावित निवेशकों तथा औद्योगिक समूहों के साथ सीधा संवाद करेगी।

विदेशी निवेश के लिए भी खुलेगा रास्ता
राज्य सरकार की रणनीति घरेलू निवेश तक सीमित नहीं है। सरकार विदेशों में भी निवेशक रोड शो और बैठकों की तैयारी कर रही है। ऐसे देशों की पहचान की जा रही है जहां से हरियाणा में बड़े औद्योगिक निवेश की संभावनाएं हैं।
उद्योग विभाग यह आकलन करेगा कि किन क्षेत्रों में विदेशी कंपनियों को हरियाणा की ओर आकर्षित किया जा सकता है और उन्हें किस प्रकार के प्रोत्साहन दिए जा सकते हैं।

MSME को विकास की रीढ़ बनाने की तैयारी
सरकार की नई औद्योगिक रणनीति में बड़े उद्योगों के साथ MSME को भी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है। छोटे और मध्यम उद्योगों को मजबूत करके रोजगार और निर्यात दोनों बढ़ाने की योजना है। MSME बड़े उद्योगों की सप्लाई चेन को मजबूत करने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार के बड़े अवसर पैदा कर सकते हैं। इसलिए सरकार निवेश अभियान में छोटे और मध्यम उद्यमों को भी प्रमुखता देने की तैयारी में है।

स्टार्टअप और महिला उद्यमिता पर भी जोर
हरियाणा की स्टार्टअप नीति में महिला उद्यमियों की भागीदारी बढ़ाने का लक्ष्य रखा गया है। स्टार्टअप क्षेत्र में महिलाओं की हिस्सेदारी 45 प्रतिशत से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की दिशा में सरकार काम कर रही है। इसके साथ सब्सिडी और आर्थिक सहायता के प्रावधानों को भी मजबूत किया गया है।
इससे स्पष्ट है कि सरकार की निवेश रणनीति केवल बड़े औद्योगिक समूहों तक सीमित नहीं है, बल्कि स्टार्टअप, एमएसएमई और स्थानीय उद्यमियों को भी औद्योगिक विकास की प्रक्रिया में शामिल करने की कोशिश है।

11 साल बाद फिर वैश्विक मंच पर हरियाणा
अप्रैल 2027 में प्रस्तावित ‘हैपनिंग हरियाणा 2.0’ करीब 11 साल बाद प्रदेश में बड़े स्तर पर ग्लोबल इन्वेस्टर समिट की वापसी होगी। इससे पहले देश और विदेश में प्रस्तावित रोड शो को समिट की तैयारियों का अहम चरण माना जा रहा है। सरकार निवेशकों के सामने ऐसा हरियाणा प्रस्तुत करना चाहती है, जहां उद्योगों के लिए अनुकूल नीतियां, बेहतर बुनियादी ढांचा, कुशल मानव संसाधन और समयबद्ध प्रशासनिक सहयोग उपलब्ध हो।

उद्योग मंत्री राव नरबीर सिंह भी निवेश और रोजगार को सरकार की प्राथमिकता बता चुके हैं। सरकार की योजना कई शहरों में रोड शो आयोजित करने के साथ विदेशों में भी निवेश जुटाने की है। अब असली चुनौती इन महत्वाकांक्षी लक्ष्यों को वास्तविक निवेश में बदलने की होगी।

मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी का राजनीतिक नेतृत्व, राजेश खुल्लर का प्रशासनिक समन्वय और डॉ. अमित कुमार अग्रवाल के नेतृत्व में उद्योग विभाग की क्रियान्वयन क्षमता यह तय करेगी कि नई औद्योगिक नीतियां कितनी तेजी से जमीन पर उतरती हैं। मुंबई से शुरू होने वाला निवेश अभियान और आगे होने वाले रोड शो इसी दिशा में सरकार की पहली बड़ी परीक्षा माने जा सकते हैं।

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