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पंजाब

पंजाब से नशे का खात्मा करना सरकार का सबसे बड़ा लक्ष्य: मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान

Updated on Friday, October 16, 2026 20:28 PM IST

फिल्लौर : पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने आज जोर देकर कहा कि नशे का खात्मा करना राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उन्होंने घोषणा की कि पंजाब पुलिस को बिना किसी राजनीतिक हस्तक्षेप के नशा तस्करों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने की पूरी स्वतंत्रता दी गई है। फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस अकादमी में ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा करते हुए उन्होंने नशे के खिलाफ कार्रवाई को और तेज करने के लिए डीएसपी को 117 नए वाहन उपलब्ध कराने की घोषणा की और इस लड़ाई को जन आंदोलन बनाने का आह्वान किया।

केंद्र सरकार पर तीखा हमला करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जब दिल्ली, उत्तर प्रदेश और हरियाणा में नशा खुलेआम बिक रहा है, तो पंजाब को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और पंजाबियों को बदनाम किया जा रहा है। उन्होंने केंद्र सरकार से अपील की कि वह पंजाब को बदनाम करने के बजाय अंतरराष्ट्रीय सीमा और गुजरात के रास्ते नशे की आमद को रोके। इसके साथ ही उन्होंने दोहराया कि मानसा में एक सामाजिक कार्यकर्ता की हत्या के लिए जिम्मेदार लोगों को भी कड़ी सजा दी जाएगी।

 ‘एक्स’ पर पोस्ट करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने लिखा, “आज फिल्लौर स्थित पंजाब पुलिस अकादमी में ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान की समीक्षा बैठक में हिस्सा लिया और वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ महत्वपूर्ण विचार-विमर्श किया। नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पुलिस की जिम्मेदारी नहीं है। इसे जन आंदोलन बनाना होगा। हमने पुलिस को बिना किसी सिफारिश या हस्तक्षेप के अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने की पूरी स्वतंत्रता दी है। पुलिस विभाग को और मजबूत करने के लिए आज डीएसपी (उप पुलिस अधीक्षक) के लिए 117 नए वाहनों को मंजूरी दी है। हम गुरुओं और पीरों की पवित्र धरती को नशे के कलंक से कभी दागदार नहीं होने देंगे। आइए, महाराजा रणजीत सिंह द्वारा स्थापित न्याय के सिद्धांतों पर आधारित ‘रंगला पंजाब’ बनाने के लिए एकजुट हों। इंकलाब जिंदाबाद।”

जनसभा को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ‘युद्ध नशों  विरुद्ध’ अभियान अब जन आंदोलन का रूप ले चुका है, जिसका उद्देश्य राज्य और आने वाली पीढ़ियों के भविष्य को सुरक्षित करना है। उन्होंने कहा, “नशा केवल कानून-व्यवस्था की चुनौती नहीं है, बल्कि एक गंभीर सामाजिक अभिशाप है, जो हजारों युवा पंजाबियों के सपनों, आकांक्षाओं और जीवन के लिए खतरा बना हुआ है। सरकार नशे के पूरे नेटवर्क को ध्वस्त करने और पंजाब की शान बहाल करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मिशन को स्थायी सफलता तभी मिल सकती है, जब प्रत्येक नागरिक इस सामूहिक संघर्ष में सक्रिय भागीदार बनेगा। उन्होंने कहा, “‘युद्ध नशों विरुद्ध’ की लड़ाई पुलिस अकेले नहीं जीत सकती। इसे जन आंदोलन बनाना होगा, जिसमें हर परिवार, हर गांव, हर मोहल्ला और प्रत्येक जिम्मेदार नागरिक इस सामाजिक अभिशाप के खिलाफ एकजुट होकर खड़ा हो। पंजाब का भविष्य दांव पर लगा है और हम चुपचाप तमाशा देखते नहीं रह सकते।”

