पंचकूला : अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में आज हरियाणा साहित्य एवं संस्कृति अकादमी के सभागार में एक महिला सम्मान पर्व का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में श्रीमती ज्योति मल्होत्रा, श्रीमती ममता यादव, श्रीमती ममता सौधा, सुश्री निरुपमा दत्त, डॉ. पाल कौर और सुश्री शहनाज़ भारती को अकादमी की ओर से सम्मानित किया गया।
इस मौके पर महिलाओं का काव्य पाठ भी हुआ।इस अवसर पर प्रख्यात पत्रकार और कवियत्री सुश्री निरुपमा दत्त को डॉ. एच के लाल स्मृति सम्मान से सम्मानित किया गया। उनको यह सम्मान साहित्य और पत्रकारिता में उनके योगदान के लिए प्रदान किया गया।
कार्यक्रम में श्री राजेश खुल्लर, मुख्य प्रधान सचिव, मुख्यमंत्री हरियाणा मुख्य अतिथि के रूप में पधारे और उनका विशेष काव्य पाठ भी हुआ। उन्होंने अपने जीवन की पहली कविता पढ़ी -
'प्रिय! तुम मेरे प्राण में हो'
हर अणु में दूर नभ तक, इस प्रकृति की सब लीलाएं
तुम सभी के आदि में हो, मध्य में हो और फिर, अवसान में हो,
तुम मेरे प्राण में हो
कविता सुनकर श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए और सभागार तालियों से गूंज उठा। श्री राजेश खुल्लर ने कहा कि आज हम सब यहाँ अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर एकत्र हुए हैं। यह दिन केवल उत्सव मनाने का नहीं, बल्कि महिलाओं के सम्मान, अधिकार और उनके योगदान को याद करने का दिन भी है।
द ट्रिब्यून समूह की मुख्य संपादक ज्योति मल्होत्रा ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में कहा की शहरी क्षेत्र में महिलाओं की स्थिति बेहतर हुई है लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में अभी भी बहुत कार्य इस दिशा में किया जाना है, इसमें समाज के सभी वर्गों का सहयोग अपेक्षित है।
अकादमी के कार्यकारी उपाध्यक्ष डॉ कुलदीप चंद अग्निहोत्री ने कहा कि आज की महिला हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही है — शिक्षा, विज्ञान, खेल, राजनीति और समाज सेवा में वह अपनी प्रतिभा से देश का नाम रोशन कर रही है। अगर इतिहास के पन्ने पलट कर देखें तो हमें अनेक महान महिलाओं के उदाहरण मिलते हैं — रानी लक्ष्मीबाई, सरोजिनी नायडू, कल्पना चावला और मैरी कॉम जैसी महिलाओं ने यह साबित किया है कि अगर अवसर मिले तो महिलाएँ किसी से कम नहीं हैं।
इस मौके पर अशोक नादिर की पुस्तक 11 हजार वीरांगनाएं, डॉ चंद्रकांता किं पुस्तक कश्मीरी कवयित्री लल्लेश्वरी और डॉ. जतिन्दर परवाज़ की शायरी की पुस्तक माज़ी के ज़ख्म का लोकार्पण भी हुआ।
इस मौके पर अकादमी के सदस्य सचिव श्री मनजीत सिंह, हिंदी प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ धर्मदेव विद्यार्थी, संस्कृत प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ सीडीएम कौशल, पंजाबी प्रकोष्ठ के निदेशक श्री हरपाल सिंह, दिल्ली साहित्य अकादमी के उपाध्यक्ष माधव कौशिक, श्री जे गणेशन (आईएएस), पूर्व एडीजीपी राजबीर देसवाल और ट्राईसिटी के साहित्यकार और साहित्य प्रेमी विशेष रूप में उपस्थित हुए।
उर्दू प्रकोष्ठ के निदेशक डॉ. चंद्र त्रिखा ने मेहमानों का स्वागत, धन्यवाद और मंच का संचालन करते हुए कहा महिला केवल एक शब्द नहीं है, बल्कि ममता, शक्ति, त्याग और प्रेरणा का प्रतीक है। एक महिला कभी माँ बनकर हमें जीवन देती है, बहन बनकर स्नेह देती है, पत्नी बनकर साथ निभाती है और बेटी बनकर घर में खुशियाँ भर देती है।