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Stop Buying Gold : आखिर PM मोदी ने क्यों कहा, 'एक साल गोल्ड मत खरीदो' क्या है बड़ी वजह, जानें

Updated on Monday, May 11, 2026 11:16 AM IST

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार, 10 मई, 2026 को नागरिकों से बड़ी अपील की। उन्होंने देश में बढ़ते आर्थिक दबावों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच विदेशी मुद्रा भंडार को बचाने में मदद करने के लिए एक साल तक सोना न खरीदने की सलाह दी।


हैदराबाद में एक रैली को संबोधित करते हुए PM मोदी ने कहा, "एक समय था जब किसी संकट या युद्ध के दौरान लोग देश के लिए सोना दान करते थे। आज, दान की कोई ज़रूरत नहीं है। लेकिन देश के लिए, हमें यह तय करना होगा कि एक साल तक हम किसी भी समारोह या कार्यक्रम में सोने के आभूषण नहीं खरीदेंगे। हम सोना नहीं खरीदेंगे। विदेशी मुद्रा बचाने के लिए, हमारी देशभक्ति की परीक्षा हो रही है। हमें इस चुनौती को स्वीकार करना चाहिए और विदेशी मुद्रा बचाने में मदद करनी चाहिए।"


पीएम मोदी ने क्यों कहा सोना न खरीदें, क्या है वजह?
प्रधानमंत्री Narendra Modi ने देश की अर्थव्यवस्था, विदेशी मुद्रा भंडार और आयात पर बढ़ती निर्भरता को लेकर अहम संदेश दिया। उन्होंने कहा कि भारत की मेहनत की कमाई का बड़ा हिस्सा सोना, Crude Oil और तांबा जैसे संसाधनों के आयात में विदेशों को चला जाता है। ऐसे में प्रधानमंत्री ने लोगों से अपील की कि अगर देशवासी कुछ समय के लिए सोने की खरीद कम कर दें, तो भारत अरबों डॉलर की विदेशी मुद्रा अपने देश में ही बचा सकता है।


सोना न खरीदने से देश पर क्या होगा असर?
पीएम मोदी ने कहा कि भारत दुनिया के सबसे बड़े Gold Import करने वाले देशों में शामिल है। देश में शादी, त्योहार और निवेश के नाम पर हर साल भारी मात्रा में सोना खरीदा जाता है। उन्होंने बताया कि सोने का भुगतान डॉलर में करना पड़ता है, जिससे भारत के विदेशी मुद्रा भंडार पर दबाव बढ़ता है। PM मोदी ने लोगों से अपील करते हुए कहा कि क्या देशहित में कम से कम एक साल तक सोने की खरीद को सीमित नहीं किया जा सकता। उनका कहना था कि यदि लोग जरूरत से ज्यादा सोना खरीदने से बचें, तो बचाई गई विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल देश के इंफ्रास्ट्रक्चर, टेक्नोलॉजी और विकास परियोजनाओं में किया जा सकता है। उन्होंने यह भी कहा कि इससे भारतीय रुपये को मजबूती मिलेगी और चालू खाता घाटा यानी Current Account Deficit (CAD) कम करने में मदद मिलेगी।


foreign exchange क्यों है इतनी जरूरी?
प्रधानमंत्री ने कहा कि विदेशी मुद्रा किसी भी देश की आर्थिक ताकत का बड़ा आधार होती है। भारत को कई जरूरी चीजें विदेशों से खरीदनी पड़ती हैं, जिनका भुगतान डॉलर जैसी विदेशी करेंसी में होता है। अगर विदेशी मुद्रा भंडार मजबूत रहता है, तो देश आर्थिक संकट, वैश्विक मंदी या अंतरराष्ट्रीय बाजार में उतार-चढ़ाव का बेहतर तरीके से सामना कर सकता है।उन्होंने कहा कि भारत को अपनी विदेशी मुद्रा का इस्तेमाल रणनीतिक तरीके से करना होगा ताकि भविष्य में आर्थिक मजबूती बनी रहे।


