शिमला : प्रदेश में सरकारी आवासों के खाली रहने की कीमत अब जल शक्ति विभाग को चुकानी पड़ रही है। जल शक्ति विभाग के 288 मामलों में 10,91,638 रुपए के पानी के बिल वर्षों से लंबित पड़े हैं। ये सभी बिल उस अवधि के हैं, जब आवास खाली थे, लेकिन पानी के कनेक्शन चालू रहे। बड़ी बात यह है कि यह पेंडेंसी कोई कुछ समय की नहीं, बल्कि कई साल पुरानी है। आवास खाली रहने के दौरान बने इन बिलों की जिम्मेदारी तय न होने के कारण मामला लगातार उलझता गया और अब यह लाखों में पहुंच चुका है। सरकारी आंकड़ों के तहत सिरमौर जिला के नाहन और पांवटा साहिब की सरकारी कॉलोनियों में सबसे ज्यादा बकाया सामने आया है। यहां पर 686585 रुपए का बिल लंबित पड़ा हुआ है। डीसी ऑफिस, मेडिकल, पुलिस, वन और पीडब्ल्यूडी कॉलोनियों में वर्षों से बिल जमा नहीं हुए, जिससे यह आंकड़ा बहुत ऊपर पहुंच गया।
इसी तरह कुल्लू जिला में 2,31,063 रुपए के बिल हैं। इसमें सरवरी और आसपास के सरकारी आवासों में भी लंबे समय से बिल लंबित हैं। विभिन्न विभागों के क्वार्टरों में यह समस्या लगातार बढ़ती रही। आंकड़ों के तहत शिमला जिला के रामपुर, सुन्नी और रोहड़ू क्षेत्रों में अलग-अलग विभागों के सरकारी आवासों में पानी के बिलों की पेंडेंसी 98,471 रुपए दर्ज की गई है। इसके अलावा मंडी जिला 37,491 रुपए के बिल लंबित हैं। इसमें सुंदरनगर सहित अन्य क्षेत्रों के सरकारी संस्थानों और आवासों में भी बिल वर्षों से अटके हुए हैं। ये सरकारी क्वार्टर लंबे समय तक खाली पड़े रहे, लेकिन पानी के कनेक्शन बंद नहीं किए गए। बाद में आबंटन होने पर यह साफ नहीं हो पाया कि पुराने बकाया का भुगतान किसके जिम्मे आएगा। यही वजह है कि मामला वर्षों से अटका पड़ा है।
विभाग पर बिना पॉलिसी बढ़ रहा आर्थिक बोझ
सरकारी आवासों की खाली अवधि के दौरान बने इन पानी के बिलों की जिम्मेदारी तय न होना अब सवाल खड़े कर रहा है। अगर जल्द नीति नहीं बनी, तो जलशक्ति विभाग पर यह आर्थिक बोझ और बढ़ सकता है। उधर, अभी तक इस बावत कोई ठोस निर्णय नहीं लिया है कि पेंडिंग बिलों का भुगतान कौन करेगा और न ही इसको लेकर जबावदेही तय हो पाई है।