शिमला : प्रदेश के विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में सडक़ों के निर्माण की कवायद बजट के अभाव में लटक गई है। राज्य में ऐसी सडक़ों की संख्या 224 के करीब है। इनके निर्माण हेतु वन अधिकार अधिनियम के तहत स्वीकृतियां भी मिल गई है, लेकिन धनराशि का प्रबंध न होने के कारण अधिकतर सडक़ों की प्रशासनिक अनुमति और व्यय स्वीकृति की प्रक्रिया लोक निर्माण विभाग आरंभ नहीं कर पाया है, जबकि कुछ क्षेत्रों की सडक़ों के निर्माण हेतु प्रशासनिक अनुमति और व्यय स्वीकृति के लिए मामले आगामी कार्रवाई के लिए भेज भी दिए है। लोक निर्माण विभाग के तहत राज्य के अलग-अलग विधानसभा क्षेत्रों में करीब 224 सडक़ों का निर्माण किया जाना है।
इसमें कुसुम्पटी विधानसभा क्षेत्र की 46, जुब्बल 43, चौपाल 25, जोगिंद्रनगर 30, रोहडू 22 और रामपुर हलके में 14 सडक़ निर्माण की योजनाएं है। इसी तरह मंडी सदर एक, करसोग सात, बैजनाथ पांच, ठियोग पांच, शिमला ग्रामीण चार, अर्की चार, सोलन एक, सुलाह एक, कांगड़ा पांच, सरकाघाट एक व शाहपुर, देहरा और जसवां परागपुर की तीन-तीन सडक़ें शामिल है। पता चला है कि चौपाल हलके की प्रस्तावित सडक़ों के एस्टीमेट उपमंडल स्तर पर तैयार किए जा रहे है।
नाबार्ड को भेजी डीपीआर
लोक निर्माण विभाग का कहना है कि 224 सडक़ों की एफआरए की अनुमति प्राप्त हुई हैं। जिसके बाद इनमें से कुछ सडक़ों की डीपीआर भी तैयार की नाबार्ड को भेजी गई है। कई सडक़ों की प्रशासनिक अनुमति और व्यय स्वीकृति का भी इंतजार है।
प्रदेश को केंद्र सरकार ने दी बड़ी राहत
अहम है कि प्रदेश में योजना के तीसरे चरण में बन रही अधिकतर सडक़ें ग्रामीण क्षेत्रों की है और कठिन भोगौलिक परिस्थितियों के बीच यहां पर इनके कार्य चले हुए है। केंद्र सरकार की ओर से योजना के तीसरे चरण के तहत चल रहे कार्यों को पूरा करने के लिए दी गई दो वर्षों की एक्सटेंशन से इन्हें पूरा करने के लिए भी प्रदेश को प्रर्याप्त समय मिल गया है। लोक निर्माण विभाग के अतिरिक्त सचिव सुरजीत राठौर का कहना है कि प्रधानमंत्री ग्राम सडक़ योजना के तीसरे चरण के चल रहे कार्यों को पूरा करने की समयावधि को 31 मार्च, 2028 तक बढ़ा दिया गया है।