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जीपीएस पर हमला अर्थव्यवस्था को कर सकता है प्रभावित, अमेरिकी लॉमेकर्स ने दी चेतावनी

Updated on Sunday, June 07, 2026 13:52 PM IST

वॉशिंगटन : अमेरिकी लॉमेकर्स ने इस सप्ताह चेतावनी दी कि यदि ग्लोबल पोजिशनिंग सिस्टम (जीपीएस) पर सफल हमला होता है, तो इससे अमेरिकी अर्थव्यवस्था को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। अमेरिकी प्रतिनिधि सभा (हाउस) की एक समिति में चीन और रूस से बढ़ते खतरों पर चर्चा हुई और जीपीएस के बैकअप के तौर पर इस्तेमाल की जा सकने वाली तकनीकों पर विचार किया गया।

हाउस एनर्जी एंड कॉमर्स सबकमेटी की सुनवाई में दोनों दलों के प्रतिनिधियों ने माना कि जीपीएस आज लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का अहम हिस्सा बन चुका है। साथ ही जीपीएस सिग्नल को जाम करने और गलत दिशा में ले जाने की बढ़ती घटनाएं राष्ट्रीय सुरक्षा, परिवहन, संचार व्यवस्था और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे के लिए खतरा बन रही हैं।

सुनवाई के दौरान सबकमेटी के चेयरमैन रिचर्ड हडसन ने कहा कि जीपीएस अब केवल रास्ता बताने वाले ऐप्स तक सीमित नहीं है, बल्कि संचार, ऊर्जा, वित्तीय लेनदेन और आपातकालीन सेवाओं जैसे कई क्षेत्रों में इसका उपयोग होता है।

उन्होंने कहा, "यदि किसी विरोधी देश द्वारा जीपीएस को जाम या स्पूफ कर दिया जाता है और सिस्टम बड़े स्तर पर विफल हो जाता है, तो इसका हमारी अर्थव्यवस्था पर विनाशकारी असर पड़ सकता है।"

हडसन ने कहा कि रूस और चीन ऐसी क्षमताएं विकसित कर रहे हैं जो सैटेलाइट आधारित सेवाओं के लिए खतरा बन सकती हैं। उन्होंने हाल ही में हुई एक घटना का भी जिक्र किया, जिसमें कथित रूसी जामिंग के कारण एक ब्रिटिश सैन्य विमान का जीपीएस सिग्नल खो गया था।

सबकमेटी की वरिष्ठ सदस्य डोरिस मात्सुई ने कहा कि अमेरिकी नागरिक अक्सर यह नहीं समझ पाते कि वे जीपीएस पर कितने निर्भर हो चुके हैं।

उन्होंने कहा, "जीपीएस आपके इंटरनेट को चलाने, डिजिटल भुगतान को सुचारू रखने और बैंक खातों को धोखाधड़ी से सुरक्षित रखने में मदद करता है। यह 911 पर कॉल करने पर आप तक पहुंचने में आपातकालीन सेवाओं की भी मदद करता है।"

मात्सुई ने चेतावनी दी कि जीपीएस में बड़ी रुकावट आने पर संचार नेटवर्क, विमानन, ऊर्जा क्षेत्र, कृषि और सप्लाई चेन प्रभावित हो सकती है।

हाउस कमेटी के चेयरमैन ब्रेट गुथरी ने कहा कि इसके खतरे विदेशों में पहले से दिखाई दे रहे हैं।

उन्होंने कहा, "हमारे विरोधी संघर्ष वाले इलाकों में जीपीएस को जाम और स्पूफ कर रहे हैं, जिससे हमारे सैनिकों के लिए खतरा बढ़ रहा है। यदि अमेरिका में जीपीएस बाधित होता है, तो इसका अर्थव्यवस्था पर बेहद गंभीर असर पड़ सकता है।"

