अभी तक तो नगर निगम पंचकूला घटिया स्तर की सडकों, चरमराती सफाई व्यवस्था, बंद रोड गलीज, पार्कों का निम्नस्तरीय रखरखाव, बंद पडी स्ट्रीट लाइटस, अवैध रेहडी फडियों से पार्षदों द्वारा हफ्ता वसूली, ठेकेदारों से मोटा कमीशन वसूलने, बाजारों तथा चौराहों पर सत्ताधारियों के अवैध होर्डिंगस जैसे कार्यों के लिए ही मशहूर था ।
लेकिन अब तो शहर की जनता द्वारा शहर के बेहतरीन रखरखाव के लिए दिए गए रूपयों पर भी निगम अधिकारियों ने सरेआम डाका डाल दिया है। यह आरोप लगाते हुए इंडियन नेशनल लोकदल के जिलाध्यक्ष पंचकूला शहरी एवं प्रदेश कोषाध्यक्ष मनोज अग्रवाल ने कहा कि अठावन करोड़ रूपए जैसी मोटी रकम एफ डी के नाम पर खुर्दबुर्द कर दी गई। यह बिना वरिष्ठ अधिकारियों की मिलीभगत के सम्भव ही नहीं हो सकता । हर साल चार्टेड एकाउटेंट फर्मों को लाखों रूपए इंटरनल आडिट के लिए दिए जाते हैं । क्या वो भी अधिकारियों से मिले हुए हैं । स्थानीय निकाय विभाग के उच्च अधिकारी भी आंख मूंदे बैठे रहे । मनोज अग्रवाल ने कहा कि प्रश्न यह उठता है कि दर्जनों राष्ट्रीय बैंकों के साथ साथ पंचकूला सेंट्रल कोआपरेटिव बैंक की भी बहुत सी शाखाएं पंचकूला में मौजूद हैं, लेकिन उनमें एफ डी ना करवा कर निजी क्षेत्र के बैंक में एफ डी करवाना अपने आप में सवाल पैदा करता है । उन्होंने कहा कि एक सौ अठावन करोड की एफ डी करवाई गई जबकि तीन जनवरी को तत्कालीन मेयर ने अपनी अतिंम प्रेस वार्ता में कहा था कि जब उन्होंने पद भार सम्भाला था निगम के पास सौ करोड की एफ डी थी और अब वह ढाई सौ करोड की एफ डी छोड कर जा रहे हैं । इसका मतलब स्पष्ट है कि उनके कार्यकाल में भी कोटक बैंक में एफ डी हुई है तो यह भी जांच का विषय है ।
मनोज अग्रवाल ने सरकार से मांग की है सरकार तुरंत तत्कालीन अधिकारियों, कर्मचारियों, आडिटरों, बैंक कर्मचारियों समेत सभी षडयंत्रकारियों पर अमानत में खयानत ( क्राइम आफ ब्रीच ) की धारा 316 के तहत मुकद्दमें दर्ज करवा कर उन्हें गिरफ्तार करे तथा जनता के पैसे की वसूली करे अन्यथा इंडियन नेशनल लोकदल इन मांगो को लेकर नगर निगम कार्यालय पर सोमवार सुबह धरना देगा।