चंडीगढ़: भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश उपाध्यक्ष परमजीत सिंह कैंथ ने कहा कि गांव ककराला के दो दलित भाइयों के साथ कथित पुलिस अत्याचार का मामला अब भगवंत मान की ‘आम आदमी पार्टी’ सरकार के लिए सिर्फ एक शिकायत नहीं, बल्कि संवैधानिक जवाबदेही का गंभीर मामला बन चुका है। कैंथ ने कहा कि भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा, पंजाब के प्रदेश अध्यक्ष शीतल अंगुराल के प्रभावशाली हस्तक्षेप के कारण पीड़ित परिवार की आवाज़ राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग तक पहुंची।
आयोग द्वारा 4 सितंबर 2026 को मामले का संज्ञान लेना और पंजाब पुलिस से जवाब मांगना सरकार के उन दावों पर सीधा सवाल खड़ा करता है कि पंजाब में कानून-व्यवस्था पूरी तरह नियंत्रण में है। उन्होंने बताया कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संविधान के अनुच्छेद 338 के तहत मामले की जांच/पड़ताल शुरू करते हुए पटियाला एसएसपी से नोटिस मिलने के 15 दिनों के अंदर कार्रवाई रिपोर्ट तलब की है। रिपोर्ट में एफआईआर और धाराएं, गिरफ्तारियां, चार्जशीट/अंतिम रिपोर्ट और पीड़ित को दिए गए मुआवजे सहित पूरा विवरण मांगा गया है।
कैंथ ने तीखा सवाल किया, “यदि ककराला के पीड़ित परिवार की शिकायत बेबुनियाद थी तो राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग ने संवैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल करते हुए जांच क्यों शुरू की? अब सरकार अपनी जवाबदेही से भागेगी या सच्चाई सामने लाएगी?” कैंथ ने कहा, “दलित समाज के साथ हो रहे किसी भी अन्याय पर भाजपा अनुसूचित जाति मोर्चा चुप नहीं बैठेगा। शीतल अंगुराल जी के नेतृत्व में मोर्चा पीड़ितों की आवाज़ हर संवैधानिक और कानूनी मंच तक पहुंचाएगा और भगवंत मान सरकार को जवाबदेह बनाएगा।”