मुख्यमंत्री ने पुष्टि की कि पंजाब सरकार ने नशे की समस्या के आपूर्ति और मांग, दोनों पहलुओं से सख्ती से निपटने के लिए व्यापक रणनीति अपनाई है। उन्होंने कहा, “नशा तस्करों के खिलाफ लगातार की जा रही कार्रवाई से आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ने में मदद मिली है। सरकार उन लोगों के खिलाफ सख्त कार्रवाई जारी रखेगी, जो पंजाब के युवाओं को नशे की ओर धकेल रहे हैं।”

उन्होंने स्पष्ट किया, “नशे की लत से पीड़ित लोगों को केवल अपराधी नहीं समझना चाहिए, बल्कि उन्हें पीड़ित के रूप में देखना चाहिए, जिन्हें देखभाल, सहानुभूति, उपचार और अपने जीवन को दोबारा पटरी पर लाने के लिए एक अवसर की आवश्यकता है।”

मुख्यमंत्री ने चेतावनी दी कि युवाओं की नसों में नशा भरकर मुनाफा कमाने वालों को बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने कहा, “नशे की लत में फंसे लोगों को सामान्य जीवन में वापस लाने के लिए हमारे सहयोग की जरूरत है, जबकि अपने स्वार्थ के लिए समाज में जहर घोलने वालों को कानून का सामना करना पड़ेगा। राज्य सरकार नशा तस्करों को आम पंजाबियों के घर उजाड़ने और जवाबदेही से बचने नहीं देगी।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार नशा तस्करी के लिए जिम्मेदार नेटवर्क को तोड़ने और यह सुनिश्चित करने के लिए दृढ़ संकल्पित है कि इस कार्रवाई का लाभ प्रत्येक गांव और शहर तक पहुंचे। उन्होंने लोगों से अपील की कि वे बिना किसी डर के अधिकारियों के साथ जानकारी साझा करें और कानून लागू करने वाली एजेंसियों का सहयोग करें।

नशे के खिलाफ लड़ाई में खेलों की भूमिका को रेखांकित करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि युवाओं की ऊर्जा को सकारात्मक दिशा में लगाने के लिए खेल सबसे प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा, “एक स्वस्थ खेल संस्कृति युवाओं में अनुशासन, टीम भावना और दृढ़ संकल्प विकसित करती है। साथ ही, उन्हें नशे के विकल्प के रूप में सकारात्मक रास्ता प्रदान करती है। खेल का मैदान नशे के अड्डे के खिलाफ सबसे मजबूत ढाल बन सकता है, क्योंकि खेल का मैदान हमारे युवाओं को एक लक्ष्य, एक टीम और एक सपना देता है।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि हमारी सरकार चाहती है कि युवा नशे का शिकार होने के बजाय हाथों में खेल किट, गले में पदक और दिलों में गर्व लेकर आगे बढ़ें। उन्होंने कहा, “हमारी सरकार जमीनी स्तर पर खेल बुनियादी ढांचे और अवसरों को बढ़ावा दे रही है, ताकि गांवों, कस्बों और शहरों में प्रतिभाओं को निखरने का अवसर मिले। इसका उद्देश्य केवल राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं के लिए चैंपियन तैयार करना नहीं है, बल्कि एक स्वस्थ, अधिक आत्मविश्वासी और नशामुक्त पीढ़ी का निर्माण करना भी है।”

‘खेडां वतन पंजाब दियां’ पहल का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि यह खेल महोत्सव लोगों को जोड़ने के एक सशक्त मंच के रूप में उभरा है। उन्होंने कहा, “इन खेलों में तीन पीढ़ियां एक साथ भाग ले रही हैं, जो बच्चों, युवाओं और वरिष्ठ नागरिकों में खेलों के प्रति बढ़ते उत्साह को दर्शाता है। ऐसी पहल पंजाब की पारंपरिक खेल भावना को पुनर्जीवित करने में मदद कर रही हैं। साथ ही, सामाजिक संबंधों को मजबूत करने तथा स्वास्थ्य और अनुशासन की संस्कृति को बढ़ावा दे रही हैं।”

