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जीवन शैली

टमाटर देसी है या हाइब्रिड? पहचानने के साथ जानें कौन है हेल्थ के लिए बेस्ट

Updated on Sunday, June 21, 2026 12:06 PM IST

इंडियन कुकिंग में टमाटर सबसे जरूरी चीज है। इसके बगैर तो सब्जी, दाल, रसम, बिरियानी, करी, ग्रेवी हर चीज का स्वाद अधूरा सा लगता है। खट्टे-मीठे स्वाद का टमाटर मार्केट में दो तरह का देखने को मिलता है। एक है देसी इंडियन टमाटर तो वहीं दूसरा जो बाहर से आया हाइब्रिड टमाटर जो पूरे मार्केट में छाया रहता है। मार्केट में मिल रहे इतने टमाटरों को देखकर कई बार कंफ्यूजन हो जाता है कि आखिर कौन सा टमाटर लेना ज्यादा सही है। देसी और हाइब्रिड टमाटरों की पहचान कैसे की जाए और कौन हेल्थ के लिए ज्यादा अच्छा है? चलिए जानें....

देसी और हाइब्रिड टमाटर क्या हैं
देसी टमाटर वो हैं जो अपने देश की उपज हैं और ये हमेशा से इसी फार्म में उगते चले आ रहे हैं। इनका टेस्ट और टेक्सचर हमेशा से सेम था। वहीं हाइब्रिड टमाटरों को कई वैराइटी मिलाकर क्रॉस पॉलिनेशन के जरिए पैदा किया जाता है। जिससे इसका टेस्ट और टेक्सचर अच्छा हो। इसकी सेल्फ लाइफ ज्यादा हो और ये जल्दी कीड़ा लगने, बीमारियों से खराब ना हो।

कैसे करें देसी और हाइब्रिड टमाटर की पहचान
वैसे तो देसी और हाइब्रिड टमाटर की पहचान बहुत ही सिंपल है

हाइब्रिड टमाटर दिखने में थोड़े लंबे होते हैं और ये देसी टमाटर के मुकाबले ज्यादा दिन तक खराब नहीं होते हैं। वहीं देसी टमाटर का आकार गोल होता है।
हाइब्रिड टमाटर की महक और टेस्ट देसी के मुकाबले कम होता है। इसका छिलका और अंदर का गूदा भी ज्यादा मोटा होता है। सलाद वगैरह में डालने के लिए ये बेहतर होता है।
वहीं देसी टमाटर का छिलका पतला, गूदा कम और बीज के साथ रस ज्यादा होता है। गोल आकार होने के साथ ही इनकी सेल्फ लाइफ कम होती है और ये जल्दी से गल कर खराब होने लगते हैं। ये थोड़े ज्यादा खट्टे और इनकी महक भी हाइब्रिड के मुकाबले ज्यादा होती है। चटनी, करी, रसम जैसी चीजों में इन देसी टमाटरों का यूज अच्छा माना जाता है।
क्या हाइब्रिड टमाटर हेल्थ के लिए नुकसानदेह है?
हाइब्रिड टमाटरों को बड़े पैमाने पर खेतों में बेचने के लिए ही उगाया जाता है। इसलिए ये फोर्टीफाइड होते हैं और इसमे न्यूट्रिएंट्स की मात्रा भी होती है।
हालांकि माइक्रोन्यूट्रिएंट्स और एंटीऑक्सीडेंट्स हाइब्रिड टमाटरों में कम होता है। लेकिन विटामिन सी, पोटैशियम और फोलेट इन टमाटरों में होता है।
वहीं, लाइकोपिन नाम का एंटीऑक्सीडेंट्स जो कैंसर फाइटिंग प्रॉपर्टीज रखता है वो हाइब्रिड टमाटरों में होता है।
चूंकि हाइब्रिड टमाटरों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है तो इनमे केमिकल फर्टिलाइजर और पेस्टिसाइड का इस्तेमाल भी ज्यादा होता है। जिसकी वजह से ये हार्मफुल होते हैं। लेकिन इन पेस्टिसाइड को छोड़ दिया जाए तो ये हाइब्रिड टमाटर पूरी तरह से सेफ हैं और न्यूट्रिएंट्स से भी भरपूर होते हैं।
देसी टमाटर के फायदे
भले ही हाइब्रिड टमाटर में जरूरी न्यूट्रिएंट्स और लाइकोपिन मौजूद हो लेकिन सेहत के लिहाज से देसी टमाटरों को ज्यादा बेहतर माना जाता है। इनमे एंटीऑक्सीडेंट्स लाइकोपिन जो कि एंटी कैंसर होता है, की मात्रा रिच होती है। वहीं विटामिन ए, सी की मात्रा भी भरपूर है जो स्किन के साथ आंखों के लिए जरूरी है। वहीं देसी टमाटर अक्सर ऑर्गेनिक तरीके से बगैर पेस्टिसाइड डाले उगाए जाते हैं। जिसकी वजह से इनसे होने वाले नुकसान से भी बचत होती है। वहीं ज्यादातर इंडियन खाने का स्वाद इन देसी टमाटरों से ही बदलता है।

 

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