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जम्मू-कश्मीर: डोडा में आरसेटी योजना से लड़कियां बन रहीं आत्मनिर्भर, टेलरिंग प्रशिक्षण से मिल रहा नया अवसर

Updated on Friday, May 08, 2026 17:00 PM IST

डोडा : ग्रामीण क्षेत्रों में युवाओं को स्वरोजगार के लिए सक्षम बनाने के उद्देश्य से चलाए जा रहे आरसेटी (ग्रामीण स्वरोजगार प्रशिक्षण संस्थान) कार्यक्रम का सकारात्मक प्रभाव अब जम्मू-कश्मीर के डोडा जिले में भी देखने को मिल रहा है। ग्रामीण विकास मंत्रालय और स्‍टेट बैंक आफ इंडिया (एसबीआई) की संयुक्त पहल के तहत संचालित इस योजना के माध्यम से युवाओं, विशेषकर लड़कियों को विभिन्न रोजगारपरक कौशलों का प्रशिक्षण दिया जा रहा है।

डोडा जिले में बड़ी संख्या में लड़कियां कटिंग और टेलरिंग कोर्स में दाखिला लेकर सिलाई और डिजाइनिंग की बारीकियां सीख रही हैं। प्रशिक्षण प्राप्त कर रहीं लड़कियों का कहना है कि कोर्स पूरा होने के बाद वे स्वयं की यूनिट स्थापित कर स्वरोजगार शुरू करना चाहती हैं, ताकि वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकें।

आरसेटी संस्थानों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण बेरोजगारी को कम करना और युवाओं को छोटे-छोटे उद्यम स्थापित करने के लिए तैयार करना है। इसके तहत कृषि, उत्पाद निर्माण, प्रसंस्करण और सामान्य सेवा क्षेत्रों में 6 दिन से लेकर 6 सप्ताह तक के निःशुल्क आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाए जाते हैं।

इन पाठ्यक्रमों में डेयरी फार्मिंग, मुर्गी पालन, टेलरिंग, ब्यूटी पार्लर प्रबंधन, मोबाइल रिपेयरिंग, कंप्यूटर हार्डवेयर और विभिन्न कृषि गतिविधियों का प्रशिक्षण शामिल है। खास बात यह है कि प्रशिक्षण के दौरान लाभार्थियों को भोजन और रहने की सुविधा भी पूरी तरह मुफ्त प्रदान की जाती है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के युवक-युवतियां बिना किसी बोझ के प्रशिक्षण प्राप्त कर सकें।

प्रशिक्षण प्राप्त कर रही लाभार्थी इंशा बानो ने समाचार एजेंसी आईएएनएस से बातचीत में कहा कि यह योजना ग्रामीण युवाओं के लिए बेहद लाभकारी साबित हो रही है। उन्होंने बताया कि दस दिनों के प्रशिक्षण के दौरान उन्हें सिलाई और व्यवसाय से जुड़ी कई महत्वपूर्ण बातें सीखने को मिली हैं।

इंशा के मुताबिक, हर किसी को पढ़ाई पूरी होने के बाद नौकरी मिलना संभव नहीं होता, ऐसे में स्वरोजगार ही बेहतर विकल्प बन सकता है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण पूरा होने के बाद वे अपना छोटा व्यवसाय शुरू कर आत्मनिर्भर बनना चाहती हैं। साथ ही उन्होंने अन्य युवाओं से भी इस योजना का लाभ उठाने की अपील की।

एक अन्य लाभार्थी अबिशा शरीफ ने बताया कि टेलरिंग प्रशिक्षण के माध्यम से लड़कियों को अपने पैरों पर खड़ा होने का अवसर मिल रहा है। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद वे स्वयं का कारोबार शुरू कर सकती हैं और बेरोजगारी की समस्या से बाहर निकल सकती हैं।

अबिशा का मानना है कि घरों में खाली बैठी लड़कियों के लिए यह योजना किसी वरदान से कम नहीं है, क्योंकि इससे उन्हें हुनर सीखने और आर्थिक रूप से मजबूत बनने का अवसर मिल रहा है।

प्रशिक्षक अर्पणा कोरवाल ने जानकारी देते हुए बताया कि यह 31 दिनों का विस्तृत प्रशिक्षण कार्यक्रम होता है, जिसमें शुरुआत में प्रतिभागियों का परिचय कराया जाता है और फिर उन्हें सिलाई की माप, कपड़ों के प्रकार और टेलरिंग की तकनीकी बारीकियों के बारे में सिखाया जाता है।

उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल सिलाई सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं और लड़कियों को इतना सक्षम बनाना है कि वे अपना व्यवसाय सफलतापूर्वक चला सकें। प्रशिक्षण पूरा होने पर प्रतिभागियों को प्रमाण पत्र भी दिया जाता है, जिसकी सहायता से वे बैंक से आसानी से ऋण प्राप्त कर अपना स्वरोजगार शुरू कर सकती हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में आरसेटी की यह पहल महत्वपूर्ण साबित हो रही है। यह न केवल युवाओं को रोजगारपरक कौशल प्रदान कर रही है, बल्कि उन्हें आत्मविश्वास और आर्थिक स्वतंत्रता की नई राह भी दिखा रही है।

 

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