शिमला : राज्य में वन विभाग अब मृदा संरक्षण के कार्यों को नहीं करेगा। नीति में बदलाव की ओर एक कदम बढ़ाते हुए विभाग ने स्प्रिंग शेड मैनेजमेंट पर फोकस करने का फैसला लिया है। इसके प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण और इन्हें पुनर्जीवित किया जाएगा। इस कार्य को धरातल पर उतारने से पहले सभी वनमंड़लों को मैपिंग करने के निर्देश भी जारी किए गए है। खबर की पुष्टि प्रिंसीपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट डा. संजय सूद ने की है। जानकारी के अनुसार वन विभाग में मृदा संरक्षण के कार्यों को प्राथमिकता दी जाती रही है। इसके तहत विभाग के अधिकतर कार्य डंगे लगाने तक ही सीमित रह जाते थे। वन विभाग ने अब प्रदेश में हटकर कार्य करने की दिशा में कदम बढ़ाते हुए प्राकृतिक जलस्रोतों का संरक्षण करने फैसला लिया है।
पता चला है कि विभाग ने इस कार्य के लिए सभी मंडलों में पेयजल स्रोतों की मैपिंग करने के निर्देश जारी किए हैं। प्रिंसीपल चीफ कंजरवेटर ऑफ फोरेस्ट डा. संजय सूद ने कहा कि विभाग अब मृदा संरक्षण के बजाय प्राकृतिक जल स्रोतों के संरक्षण करने जा रहा है। डा. संजय सूद ने बताया कि मैपिंग का कार्य होने के उपरांत विभाग स्प्रिंग मैनेजमेंट का कार्य करेगा। इसमें सूख चुके प्राकृतिक जल स्रोतों को पुनर्जीवित करने के लिए कार्य किया जाएगा। वहीं सूखने के कगार पर पहुंच चुके प्राकृतिक जल स्रोतों पर भी एक रणनीति के तहत काम किया जाएगा। इसके लिए तीन वर्षों का पूरा प्लान तैयार किया गया है।