हिमाचल प्रदेश सरकार ने युवाओं को रोजगार देने और प्रदूषण कम करने के उद्देश्य से ई-टैक्सी योजना के लिए नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। यह योजना राजीव गांधी स्वरोजगार स्टार्टअप योजना-2023 के तहत लागू की गई है और इसमें पहले जारी सभी पुराने आदेशों को रद्द कर दिया है। सरकार के नए नियमों के अनुसार राज्य के बेरोजगार युवाओं को ई-टैक्सी खरीदने पर वाहन की कीमत का 50 प्रतिशत तक सबसिडी दी जाएगी। इस योजना का मुख्य उद्देश्य युवाओं को स्वरोजगार देना और हिमाचल को ग्रीन स्टेट की ओर ले जाना है। इस योजना में लाभ लेने के लिए कुछ शर्तें तय की गई हैं। आवेदक हिमाचल का स्थायी निवासी होना चाहिए, उसकी उम्र 23 से 45 साल के बीच होनी चाहिए और वह बेरोजगार होना जरूरी है। इसके अलावा परिवार की सालाना आय तीन लाख रुपए से अधिक नहीं होनी चाहिए और आवेदक के पास वैध कॉमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस होना अनिवार्य है। अधिसूचना के अनुसार 30 लाख से ऊपर कीमत की गाड़ी कैबिनेट मंत्री के साथ अटैच होगी और हर महीने की दस तारीख से पहले भुगतान करना होगा।
योजना के तहत चुने गए युवाओं को सरकारी विभागों में ई-टैक्सी चलाने का मौका मिलेगा। इसके लिए संबंधित विभागए बैंक और लाभार्थी के बीच ट्रिपार्टाइट एग्रीमेंट किया जाएगा। सरकार वाहन की कीमत का 50 प्रतिशत सबसिडी देगी, जबकि 40 प्रतिशत बैंक लोन और दस प्रतिशत राशि लाभार्थी को खुद देनी होगी। सरकारी विभागों द्वारा इन ई-टैक्सियों को कम से कम पांच साल तक हायर किया जाएगा। इस दौरान लाभार्थी को हर महीने करीब 55 हजार रुपए (बेस मॉडल के लिए) भुगतान किया जाएगा। योजना में यह भी स्पष्ट किया है कि ई-टैक्सी मालिक को खुद वाहन चलाना होगा। काम छोडऩे पर सबसिडी वापस करनी पड़ सकती है। सभी ई-टैक्सियों में जीपीएस और पैनिक बटन लगाना जरूरी होगा और वाहन का निरीक्षण आरटीओ द्वारा किया जाएगा।