कॉपर को बताया ‘भविष्य का सोना’
अपने भाषण में प्रधानमंत्री ने तांबे यानी Copper को आने वाले समय का सबसे महत्वपूर्ण संसाधन बताया। उन्होंने कहा कि इलेक्ट्रिक वाहन (EV), सोलर पैनल, बैटरी, डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर और आधुनिक टेक्नोलॉजी में कॉपर की मांग तेजी से बढ़ रही है। भारत अभी अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है, जिससे विदेशी मुद्रा खर्च होती है। PM मोदी ने उद्योग जगत से अपील की कि वे कॉपर रिसाइक्लिंग, माइनिंग और प्रोसेसिंग सेक्टर में निवेश बढ़ाएं। उन्होंने कहा कि जैसे भारत सेमीकंडक्टर मिशन पर तेजी से काम कर रहा है, उसी तरह कॉपर सेक्टर को भी राष्ट्रीय प्राथमिकता बनाना जरूरी है। उन्होंने इसे Make in India अभियान का अगला बड़ा चरण बताया।


सेमीकंडक्टर और टेक्नोलॉजी पर जोर
प्रधानमंत्री ने कहा कि दुनिया तेजी से टेक्नोलॉजी आधारित अर्थव्यवस्था की ओर बढ़ रही है। ऐसे में भारत को सिर्फ उपभोक्ता नहीं बल्कि निर्माता बनना होगा।
उन्होंने कहा कि सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स और नई तकनीकों में आत्मनिर्भरता बेहद जरूरी है। उनका मानना है कि यदि भारत घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो आयात कम होगा और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।


कच्चे तेल के आयात पर चिंता
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत पेट्रोल और डीजल की जरूरतों के लिए बड़े स्तर पर विदेशी देशों, खासकर खाड़ी देशों पर निर्भर है। देश हर साल कच्चे तेल के आयात पर भारी विदेशी मुद्रा खर्च करता है। उन्होंने कहा कि यह खर्च कम करने के लिए वैकल्पिक ईंधन और हरित ऊर्जा पर तेजी से काम करना जरूरी है।


एथेनॉल ब्लेंडिंग और ग्रीन हाइड्रोजन को बताया भविष्य
PM मोदी ने कहा कि एथेनॉल ब्लेंडिंग भारत के लिए बड़ा आर्थिक अवसर बन सकता है। उन्होंने बताया कि कृषि अपशिष्ट और गन्ने जैसी फसलों से तैयार एथेनॉल का इस्तेमाल पेट्रोल में मिलाकर किया जा रहा है, जिससे तेल आयात कम हो रहा है।


इसके फायदे बताते हुए उन्होंने कहा कि:
-किसानों की आय बढ़ रही है
-प्रदूषण कम हो रहा है
-विदेशी मुद्रा की बचत हो रही है
-ऊर्जा आत्मनिर्भरता बढ़ रही है
इसके अलावा प्रधानमंत्री ने Green Hydrogen को भविष्य की ऊर्जा बताया और उद्योगों से इसमें निवेश बढ़ाने की अपील की।


क्या होता है Foreign Exchange Reserve?
विदेशी मुद्रा भंडार यानी Foreign Exchange Reserves किसी देश के पास मौजूद विदेशी करेंसी, सोना और अंतरराष्ट्रीय वित्तीय संपत्तियों का संग्रह होता है।
भारत में इसका प्रबंधन Reserve Bank of India यानी RBI करता है।
इसमें मुख्य रूप से शामिल होते हैं:
-विदेशी करेंसी संपत्तियां
-गोल्ड रिजर्व
-SDR (Special Drawing Rights)
-IMF में रिजर्व पोजिशन
यह भंडार देश के लिए इमरजेंसी फंड की तरह काम करता है। इसका इस्तेमाल आयात भुगतान, आर्थिक संकट और मुद्रा स्थिरता बनाए रखने के लिए किया जाता है।


PM मोदी की उद्योगपतियों और निवेशकों से अपील
PM मोदी ने अपने संबोधन में साफ कहा कि आने वाले समय में आर्थिक ताकत ही किसी देश की असली शक्ति होगी। उन्होंने जनता, उद्योगपतियों और निवेशकों से अपील की कि वे ऐसे फैसले लें जो देश को आत्मनिर्भर बनाने में मदद करें। PM मोदी ने कहा कि यदि भारत आयात पर निर्भरता कम करता है और घरेलू उत्पादन बढ़ाता है, तो देश दुनिया की मजबूत अर्थव्यवस्थाओं में और तेजी से आगे बढ़ सकता है।

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