Friday, 23 October 2026
BREAKING
• चार वर्षों से विकास में पिछड़े हिमाचल को डबल इंजन सरकार की ज़रूरत : जयराम ठाकुर • कुलदीप सिंह पठानिया को 12वें ब्रिक्स संसदीय मंच का न्योता • रामपुर बुशहर में स्मार्ट एमएसएमई पर कार्यशाला आयोजित • 79वें वार्षिक निरंकारी संत समागम का भव्य शुभारंभ • किसानों को 24 घंटे में फसल का भुगतान किया जा रहा है: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान • पावर कट के बीच 'संकटमोचक' बनी हरियाणा पुलिस, हड़ताल के बीच बहाल कराई बिजली आपूर्ति • सूरजकुंड दिवाली मेले से स्वदेशी उत्पादों और कारीगरों को मिल रहा नया बाजार : नायब सिंह सैनी • रेलवे के बाद पावर सेक्टर को भी निजी हाथों में सौंप रही भाजपा सरकार - दुष्यंत चौटाला • विस अध्यक्ष ने की जनप्रतिनिधि सम्मेलन की तैयारियों की समीक्षा • बेगमपुरा’ की परिकल्पना भय, भेदभाव और अन्याय से मुक्त समाज का संदेश देती है : राज्यपाल घोष

राष्ट्रीय

प्रधानमंत्री मोदी ने साझा किया संस्कृत सुभाषितम्, श्रेष्ठ आचरण को बताया समाज का दीपक

Updated on Wednesday, May 20, 2026 16:17 PM IST

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आज एक संस्कृत सुभाषितम् साझा करते हुए मानवीय आचरण और कर्तव्यनिष्ठ जीवन के महत्व को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि श्रेष्ठ आचरण एक दीपक की तरह होता है, जो केवल व्यक्ति को ही नहीं बल्कि पूरे समाज को भी आलोकित करता है। इस आदर्श के माध्यम से देशवासी संयम, सामर्थ्य और कर्तव्य परायणता के साथ राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।

श्रेष्ठ आचरण समाज को देता है प्रकाश
प्रधानमंत्री ने कहा कि उत्कृष्ट व्यवहार और नैतिक आचरण समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार करता है। यह केवल व्यक्तिगत जीवन को ही नहीं, बल्कि सामूहिक चेतना को भी दिशा देता है। उनके अनुसार यही मूल्य राष्ट्र निर्माण की मजबूत नींव हैं।

एक्स पर साझा किया संदेश
उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट करते हुए लिखा—“श्रेष्ठ आचरण वह दीपक है, जिससे व्यक्ति के साथ-साथ समाज भी आलोकित होता है। इसी आदर्श को अपनाते हुए हमारे देशवासी आज पूरे संयम, सामर्थ्य और कर्तव्यनिष्ठा से राष्ट्र निर्माण में जुटे हुए हैं।”

संस्कृत सुभाषितम् का अर्थ स्पष्ट किया गया
प्रधानमंत्री द्वारा साझा किए गए सुभाषितम् में कहा गया है—“तस्माच्छास्त्रं प्रमाणं ते कार्याकार्यव्यवस्थितौ। ज्ञात्वा शास्त्रविधानोक्तं कर्म कर्तुमिहार्हसि॥”

इसका भावार्थ है कि क्या उचित है और क्या अनुचित, इसका निर्धारण व्यक्तिगत राय या क्षणिक भावनाओं से नहीं, बल्कि शास्त्रों द्वारा स्थापित सुव्यवस्थित मानकों के आधार पर होना चाहिए।

शास्त्र आधारित आचरण पर जोर
इस संदेश में यह स्पष्ट किया गया कि व्यक्ति को जीवन में निर्णय लेते समय स्थापित सिद्धांतों और अनुशासित मार्ग का पालन करना चाहिए। ऐसा करने से आचरण संतुलित, स्वीकार्य और समाज के लिए उपयोगी बनता है।

Have something to say? Post your comment
भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत देश की ताकत, चिन्मय अमृत महोत्सव में बोले प्रधानमंत्री मोदी

: भारतीय ज्ञान परंपरा और सांस्कृतिक विरासत देश की ताकत, चिन्मय अमृत महोत्सव में बोले प्रधानमंत्री मोदी

मलेरिया वैक्सीन की कीमत में 40 फीसदी की कटौती, 10 लाख और बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच

: मलेरिया वैक्सीन की कीमत में 40 फीसदी की कटौती, 10 लाख और बच्चों को मिलेगा सुरक्षा कवच

पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव का उद्घाटन, कहा- “चिन्मय मिशन सिर्फ एक संस्था नहीं, चिन्मय विचार है”

: पीएम मोदी ने किया चिन्मय अमृत महोत्सव का उद्घाटन, कहा- “चिन्मय मिशन सिर्फ एक संस्था नहीं, चिन्मय विचार है”

यमन के तट के पास भारतीयों को ले जा रही नौका से जुड़ी कथित घटना के ‘तथ्यों’ का पता लगा रहे : भारत

: यमन के तट के पास भारतीयों को ले जा रही नौका से जुड़ी कथित घटना के ‘तथ्यों’ का पता लगा रहे : भारत

एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने दी बधाई

: एशियन पैरा गेम्स में भारतीय खिलाड़ियों का शानदार प्रदर्शन, पीएम मोदी ने दी बधाई

पीयूष गोयल ने यूरोप को दी चेतावनी, कहा- CBAM और स्टील पर 50% ड्यूटी से बढ़ेगा खर्च

: पीयूष गोयल ने यूरोप को दी चेतावनी, कहा- CBAM और स्टील पर 50% ड्यूटी से बढ़ेगा खर्च

80 साल पुरानी जीत से नहीं चलेगा UN: भारत ने सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल

: 80 साल पुरानी जीत से नहीं चलेगा UN: भारत ने सुरक्षा परिषद की विश्वसनीयता पर उठाया सवाल

'सिर्फ प्रोडक्ट ही फेल नहीं, उससे जुड़ी कंपनियां भी फेल', सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर जोरदार तंज

: 'सिर्फ प्रोडक्ट ही फेल नहीं, उससे जुड़ी कंपनियां भी फेल', सुधांशु त्रिवेदी का राहुल गांधी पर जोरदार तंज

स्वतंत्रता का महत्व इसी में है कि मनुष्य भय और पराधीनता से मुक्त हो सके : पीएम मोदी

: स्वतंत्रता का महत्व इसी में है कि मनुष्य भय और पराधीनता से मुक्त हो सके : पीएम मोदी

पीयूष गोयल ने विकसित देशों को 100 अरब डॉलर की क्लाइमेट फाइनेंस प्रतिबद्धता की दिलाई याद, कहा- “इसका एक पैसा भी नहीं मिला”

: पीयूष गोयल ने विकसित देशों को 100 अरब डॉलर की क्लाइमेट फाइनेंस प्रतिबद्धता की दिलाई याद, कहा- “इसका एक पैसा भी नहीं मिला”

X