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पंजाब

खरड़ सिविल अस्पताल में चिट्टे के कथित सेवन की स्वतंत्र जांच की मांग

Updated on Thursday, October 15, 2026 20:07 PM IST

खरड़(हिंद जनपथ ब्यूरो) : पंजाब के जिला एसएएस नगर (मोहाली) के खरड़ स्थित सिविल अस्पताल में कथित तौर पर खुलेआम चिट्टे का सेवन किए जाने के मामले में तीन एडवोकेट अभिषेक मल्होत्रा, एपीएस छिब्बर और तेजिंदर सिंह ने पंजाब सरकार से स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है।
एडवोकेट्स ने इस संबंध में 14 अक्टूबर को पंजाब सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग के प्रमुख सचिव और निदेशक को कानूनी प्रतिनिधित्व सौंपा है। इसकी प्रतियां पंजाब के मुख्यमंत्री, स्वास्थ्य मंत्री, पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग, राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग और केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को भी भेजी गई हैं।
एडवोकेट्स ने मांग की है कि मामले में डिप्टी मेडिकल कमिश्नर कमेटी की ओर से अगस्त 2026 में प्रस्तुत जांच रिपोर्ट को रद्द किया जाए। उनका आरोप है कि जांच निष्पक्ष तरीके से नहीं की गई और उपलब्ध साक्ष्यों की उचित जांच किए बिना ही आरोपों को खारिज कर दिया गया।


मई और जून में की गई थी शिकायत
प्रतिनिधित्व के अनुसार, खरड़ सिविल अस्पताल के शौचालयों में कथित तौर पर चिट्टे का सेवन किए जाने के संबंध में मई 2026 के अंतिम सप्ताह में फोटोग्राफ और वीडियो साक्ष्यों के साथ शिकायत की गई थी। 24 मई को ईमेल के माध्यम से शिकायत भेजी गई थी। इसके बाद 22 जून को हुई एक अन्य घटना के संबंध में 25 जून को दोबारा शिकायत की गई।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग ने शिकायत का संज्ञान लेते हुए एक जून 2026 को तत्कालीन सीनियर मेडिकल ऑफिसर डॉ. राजेश कुमार के खिलाफ जांच के आदेश दिए थे। इस मामले को लेकर मीडिया में भी खबरें प्रकाशित हुई थीं। प्रतिनिधित्व में कहा गया है कि डॉ. राजेश कुमार का बाद में तबादला कर दिया गया। सिविल सर्जन, एसएएस नगर के अधीन बोर्ड और डिप्टी मेडिकल कमिश्नर कमेटी ने मामले की जांच की और अपनी रिपोर्ट में आरोपों को साबित नहीं माना।
एडवोकेट्स ने इस रिपोर्ट पर सवाल उठाते हुए आरोप लगाया है कि इसमें शिकायतकर्ताओं के खिलाफ भी प्रत्यारोप लगाए गए। इनमें कथित तौर पर अवैध एमएलआर तैयार करने और डॉ. जसप्रीत सिंह बसोटा के साथ मिलीभगत कर व्यक्तिगत रंजिश के चलते शिकायत करने के आरोप शामिल हैं।


नर्स के बयान और हस्ताक्षरों को लेकर भी उठाए सवाल
एडवोकेट्स ने 23 सितंबर 2026 को अस्पताल की नर्स रजनी के साथ हुई कथित फोन रिकॉर्डिंग का हवाला देते हुए जांच प्रक्रिया पर सवाल उठाए हैं। प्रतिनिधित्व के अनुसार, रिकॉर्डिंग में नर्स ने कथित तौर पर कहा कि उनसे दस्तावेजों की सामग्री पढ़े बिना और उनकी जानकारी के बगैर हस्ताक्षर करवाए गए थे। आरोप है कि यह कार्रवाई डॉ. राहुल भल्ला से जुड़े निर्देशों के तहत की गई।
एडवोकेट्स ने आरोप लगाया है कि शिकायतकर्ताओं को बदनाम करने और कथित तौर पर झूठे साक्ष्य तैयार करने की साजिश के तहत ऐसा किया गया। उन्होंने डॉ. राहुल भल्ला, संबंधित नर्सों और अन्य अधिकारियों की भूमिका की स्वतंत्र जांच कराने की मांग की है। हालांकि, ये आरोप हैं और इनकी स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है।


15 दिन में स्वतंत्र जांच कराने की मांग
एडवोकेट्स ने मांग की है कि पंजाब स्वास्थ्य विभाग से बाहर के किसी वरिष्ठ अधिकारी, संयुक्त सचिव या विशेष सचिव स्तर अथवा उससे ऊपर के अधिकारी की निगरानी में स्वतंत्र जांच कराई जाए। जांच में अस्पताल के शौचालयों, बाथरूम और अन्य संवेदनशील स्थानों का भौतिक निरीक्षण करने के साथ सीसीटीवी फुटेज की भी जांच की जाए। उन्होंने यह जांच 15 दिन के भीतर पूरी करने की मांग की है।
प्रतिनिधित्व में डॉ. राहुल भल्ला और कथित साजिश में शामिल अन्य अधिकारियों व नर्सों को तत्काल निलंबित करने तथा उनके खिलाफ गंभीर दंडात्मक विभागीय कार्रवाई शुरू करने की मांग भी की गई है। इसके अलावा, भारतीय न्याय संहिता, 2023 की धारा 61 (आपराधिक साजिश), धारा 356 (मानहानि), धारा 227 (झूठी जानकारी अथवा झूठे साक्ष्य से संबंधित प्रावधान) और अन्य लागू प्रावधानों के साथ एनडीपीएस एक्ट के संबंधित प्रावधानों के तहत एफआईआर दर्ज करने की मांग की गई है।

एडवोकेट्स ने मामले की जांच स्थानीय क्षेत्राधिकार से बाहर की किसी स्वतंत्र एजेंसी को सौंपने की मांग भी उठाई है। अस्पतालों की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांगः एडवोकेट्स ने अस्पताल के संवेदनशील क्षेत्रों में 24 घंटे सीसीटीवी निगरानी, समर्पित सुरक्षा कर्मचारियों की तैनाती, स्वतंत्र टीमों से औचक निरीक्षण और नशीले पदार्थों से जुड़ी घटनाओं की रिपोर्टिंग के लिए स्पष्ट मानक संचालन प्रक्रिया (एसओपी) लागू करने की मांग की है। इसके साथ ही अस्पताल की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर हर महीने सार्वजनिक रिपोर्ट जारी करने का सुझाव भी दिया गया है।

प्रतिनिधित्व में संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत जीवन और स्वास्थ्य के अधिकार तथा अनुच्छेद 47 में निहित सार्वजनिक स्वास्थ्य संबंधी दायित्वों का हवाला दिया गया है। एडवोकेट्स ने पंजाब सरकार के नशा विरोधी अभियान 'युद्ध नशियां विरुद्ध' का उल्लेख करते हुए कहा है कि सरकारी अस्पतालों में मरीजों को सुरक्षित वातावरण मिलना चाहिए।
उन्होंने पंजाब राज्य मानवाधिकार आयोग और राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग से भी मामले में हस्तक्षेप करने और जिम्मेदार अधिकारियों की जवाबदेही तय करने के लिए उचित सिफारिशें करने की मांग की है। एडवोकेट्स ने चेतावनी दी है कि यदि उचित कार्रवाई नहीं की गई तो वे पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं। उन्होंने मामले में स्वतंत्र जांच और आवश्यक कार्रवाई के निर्देश देने के लिए अदालत में याचिका दायर करने की बात कही है।

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