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ऑपरेशन सिंदूर में किराना हिल्स पर टकराया हो सकता है युद्धक ड्रोन: पूर्व सीडीएस जनरल चौहान

Updated on Wednesday, August 26, 2026 13:28 PM IST

नई दिल्ली : भारत के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) जनरल अनिल चौहान ने कहा है कि पिछले साल ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन (युद्धक ड्रोन) संभवत पाकिस्तान के किरना हिल्स इलाके से टकराया हो सकता है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारतीय सशस्त्र बलों ने किराना हिल्स को जानबूझकर निशाना नहीं बनाया था।

गौरतलब है कि किराना हिल्स पाकिस्तानी सशस्त्र बलों के परमाणु ढांचे से जुड़ा महत्वपूर्ण इलाका माना जाता है। जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली स्थित विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद की परिस्थितियों पर आयोजित ‘विमर्श’ कार्यक्रम में यह जानकारी दी। उन्होंने ऑपरेशन के दौरान किराना हिल्स को लेकर सामने आई रिपोर्टों और घटनाक्रम पर विस्तार से बात की तथा बताया कि भारतीय लोइटरिंग म्यूनिशन के उस इलाके तक पहुंचने की संभावित वजह क्या हो सकती है।

जनरल चौहान के मुताबिक, भारतीय सेना ने पाकिस्तान के सरगोधा इलाके और उसके आसपास मौजूद रडारों की तलाश तथा उन्हें निशाना बनाने के लिए कई लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। इनमें से एक लोइटरिंग म्यूनिशन को इजरायल में डिजाइन किए गए हारोप ड्रोन के रूप में बताया गया है। उन्होंने बताया कि यह म्यूनिशन अपने निर्धारित इलाके में लक्ष्य की तलाश कर रहा था, लेकिन उसे लक्ष्य नहीं मिला और किराना हिल्स के आसपास संचालन के दौरान उसका ईंधन खत्म हो गया। ऐसी स्थिति में उसके संभवतः किराना हिल्स की किसी पहाड़ी से टकराने की संभावना है।

उन्होंने यह भी बताया कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के तत्कालीन महानिदेशक वायु अभियान, सेवानिवृत्त एयर मार्शल ए.के. भारती ने भी स्पष्ट किया था कि भारतीय सशस्त्र बलों ने किराना हिल्स में मौजूद परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना नहीं बनाया था। मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान मीडिया को संबोधित करते हुए एयर मार्शल ए.के. भारती ने कहा था, “हमें यह बताने के लिए धन्यवाद कि किराना हिल्स में कोई न्यूक्लियर इंस्टॉलेशन है। हमें इसके बारे में पता नहीं था। और हमने किराना हिल्स पर हमला नहीं किया है, चाहे वहाँ कुछ भी हो।”

जनरल चौहान ने घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि ऑपरेशन सिंदूर में हमले शुरू होने से पहले भारतीय बलों ने सरगोधा और किराना हिल्स की दिशा में बड़ी संख्या में लोइटरिंग म्यूनिशन भेजे थे। किराना हिल्स सरगोधा से करीब 10 किलोमीटर उत्तर में स्थित है। उन्होंने कहा, “उन हमलों से पहले, हमने सरगोधा और किराना हिल्स (जो सरगोधा से 10 किमी उत्तर में है) की तरफ बहुत से 'लोइटर एम्युनिशन' भेजे थे। ये 'लोइटर एम्युनिशन' सरगोधा और उसके आस-पास मौजूद रडार की तलाश कर रहे थे, और इनकी एक निश्चित समय-सीमा (लाइफटाइम) होती है।"

लोइटरिंग म्यूनिशन की कार्यप्रणाली समझाते हुए उन्होंने कहा कि यह हथियार किसी निर्धारित इलाके में कुछ समय तक घूमकर अपने लक्ष्य की तलाश कर सकता है। यदि उसे लक्ष्य नहीं मिलता है तो उसकी निर्धारित संचालन अवधि पूरी होने के बाद वह नीचे गिर सकता है। जनरल चौहान ने कहा, “यह लगभग दो घंटे तक हवा में मंडराता रहेगा और अगर इसे कोई टारगेट नहीं मिला, तो यह कहीं न कहीं जाकर टकरा जाएगा। यह उन्हीं पहाड़ियों में से किसी एक से टकराया होगा।”

इस तरह जनरल चौहान के बयान से किराना हिल्स को लेकर सामने आई अटकलों को एक संभावित स्पष्टीकरण मिला है। उन्होंने एक बार फिर यह स्पष्ट किया कि किराना हिल्स भारतीय सैन्य अभियान का जानबूझकर चुना गया लक्ष्य नहीं था। कार्यक्रम के दौरान पूर्व सीडीएस ने ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी एक और महत्वपूर्ण जानकारी साझा की। उन्होंने बताया कि भारतीय वायुसेना को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में स्थित स्कर्दू पर हमला करने की मंजूरी दी गई थी। हालांकि, खराब मौसम के कारण स्कर्दू में प्रस्तावित कार्रवाई को बाद में रद्द करना पड़ा और मिशन का रुख भोलारी की ओर कर दिया गया।

जनरल चौहान ने बताया कि ऑपरेशन के दौरान भारतीय वायुसेना प्रमुख ने उनसे सरगोधा पर हमला करने को लेकर पूछा था। इसकी अनुमति दी गई थी साथ ही दो और लक्ष्यों की पहचान करने को कहा था। इनमें से एक लक्ष्य स्कर्दू था। जनरल चौहान के अनुसार, स्कर्दू क्षेत्र में मौसम की स्थिति अनुकूल नहीं रहने के कारण वहां नियोजित अभियान को आगे बढ़ाना मुश्किल हो गया। इसके बाद भारतीय वायुसेना ने मिशन को भोलारी की ओर मोड़ दिया।

ऑपरेशन सिंदूर के दौरान 10 मई को भारतीय वायुसेना द्वारा भोलारी में किए गए हमले का दृश्य बाद में पूरे अभियान के सबसे प्रमुख दृश्यों में शामिल रहा। इस हमले में भोलारी स्थित वायुसेना के एक हैंगर को निशाना बनाया गया था। यह अभियान भारतीय वायुसेना की गांधीनगर स्थित दक्षिण पश्चिमी वायु कमान द्वारा संचालित हवाई अभियान का हिस्सा था।

पूर्व सीडीएस जनरल अनिल चौहान के ताजा बयान से यह भी स्पष्ट होता है कि ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सैन्य अभियानों में लक्ष्यों का चयन, लोइटरिंग म्यूनिशन का इस्तेमाल और मौसम जैसी परिचालन परिस्थितियों के आधार पर योजनाओं में बदलाव किस तरह किया गया। किराना हिल्स के मामले में उन्होंने साफ किया कि वहां किसी परमाणु प्रतिष्ठान को निशाना बनाने की कोई पूर्व नियोजित कार्रवाई नहीं थी।

 

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