सुनवाई में विशेषज्ञों ने लॉमेकर्स को बताया कि जीपीएस अभी भी काफी भरोसेमंद है, लेकिन अमेरिका को पोजिशनिंग, नेविगेशन और टाइमिंग सेवाओं के लिए अधिक मजबूत और बहुस्तरीय व्यवस्था विकसित करनी चाहिए।

जीपीएस इनोवेशन अलायंस की कार्यकारी निदेशक लिसा डायर ने जीपीएस को "अमेरिका के सबसे बड़े नवाचारों में से एक" बताया। उन्होंने कहा कि 1995 में शुरू होने के बाद से जीपीएस में कभी भी पूरे सिस्टम स्तर पर कोई बड़ी रुकावट नहीं आई है। वर्तमान में जीपीएस नेटवर्क में 32 सैटेलाइट हैं और इसकी उपलब्धता 99.99 प्रतिशत है।

हालांकि, डायर ने यह भी कहा कि स्थानीय स्तर पर जामिंग और स्पूफिंग की घटनाएं विमानन और समुद्री सेवाओं को प्रभावित कर रही हैं। उन्होंने जीपीएस सिस्टम के आधुनिकीकरण और अवैध हस्तक्षेप के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की।

कई विशेषज्ञों ने ऐसे वैकल्पिक और पूरक सिस्टमों का समर्थन किया, जो जीपीएस सिग्नल बाधित होने पर भी काम कर सकें।

नेशनल एसोसिएशन ऑफ ब्रॉडकास्टर्स के सैम मैथेनी ने ब्रॉडकास्ट पोजिशनिंग सिस्टम के बारे में जानकारी दी। यह सिस्टम मौजूदा प्रसारण टावरों और लाइसेंस प्राप्त स्पेक्ट्रम का उपयोग करता है। उन्होंने कहा कि यह जीपीएस पर अत्यधिक निर्भरता से पैदा होने वाले प्रतिदिन 1 अरब डॉलर से अधिक के आर्थिक और राष्ट्रीय सुरक्षा जोखिम को कम करने के लिए विकसित किया गया है।

नेक्स्टनैव की मुख्य कार्यकारी अधिकारी मरियम सोरोंड ने कहा कि अमेरिका अभी भी कमजोर स्थिति में है क्योंकि उसके पास जीपीएस का कोई जमीनी बैकअप नेटवर्क नहीं है।

उन्होंने कहा, "चीन और रूस ने जीपीएस के लिए जमीन आधारित बैकअप सिस्टम तैयार कर लिए हैं, लेकिन अमेरिका ने ऐसा नहीं किया है।" उन्होंने जीपीएस को "राष्ट्रीय धरोहर" बताते हुए कहा कि यह "एकल विफलता बिंदु" भी है।

सुनवाई में 900 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम बैंड से जुड़े प्रस्तावों पर भी मतभेद सामने आए। उपभोक्ता संगठनों, तकनीकी कंपनियों और उद्योग प्रतिनिधियों ने चेतावनी दी कि इसमें बदलाव से बिजली, सार्वजनिक सुरक्षा, खुदरा कारोबार, परिवहन और कृषि क्षेत्रों में उपयोग होने वाली मौजूदा सेवाएं प्रभावित हो सकती हैं।

लॉमेकर्स ने बार-बार जोर देकर कहा कि किसी भी नए बैकअप सिस्टम का व्यापक परीक्षण होना चाहिए और वह उपभोक्ताओं पर अतिरिक्त बोझ डाले बिना मौजूदा सेवाओं को सुरक्षित बनाए।

जीपीएस को मूल रूप से अमेरिकी सेना ने विकसित किया था और बाद में इसे आम नागरिकों के उपयोग के लिए भी खोल दिया गया। आज इसका उपयोग दुनिया भर में अरबों लोग करते हैं और यह विमानन, दूरसंचार, बैंकिंग, लॉजिस्टिक्स तथा आधुनिक कृषि जैसे क्षेत्रों की रीढ़ बन चुका है।

 

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