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हिमाचल प्रदेश

आउटसोर्स कर्मचारियों को नियमित करने की कोई स्थाई नीति नहीं, सदन में बोले CM सुक्खू

Updated on Wednesday, April 01, 2026 18:05 PM IST

शिमला : हिमाचल प्रदेश सरकार ने बुधवार को विधानसभा में बताया कि आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवाओं को नियमित करने के लिए फिलहाल कोई स्थाई नीति नहीं है। विधायक प्रकाश राणा और डॉ. जनक राज द्वारा पूछे गए लिखित प्रश्न के उत्तर में मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने बताया कि राज्य सरकार नियमित और संविदा कर्मचारियों के वेतन व भत्तों पर हर महीने लगभग 1,172 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। इसके मुकाबले आउटसोर्स कर्मचारियों पर खर्च काफी कम है। इस मद में सरकार लगभग 19 करोड़ रुपए प्रति माह खर्च करती है। सरकार ने सदन को यह भी बताया कि विभिन्न विभागों में करीब 13,000 कर्मचारी आउटसोर्स आधार पर कार्यरत हैं।


राज्य के खजाने पर पेंशन का बोझ भी काफी अधिक बना हुआ है। वित्त वर्ष 2024-25 के दौरान पेंशनरों को कुल 10,536 करोड़ रुपये का भुगतान किया गया। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि पेंशन से संबंधित आंकड़े कोषागार और अकाउंट्स संगठन द्वारा रखे जाते हैं और इसमें विभाग या श्रेणी के आधार पर कोई अलग-अलग वर्गीकरण नहीं होता, क्योंकि सभी सेवानिवृत्त कर्मचारियों को एक ही पेंशनर श्रेणी में रखा जाता है।


नीति के स्तर पर सरकार ने दोहराया कि नियमित पदों को आउटसोर्सिंग से नहीं भरा जाता है। हालांकि, कुछ सेवाओं को हिमाचल प्रदेश वित्तीय नियम, 2009 के तहत निर्धारित टेंडर प्रक्रिया के माध्यम से आउटसोर्स किया गया है। आउटसोर्स कर्मचारियों के कार्य-परिस्थितियों और सेवा शर्तों की सुरक्षा के लिए राज्य सरकार ने 1 जुलाई 2017 और 18 जनवरी 2021 को दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों के अनुसार सेवा प्रदाता एजेंसियों को हर महीने की 7 तारीख तक कर्मचारियों को वेतन देना अनिवार्य है।


सरकार ने यह भी स्पष्ट किया कि आउटसोर्स कर्मचारी, सरकारी कर्मचारी नहीं माने जाते। इसलिए उन्हें दीर्घकालिक नौकरी सुरक्षा देने या कोई स्थायी नीति बनाने का फिलहाल कोई प्रस्ताव नहीं है। सरकार ने यह भी कहा कि दिशा-निर्देश लागू होने के बाद से आउटसोर्स कर्मचारियों को वेतन में देरी का कोई मामला उसके संज्ञान में नहीं आया है।

 

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