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व्यापार

जुलाई में भारत के इंजीनियरिंग निर्यात में 18% की जोरदार बढ़ोतरी, 12.24 अरब डॉलर पर पहुंचा निर्यात

Updated on Thursday, August 27, 2026 17:24 PM IST

वैश्विक भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं और पश्चिम एशिया के प्रमुख व्यापारिक मार्गों में व्यवधानों के बावजूद भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों के निर्यात ने मजबूत प्रदर्शन जारी रखा है। ईईपीसी इंडिया द्वारा बुधवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, जुलाई 2026 में देश का इंजीनियरिंग निर्यात 18 प्रतिशत बढ़कर 12.24 अरब डॉलर पर पहुंच गया, जबकि जुलाई 2025 में यह 10.40 अरब डॉलर था।

यह वृद्धि भारत के कुल वस्तु निर्यात की वृद्धि दर से भी अधिक रही। जुलाई 2026 में देश के कुल माल निर्यात में 17 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि इंजीनियरिंग क्षेत्र ने उससे बेहतर प्रदर्शन करते हुए 18 प्रतिशत की वृद्धि हासिल की। सरकारी त्वरित अनुमान के अनुसार, जुलाई में भारत के कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 27.7 प्रतिशत रही।

इंजीनियरिंग निर्यात क्षेत्र का मजबूत प्रदर्शन चालू वित्त वर्ष 2026-27 के शुरुआती चार महीनों में भी जारी रहा है। अप्रैल से जुलाई के दौरान प्रत्येक महीने इंजीनियरिंग निर्यात 10 अरब डॉलर से ऊपर बना रहा। इस अवधि में कुल इंजीनियरिंग निर्यात 46.38 अरब डॉलर रहा, जबकि पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि में यह 39.24 अरब डॉलर था। इस प्रकार चार महीनों में निर्यात में 18.21 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई।

अप्रैल-जुलाई 2026-27 के दौरान भारत के कुल वस्तु निर्यात में इंजीनियरिंग उत्पादों की हिस्सेदारी 26.7 प्रतिशत रही, जो इस क्षेत्र के बढ़ते महत्व को दर्शाती है। भारत के इंजीनियरिंग उत्पादों के लिए अमेरिका सबसे बड़ा निर्यात बाजार बना हुआ है। जुलाई 2026 में अमेरिका को इंजीनियरिंग निर्यात 20 प्रतिशत बढ़कर 2.18 अरब डॉलर हो गया। वहीं अप्रैल से जुलाई की अवधि में अमेरिका को निर्यात 7.78 अरब डॉलर रहा, जो पिछले वर्ष की तुलना में 11.8 प्रतिशत अधिक है।

चीन के लिए भी भारतीय इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली। जुलाई में चीन को निर्यात 32 प्रतिशत बढ़कर 349 मिलियन डॉलर तक पहुंच गया। इसके अलावा, जर्मनी, ब्रिटेन और सिंगापुर जैसे प्रमुख बाजारों में भी अप्रैल-जुलाई अवधि के दौरान भारतीय इंजीनियरिंग निर्यात में अच्छी वृद्धि दर्ज की गई। हालांकि कुछ बाजारों में भू-राजनीतिक और लॉजिस्टिक चुनौतियों का असर भी देखने को मिला। विशेष रूप से सऊदी अरब को इंजीनियरिंग निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।

ईईपीसी इंडिया के अनुसार, होर्मुज जलडमरूमध्य के आसपास उत्पन्न लॉजिस्टिक संकट ने व्यापारिक गतिविधियों को प्रभावित किया है। इसके साथ ही क्षेत्रीय संघर्षों के कारण सऊदी अरब में कई परियोजनाओं की गति धीमी हुई है, जिससे इंजीनियरिंग उत्पादों की मांग पर असर पड़ा। रिपोर्ट के अनुसार, इंजीनियरिंग निर्यात में सुधार केवल कुछ उत्पादों तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका आधार काफी व्यापक रहा है। जुलाई में 34 इंजीनियरिंग उत्पाद समूहों में से 27 समूहों ने सालाना आधार पर वृद्धि दर्ज की।हालांकि कुछ श्रेणियों में कमजोरी भी देखने को मिली। लौह एवं इस्पात उत्पाद, सीसा और उससे जुड़े उत्पाद, मशीन टूल्स, विमान और अंतरिक्ष यान तथा उनके पुर्जे, क्रेन, लिफ्ट और विन्च, तथा कार्यालय उपकरण जैसे सात उत्पाद समूहों के निर्यात में गिरावट दर्ज की गई।

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