चंडीगढ़: विपक्ष के नेता राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज बदले की भावना से प्रेरित एफआईआर के विरोध में पंजाब प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अनुसूचित जाति विभाग द्वारा शुरू किया गया विरोध प्रदर्शन आज लगातार चौथे दिन में प्रवेश कर गया। इस दौरान पंजाब कांग्रेस भवन में पार्टी कार्यकर्ताओं और पार्टी नेताओं का भारी जमावड़ा देखने को मिला। प्रदर्शन के दौरान जोरदार नारेबाजी की गई और बड़ी संख्या में कार्यकर्ता लामबंद हुए। नेताओं और कार्यकर्ताओं ने उत्पीड़न व बदले की राजनीति के खिलाफ अपने कड़े रुख को दोहराया। नेताओं ने साफ शब्दों में कहा कि यह धरना-प्रदर्शन तब तक किसी भी हाल में खत्म नहीं किया जाएगा, जब तक राहुल गांधी के खिलाफ दर्ज झूठा मुकदमा बिना शर्त वापस नहीं लिया जाता और दलित समुदाय का अपमान करने वालों के खिलाफ मिसाली कार्रवाई नहीं की जाती। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि प्रशासन ने तुरंत उचित कार्रवाई नहीं की, तो यह आंदोलन केवल पार्टी कार्यालय तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि सड़कों पर उतरकर पंजाब के हर ब्लॉक और जिले को कवर करते हुए एक विशाल राज्यव्यापी संघर्ष का रूप ले लेगा।
केंद्र की सत्ताधारी पार्टी की तीखी आलोचना करते हुए, प्रदर्शनकारियों ने भाजपा द्वारा सदियों पुराने भेदभाव को फिर से जिंदा करने और हाशिए पर मौजूद वर्गों को दबाने के मकसद से फैलाई जा रही प्रतिगामी, 'संघवाद' और 'मनुस्मृति' वाली मानसिकता की कड़ी निंदा की। नेताओं ने ध्रुवीकरण की राजनीति की आलोचना करते हुए कहा कि जहां भाजपा संकीर्ण चुनावी लाभ के लिए धर्म का इस्तेमाल करती है और जातीय विभाजन पैदा करती है, वहीं कांग्रेस पार्टी हमेशा संवैधानिक धर्मनिरपेक्षता, बराबरी और सामाजिक न्याय के पक्ष में मजबूती से खड़ी रही है। प्रदर्शन के दौरान दलित नेताओं के जन संबोधनों के बाद किए गए कथित 'शुद्धिकरण' जैसे भेदभावपूर्ण कृत्यों पर कड़ा ऐतराज जताया गया और इसे बेहद घिनौना, असंवैधानिक तथा बाबासाहेब डॉ. बी.आर. अंबेडकर के संविधान के मूल सिद्धांतों पर सीधा हमला करार दिया गया। कार्यकर्ताओं ने अपना संकल्प दोहराते हुए ऐलान किया कि प्रशासन का कोई भी दबाव उन्हें संवैधानिक मूल्यों और दबे-कुचले वर्गों के सम्मान की रक्षा के लिए जमीनी स्तर पर लड़ने से नहीं रोक सकता।