चंडीगढ़। हरियाणा के पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने बिजली कर्मचारियों की हड़ताल का समर्थन करते हुए कहा है कि जननायक जनता पार्टी निजीकरण के खिलाफ है और पार्टी पूरी तरह बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है। उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार द्वारा हरियाणा प्रदेश को इस तरह प्राइवेट हाथों में बेचने नहीं दिया जाएगा। शुक्रवार को सिरसा में मीडिया से रूबरू हुए दुष्यंत चौटाला ने कहा कि बिजली प्राधिकरण की ओर से निजी कंपनी को आगामी 25 साल के लिए गुरुग्राम व नूंह दोनों जिलों में बिजली वितरण के लिए ठेके दिए गए है। उन्होंने कहा कि यह मामला उस समय और अधिक संवेदनशील हो जाता है जब निजी कंपनी की वित्तीय हालत ऑन रिकॉर्ड सही नहीं बताई जा रही है। पूर्व डिप्टी सीएम ने कहा कि सबसे बड़ा सवाल यह है कि गुरुग्राम नूंह जिले से दक्षिण हरियाणा विद्युत निगम के राजस्व रिकॉर्ड में लगभग 50 फीसदी राजस्व उपरोक्त जिलों से आता है। उन्होंने कहा कि सर्वाधिक लाभ कमाने वाले इन जिलों में ही यह ठेका क्यों दिया गया? दुष्यंत ने कहा कि यह निजी कंपनी बिजली वितरण के लिए निगम का ही इंफ्रास्ट्रक्चर का उपयोग करेगी। उन्होंने कहा कि दिल्ली में ऐसे निर्णयों की पृष्ठभूमि में देखा गया है कि निजी कंपनियों ने आमजन को सुविधाएं कम और महंगे रेट पर बिजली उपलब्ध करवाई है जो सीधे-सीधे आमजन से छलावा सिद्ध हुई है। अब हरियाणा की भाजपा सरकार ने प्रदेश के लोगों को महंगे दामों पर बिजली उपलब्ध करवाने का निर्णय लिया है, जिसका जेजेपी पुरजोर विरोध करती है। पूर्व डिप्टी सीएम दुष्यंत चौटाला ने कहा कि भाजपा सरकार रेलवे के बाद अब बिजली सेक्टर का निजीकरण करने पर तुली है। उन्होंने सवाल उठाया कि एक तरफ तो भाजपा सरकार बिजली सुधारों में हरियाणा को बेहतर बनाने का दावा करती है तो दूसरी तरफ सरकार पावर सेक्टर को प्राइवेट हाथों में क्यों बेच रही है ? दुष्यंत चौटाला ने कहा कि निजी कंपनी को यह कार्य सौंपने का अर्थ है कि हरियाणा के युवाओं के लिए रोजगार के द्वार बंद होना। इस निर्णय से बिजली निगम में युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पूरी तरह से समाप्त हो जाएंगे। उन्होंने वर्तमान स्थितियों पर चिंता जाहिर करते हुए कहा कि सरकार की हठधर्मिता व उदासीनता से आज पिछले दो दिनों से लोगों को घरों में बिजली और पानी नसीब नहीं हो रहा है। इतना ही नहीं उद्योग धंधे, कारखाने बंद पड़े हैं। अस्पतालों में बिजली गुल है, मरीजों का बुरा हाल है और उनके ऑपरेशन तक रुके हुए हैं। ऐसे में राज्य सरकार तमाशबीन बनी हुई है। पूर्व उपमुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने कहा कि अगर हरियाणा के बिजली मंत्री असल में निजीकरण के खिलाफ है तो वे बिजली सेक्टर के हो रहे निजीकरण के विरूद्ध कई शक्तियों का इस्तेमाल कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि सरकार ने न तो अब तक इस निजीकरण के विरूद्ध हरियाणा बिजली नियामक आयोग के विद्युत अपीलीय न्यायाधिकरण के तहत कोई कदम उठाया है और न ही सरकार की ओर से बिजली आयोग द्वारा सिविल कोर्ट की तर्ज पर इस फैसले की समीक्षा करने बारे विचार किया गया है। दुष्यंत चौटाला ने सरकार से सवाल करते हुए कहा कि बिजली सेक्टर में बिना अनुभव वाली इस प्राइवेट कंपनी को 4700 करोड़ रूपए का ठेका किसने सौंपा ? उन्होंने मांग करते हुए कहा कि इसकी न केवल जांच होनी चाहिए बल्कि उनके खिलाफ सख्त से सख्त एक्शन लेना चाहिए। दुष्यंत चौटाला ने कहा कि जेजेपी बिजली कर्मचारियों के साथ खड़ी है और वह कर्मचारियों के साथ उनके आंदोलन में हर स्तर पर सहयोग करेगी। उन्होंने कहा कि सरकार ने निजी हाथों में ठेका सौंपकर निगम के योग्य कर्मचारियों की दक्षता को चुनौती देने का काम किया है जो दुर्भाग्यपूर्ण व निंदनीय है।