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सत्ता नहीं, बांग्लादेश के व‍िकास, शांत‍ि और लोगों की सुरक्षा के ल‍िए साल के अंत तक वापस लौटूंगी : शेख हसीना

Updated on Thursday, August 06, 2026 11:47 AM IST

नई द‍िल्‍ली : नई दिल्ली में बुधवार को ऑडियो लिंक के जरिए आयोजित एक प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि वह पिछले दो वर्षों से भारत में निर्वासन का जीवन बिता रही हैं और इस साल के अंत तक अपने देश लौटना चाहती हैं क्योंकि वहां के लोगों को सुरक्षा, विकास, समृद्धि और शांति का अधिकार है।

शेख हसीना ने कहा कि वह अपने देश लौटना चाहती हैं, ताकि विकास और प्रगति की राह को फिर से आगे बढ़ाया जा सके। मेरी वापसी की तारीख बाद में बताई जाएगी, लेकिन मैं अपने लोगों के बीच जरूर लौटूंगी।

उन्होंने कहा, "लोग ऐसे देश के हकदार हैं, जो उनकी सुरक्षा करे, ऐसी अर्थव्यवस्था, जो उन्हें अवसर दे, और ऐसा लोकतंत्र, जो उन्हें उनके अधिकार दे। मेरी वापसी सत्ता हासिल करने के लिए नहीं है। इसका मकसद बांग्लादेश को फिर सही दिशा में लाना है। यह देश को विकास, प्रगति, धर्मनिरपेक्षता और स्थिरता के रास्ते पर वापस लाने की कोशिश है। मैं सिर्फ एक उद्देश्य से बांग्लादेश लौटना चाहती हूं, लोगों के साथ खड़े होने और उनकी जिंदगी बेहतर बनाने के लिए। जनता ही सारी ताकत का स्रोत है। मुझे उन पर विश्वास है, मैं उन पर भरोसा करती हूं, मैं उनसे प्यार करती हूं। मैं उनके पास जरूर लौटूंगी।"

अपने संबोधन के दौरान हसीना कई बार भावुक हो गईं। पिछले दो वर्षों की घटनाओं को याद करते हुए उन्होंने कहा कि उन्होंने अपने 'प्यारे बांग्लादेश को तकलीफ झेलते हुए' देखा है। उन्होंने आरोप लगाया कि जुलाई-अगस्त 2024 के छात्र आंदोलन का कुछ संगठित समूहों ने राजनीतिक मकसद के लिए इस्तेमाल किया। यह आंदोलन सुधार की शांतिपूर्ण मांग नहीं था, बल्कि इसे हिंसा का माध्यम बना दिया गया।

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा कि पिछले दो वर्षों में देश की स्थिति और खराब हो गई है। जिस चुनाव को उन्होंने 'धांधली वाला' बताया, उसके बाद बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी सत्ता में आ गई, लेकिन इसके बावजूद लोग आज भी डर, असुरक्षा और आर्थिक कठिनाइयों के माहौल में जी रहे हैं।

उन्होंने कहा, "पिछले दो वर्षों से मैं अपने प्यारे बांग्लादेश को तकलीफ में देख रही हूं। मौजूदा बांग्लादेश वैसा नहीं है, जिसे हमने बनाया था और न ही वह बांग्लादेश है जिसके लिए 1971 में 30 लाख लोगों ने अपनी जान दी थी। मैं जुलाई और अगस्त 2024 की सच्चाई से शुरुआत करना चाहती हूं। यह कोई शांतिपूर्ण छात्र आंदोलन नहीं था। शुरुआत से ही मेरी सरकार ने बातचीत, कानूनी प्रक्रिया और धैर्य के जरिए इस मुद्दे को सुलझाने की कोशिश की। लेकिन सुधार की बातों के पीछे कुछ संगठित समूह छात्रों की मांगों को हिंसक राजनीतिक हथियार में बदलने का काम कर रहे थे।"

हसीना ने कहा कि उनकी सरकार ने प्रदर्शन कर रहे छात्रों से बातचीत और कानूनी तरीकों के जरिए समाधान निकालने की कोशिश की थी। उन्होंने आरोप लगाया कि आरक्षण सुधार आंदोलन को जानबूझकर उनकी इस्तीफे की मांग वाले अभियान में बदल दिया गया।

पूर्व प्रधानमंत्री ने कहा, "मैंने खुद छात्रों से बातचीत की पहल की थी। उन्हें प्रधानमंत्री आवास आने का निमंत्रण दिया था। तीन मंत्रियों ने भी उनके साथ चर्चा की थी। आरक्षण सुधार आंदोलन को एक सूत्रीय मांग, यानी मेरे इस्तीफे की मांग, में बदल दिया गया। योजनाबद्ध तरीके से झूठा प्रचार किया गया। सच्चे छात्रों की भावनाओं का इस्तेमाल किया गया, जबकि संगठित समूहों ने उनके आंदोलन को हिंसा और सत्ता परिवर्तन के लिए एक ढाल की तरह इस्तेमाल किया।"

 

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