चंडीगढ़ :शनिवार को कांग्रेस पार्टी द्वारा नारनौल में ब्लॉक कांग्रेस कमेटी सम्मेलन का आयोजन किया गया जिसमें प्रदेश अध्यक्ष राव नरेंद्र सिंह ने बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की। सम्मेलन की अध्यक्षता जिला अध्यक्ष सत्यवीर झुकिया ने की और इसका आयोजन नारनौल ब्लॉक अध्यक्ष मनपाल यादव द्वारा किया गया । इस अवसर पर राव नरेंद्र सिंह ने दो गंभीर मुद्दों पर राज्य सरकार पर कड़ा हमला बोलते हुए कहा कि नायब सैनी सरकार शिक्षा और खेल दोनों क्षेत्रों में पूरी तरह विफल साबित हो रही है। एक तरफ सरकारी कॉलेजों में हजारों शिक्षण पद खाली पड़े हैं और पढ़ाई अतिथि-एक्सटेंशन लेक्चररों के भरोसे चल रही है, दूसरी तरफ राज्य के मेधावी खिलाड़ियों को उच्च सेवाओं में नियुक्ति का हक दिलाने के लिए बार-बार अदालत का दरवाजा खटखटाना पड़ रहा है।
राव नरेंद्र सिंह ने कहा कि आरटीआई से खुलासा हुआ है कि प्रदेश के सरकारी डिग्री कॉलेजों में 7,986 स्वीकृत शिक्षण पदों में मात्र 3,354 ही नियमित रूप से भरे हैं, जबकि 4,632 पद खाली पड़े हैं। इन रिक्तियों को ढकने के लिए 2,057 अतिथि या एक्सटेंशन व्याख्याता लगाए गए हैं। वर्ष 2024-25 के वास्तविक कार्यभार के अनुसार 8,572 शिक्षकों की जरूरत है। अंग्रेजी में 792, भूगोल में 508, वाणिज्य में 486, गणित और रसायन विज्ञान में 409-409 पद खाली हैं। पर्यावरण विषय के सभी 22 पद रिक्त हैं। एडिड कॉलेजों में भी 2,831 स्वीकृत पदों में 1,394 खाली हैं और 97 प्राचार्य पदों में 56 रिक्त हैं। सोनीपत सहित नए कॉलेजों में तो स्थिति और भी खराब है।
उन्होंने कहा कि सोनीपत निवासी अधिवक्ता अमन दहिया ने इस गंभीर संकट को लेकर पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में जनहित याचिका दायर की है। सीडब्ल्यूपी-पीआईएल-227-2026 पर अगली सुनवाई 6 अक्टूबर को होगी। याचिका में 4,632 रिक्त पद छह महीने में भरने, एडिड कॉलेजों के पदों को तीन महीने में मंजूरी दिलाने, उच्च स्तरीय समिति गठित करने और नए कॉलेज न खोलने की मांग की गई है जब तक मौजूदा कॉलेजों में कम से कम 75 प्रतिशत पद न भर जाएं।
राव नरेंद्र सिंह ने आगे कहा कि यही सरकार खेलों के प्रति भी पूरी तरह विरोधी रवैया अपनाए हुए है। प्रतिभावान खिलाड़ियों को HCS-HPS में नियुक्ति का हक दिलाने के लिए हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ा। खिलाड़ी जीते, सरकार ने अपील की और फिर हारी, ₹50,000 का जुर्माना भी लगा। सरकार ने पुनर्विचार याचिका डाली और फिर हारी। आखिर में जब खिलाड़ी जीत गए तो सरकार ने नीतिगत फैसला ले लिया कि भविष्य में किसी खिलाड़ी को यह लाभ नहीं दिया जाएगा। यह नायब सैनी सरकार का असली खेल-विरोधी चेहरा है।