मुख्यमंत्री ने परिवारों से अपील की कि वे अपने बच्चों को खेलों में भाग लेने के लिए प्रोत्साहित करें। उन्होंने सामुदायिक संगठनों, शैक्षणिक संस्थानों और गांव स्तर की संस्थाओं से भी खेल मैदानों को सकारात्मक गतिविधियों के जीवंत केंद्र बनाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “जब दादा-दादी, माता-पिता और बच्चे मिलकर खेलों में हिस्सा लेते हैं, तो वे केवल खेल नहीं खेल रहे होते, बल्कि एक स्वस्थ समाज का निर्माण कर रहे होते हैं और उन संबंधों को मजबूत कर रहे होते हैं, जो हमारे समुदायों को एकजुट रखते हैं। यही वह पंजाब है, जिसे हम बनाना चाहते हैं—एक ऐसा पंजाब, जहां युवाओं की पहचान उनकी प्रतिभा, मेहनत और उपलब्धियों से हो।”

आगामी एशियाई हॉकी चैंपियंस ट्रॉफी, जो 27 अक्टूबर से 5 नवंबर तक आयोजित होनी है, में पूरे राज्य के खेल प्रेमियों और नागरिकों को उत्साहपूर्वक भाग लेने का निमंत्रण देते हुए मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि बड़े खेल आयोजनों की मेजबानी करना पंजाब की समृद्ध खेल विरासत का उत्सव मनाने और अगली पीढ़ी को प्रेरित करने का अवसर है।

मुख्यमंत्री ने लोगों से बड़ी संख्या में आगे आकर प्रतियोगिता में भाग लेने वाली टीमों का उत्साह बढ़ाने की अपील की। उन्होंने कहा कि पंजाब हमेशा से साहस, दृढ़ता और खेलों में सफलता का प्रतीक रहा है। उन्होंने कहा, “भारतीय हॉकी और अन्य खेलों में पंजाब का योगदान बहुत बड़ा रहा है। सरकार खेलों के क्षेत्र में पंजाब को अग्रणी स्थान पर दोबारा स्थापित करने के लिए प्रतिबद्ध है। पंजाब की पहचान बनाने में खेलों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और सरकार उभरते खिलाड़ियों को अपनी प्रतिभा दिखाने के अवसर प्रदान करती रहेगी।”

मुख्यमंत्री ने विश्वास व्यक्त किया कि पंजाब की खेल भावना समुदायों के लोगों को एकजुट करने और नशे को हराने के सामूहिक संकल्प को मजबूत करने में मदद करेगी।

पंजाब पुलिस की शानदार भूमिका की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि पुलिस बल ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों में अपनी उपलब्धियों के माध्यम से इतिहास रचा है और नशे के खिलाफ इस लड़ाई में एक बार फिर अपनी क्षमता साबित करेगा। उन्होंने कहा, “पंजाब पुलिस ने अतीत में कई अवसरों पर अपनी काबिलियत का प्रमाण दिया है। मुझे पूरा विश्वास है कि अधिकारी और जवान राज्य में सक्रिय नशा नेटवर्कों को ध्वस्त करके एक और यादगार अध्याय लिखेंगे।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि पंजाब सरकार की लड़ाई उन लोगों के खिलाफ है, जिन्हें लोगों की जान की परवाह नहीं है और जो युवाओं के भविष्य को कमजोर कर रहे हैं। उन्होंने पुलिस कर्मचारियों और अन्य अधिकारियों से अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी, निष्पक्षता और बिना किसी भय या पक्षपात के करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा, “सरकार उन अधिकारियों के साथ मजबूती से खड़ी है, जिन्होंने पेशेवर तरीके से काम किया, कानून का पालन किया और जनहित में कार्य किया।”

मानसा की घटना का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि इस मामले से सख्ती से निपटा जाएगा और दोषी पाए जाने वालों को कानून के अनुसार उदाहरणात्मक सजा दी जाएगी। उन्होंने जोर देकर कहा कि घटना से जुड़े प्रत्येक पहलू की गहन जांच की जाएगी और यदि जांच में साजिश साबित होती है, तो उसका पर्दाफाश किया जाएगा। उन्होंने पुष्टि की, “गलत काम में शामिल किसी भी व्यक्ति को जवाबदेही से बचने नहीं दिया जाएगा। इस घटना के हर पहलू की गहराई से जांच की जाएगी और जांच के दौरान सामने आने वाली किसी भी साजिश का पर्दाफाश किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा कि ऐसी घटनाओं से समाज के कल्याण के लिए समर्पित भाव से काम करने वाले लोगों के इरादों को कमजोर नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने आगे कहा, “कानून अपना काम करेगा और न्याय सुनिश्चित किया जाएगा। घटना के लिए जिम्मेदार लोगों को बख्शा नहीं जाएगा और इसके पीछे की सच्चाई सामने लाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा।”

मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान ने कहा, “अधिकारियों को अपने कर्तव्यों का निर्वहन ईमानदारी और निडरता से करना चाहिए। सरकार प्रत्येक लोक सेवक से ईमानदारी, जवाबदेही और समर्पण की अपेक्षा करती है।”

मुख्यमंत्री ने स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में पंजाब की उपलब्धियों को भी रेखांकित किया। उन्होंने दावा किया कि निरंतर सुधारों और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा पर नए सिरे से ध्यान केंद्रित करके राज्य अग्रणी बनकर उभर रहा है। उन्होंने कहा, “शिक्षा में निवेश पंजाब के भविष्य में निवेश है। इसके माध्यम से आम परिवारों के बच्चों को जीवन में ऊंचे मुकाम हासिल करने के योग्य बनाया जा रहा है।”

उन्होंने कहा कि सरकार शैक्षणिक संस्थानों को मजबूत करने, परिणामों में सुधार लाने और यह सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है कि विद्यार्थियों को उनकी सामाजिक या आर्थिक पृष्ठभूमि की परवाह किए बिना आगे बढ़ने के समान अवसर मिलें।

मुख्यमंत्री ने आगे कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, खेलों के अवसर और नशे के खिलाफ निरंतर अभियान का समन्वय युवाओं का जीवन बदल सकता है। उन्होंने कहा, “पंजाब का भविष्य अपने युवाओं को शिक्षा, रोजगार के अवसरों, खेल सुविधाओं और नशामुक्त वातावरण से सशक्त बनाने पर निर्भर करता है।”

मुख्यमंत्री ने नागरिकों से राजनीतिक और व्यक्तिगत मतभेदों से ऊपर उठकर इस साझा उद्देश्य के लिए एकजुट होने का आह्वान किया। उन्होंने जोर देकर कहा, “हमारी सरकार का मिशन किसी भी व्यक्ति, पार्टी या सरकार से बड़ा है। इसमें अपने बच्चों को बचाना, अपने परिवारों की रक्षा करना और पंजाब के भविष्य को सुरक्षित करना शामिल है। हम मिलकर नशे के अभिशाप को हराएंगे, खेल प्रतिभाओं को निखारेंगे और एक ऐसा राज्य बनाएंगे, जहां हर युवा बिना किसी डर के सपने देख सके और पूरे गर्व के साथ उन्हें साकार कर सके।”

मुख्यमंत्री ने कहा कि यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि केंद्र सरकार पंजाब द्वारा नशे के खिलाफ लड़ी जा रही लड़ाई पर सवाल उठा रही है, जबकि राज्य पूरे देश के लिए यह संघर्ष कर रहा है। उन्होंने कहा, “अंतरराष्ट्रीय सीमा से सटा 50 किलोमीटर का क्षेत्र सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के अधिकार क्षेत्र में आता है। इसके बावजूद पंजाब अपने युवाओं और आने वाली पीढ़ियों की रक्षा के लिए नशे के अभिशाप के खिलाफ अटूट प्रतिबद्धता के साथ लगातार लड़ रहा है।”

उन्होंने कहा कि नशे के खिलाफ लड़ाई केवल पंजाब की लड़ाई नहीं है, बल्कि यह एक राष्ट्रीय संघर्ष है, जिसके लिए सामूहिक जिम्मेदारी, समन्वय और निर्णायक कार्रवाई की आवश्यकता है।

इस अवसर पर कैबिनेट मंत्री अमन अरोड़ा, हरपाल सिंह चीमा, डॉ. बलबीर सिंह और तरुनप्रीत सिंह सौंद , पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) गौरव यादव सहित अन्य अधिकारी उपस्थित थे।

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