नई दिल्ली(एजेंसी) : भारतीय पैरा निशानेबाज मोना अग्रवाल ने शुक्रवार को एशियाई पैरा खेलों 2026 में महिलाओं की 50 मीटर राइफल थ्री पोजिशंस एसएच1 स्पर्धा में विश्व रिकॉर्ड तोड़ते हुए स्वर्ण पदक जीता। मोना ने 357.5 अंक हासिल कर प्रतियोगिता में अपना दूसरा स्वर्ण पदक अपने नाम किया। इससे पहले भी वह महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में स्वर्ण पदक जीत चुकी हैं।
स्वीडन की निशानेबाज का विश्व रिकॉर्ड तोड़ा
मोना ने 357.5 अंक के साथ नया विश्व रिकॉर्ड बनाया। इससे पहले यह रिकॉर्ड स्वीडन की अन्ना बेंसन के नाम था, जिन्होंने इसी साल जुलाई में 356 अंक हासिल किए थे। मोना ने अपने शानदार प्रदर्शन से पुराने रिकॉर्ड को पीछे छोड़ दिया।
चीन और दक्षिण कोरिया की निशानेबाजों ने जीते पदक
इस स्पर्धा में चीन की झांग कुइपिंग ने 353.7 अंक के साथ रजत पदक जीता, जबकि दक्षिण कोरिया की किम मियुंग 344.4 अंक लेकर कांस्य पदक जीतने में सफल रहीं। भारत की अवनि लेखरा 333.2 अंक के साथ चौथे स्थान पर रहीं।
लगातार बेहतर प्रदर्शन कर बनाया रिकॉर्ड
38 वर्षीय मोना ने नीलिंग सीरीज में 101.4 अंक के साथ शुरुआत की। प्रोन सीरीज के बाद उनका कुल स्कोर 203.5 अंक हो गया। इसके बाद पहली दो स्टैंडिंग सीरीज में उन्होंने क्रमशः 256.5 और 307.3 अंक हासिल किए। आगे उन्होंने 317.7, 328.0, 338.1 और 347.7 अंक के पड़ाव पार करते हुए अंततः 357.5 अंक के साथ विश्व रिकॉर्ड कायम किया।
क्या है एसएच1 श्रेणी?
पैरा निशानेबाजी में एसएच1 श्रेणी उन खिलाड़ियों के लिए है, जिनके निचले या ऊपरी अंगों में शारीरिक अक्षमता होती है, लेकिन वे बिना गन स्टैंड या अन्य सहारे के अपने हाथों से राइफल का वजन संभाल सकते हैं।
10 मीटर एयर राइफल में भी जीता था स्वर्ण
मोना ने इससे पहले महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में खेलों का रिकॉर्ड बनाते हुए 250 अंक के साथ स्वर्ण पदक जीता था। इस स्पर्धा में अवनि लेखरा ने रजत पदक हासिल किया था। इस तरह मोना ने एशियाई पैरा खेलों में अपना दूसरा स्वर्ण जीतकर भारतीय अभियान को एक और बड़ी उपलब्धि दिलाई।
नौ महीने की उम्र में हुआ पोलियो, व्हीलचेयर को नहीं बनने दिया बाधा
राजस्थान के सीकर में जन्मीं मोना अग्रवाल अब जयपुर में रहती हैं। नौ महीने की उम्र में पोलियो होने के कारण उनके दोनों पैर प्रभावित हुए और उन्हें व्हीलचेयर का सहारा लेना पड़ा। हालांकि, उन्होंने अपनी शारीरिक अक्षमता को खेलों में आगे बढ़ने की राह में बाधा नहीं बनने दिया।
शॉटपुट से निशानेबाजी तक का सफर
मोना ने शॉटपुट, चक्काफेंक, भालाफेंक और भारोत्तोलन जैसे खेलों में भी हाथ आजमाया। दो बच्चों की मां मोना ने दिसंबर 2021 में निशानेबाजी शुरू की। इसके बाद उन्होंने लगातार मेहनत और प्रदर्शन के दम पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बनाई।
विश्व कप से पैरालंपिक तक बनाई पहचान
मोना ने 2023 में क्रोएशिया में आयोजित विश्व कप से अंतरराष्ट्रीय पदार्पण किया और मिश्रित टीम स्पर्धा में कांस्य पदक जीता। इसके बाद 2024 में दिल्ली में आयोजित विश्व कप में एशियाई रिकॉर्ड के साथ स्वर्ण पदक हासिल कर पैरालंपिक कोटा प्राप्त किया। पेरिस पैरालंपिक में पदार्पण करते हुए उन्होंने महिलाओं की 10 मीटर एयर राइफल स्टैंडिंग एसएच1 स्पर्धा में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा साबित की।