Friday, 23 October 2026
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हरियाणा

हरियाणा में बिजली कर्मियों की हड़ताल का दूसरा दिन : 15 जिलों में छाया अंधेरा, 118 सब-स्टेशन और 510 से ज्यादा फीडर ठप

Updated on Friday, October 23, 2026 19:48 PM IST

मंत्री अनिल विज बोले—हड़ताल पूरी तरह बेवजह पंचकूला/चंडीगढ़। गुरुग्राम और नूंह में निजी कंपनी को बिजली आपूर्ति का लाइसेंस दिए जाने के विरोध में हरियाणा के बिजली कर्मचारियों की राज्यव्यापी हड़ताल शुक्रवार को दूसरे दिन में प्रवेश कर गई है। हड़ताल के पहले दिन ही प्रदेश के 15 जिलों में जनजीवन बुरी तरह पटरी से उतर गया। पावर कट और पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों का सब्र जवाब दे गया, जिसके बाद गुरुग्राम, फरीदाबाद, जगाधरी और सिरसा में देर रात सड़कों पर उतरकर नागरिकों ने जाम लगा दिया और जमकर हंगामा किया। फरीदाबाद के सारण चौक और सेक्टर-64 पावर हाउस पर भारी भीड़ जमा हो गई, वहीं जगाधरी के चूना भट्ठी चौक पर यातायात पूरी तरह बाधित रहा। हरियाणा पावर इंजीनियर्स एसोसिएशन के महासचिव रविंद्र घणघस ने दावा किया कि हड़ताल के पहले ही दिन 33 केवी के 118 सब-स्टेशनों और 11 केवी के 510 से अधिक फीडरों में ब्रेकडाउन रहा।
भिवानी में 280 फीडर बंद, 28 घंटे बाद भी बहाल नहीं हुई सप्लाई
हड़ताल का सबसे व्यापक और गंभीर असर पश्चिमी और उत्तरी हरियाणा के जिलों में देखा गया:
भिवानी बना सबसे बड़ा केंद्र: अकेले भिवानी जिले में सर्वाधिक 280 फीडर ठप रहे। भिवानी, करनाल, यमुनानगर और अंबाला के कई शहरी व ग्रामीण इलाकों में 28 घंटे बीत जाने के बाद भी आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी।
लंबा ब्लैकआउट: फतेहाबाद, टोहाना, कैथल, बहल, सांपला, महम, लाखनमाजरा, हिसार के डाबड़ा और नूंह-झज्जर में बुधवार रात 10 बजे से गुरुवार देर रात तक लगातार बिजली गुल रही।
उद्योग और सेवाएं प्रभावित: ब्लैकआउट के चलते बैंकों, बीमा दफ्तरों और सूक्ष्म व मध्यम औद्योगिक इकाइयों में कामकाज ठप हो गया। रिहायशी इलाकों में पानी की मोटरें न चलने से पेयजल का गहरा संकट खड़ा हो गया और लोगों को महंगे दामों पर जनरेटर किराए पर लेने पड़े।
तोड़फोड़ की शिकायतें: कई जगह केबलों में कीलें ठोककर जानबूझकर लाइन फॉल्ट किए जाने की खबरें भी सामने आईं।
बैकफुट पर प्रशासन: सरकार के चारों वैकल्पिक प्रयोग साबित हुए नाकारा
हड़ताल से निपटने के लिए सरकार द्वारा ठेकेदारों के जरिए तैनात किए गए करीब 1000 वैकल्पिक कर्मचारी नाकाफी साबित हुए। संकट से निपटने के प्रशासनिक दांव भी नाकाम रहे:
पटवारी और ग्राम सचिव का फॉर्मूला फेल: फील्ड में बिजली व्यवस्था संभालने के लिए पटवारियों और ग्राम सचिवों की ड्यूटी लगाई गई थी, लेकिन जटिल तकनीकी जानकारी के अभाव में यह प्रशासनिक प्रयोग पूरी तरह औंधे मुंह गिरा।
सुरक्षा मिली, समाधान नहीं: सब-स्टेशनों और पावर हाउसों पर पुलिस बल तैनात कर तोड़फोड़ तो रोक ली गई, लेकिन नियमित तकनीकी फॉल्ट और लाइनों के ब्रेकडाउन को दुरुस्त करने का कोई तकनीकी समाधान निगम नहीं निकाल सका।
आईटीआई छात्रों की तैनाती से नहीं बनी बात: अंबाला सहित कई जिलों में आईटीआई छात्रों को फॉल्ट ढूंढने और मरम्मत के लिए उतारने के आदेश जारी हुए, परंतु व्यावहारिक और फील्ड अनुभव न होने के कारण वे भी फॉल्ट ट्रेस नहीं कर पाए।
पड़ोसी राज्यों से मदद की उम्मीदें खत्म: हरियाणा सरकार संकट के समाधान के लिए पड़ोसी राज्यों से तकनीकी स्टाफ बुलाने पर विचार कर रही थी, लेकिन उत्तर प्रदेश के बिजली कर्मचारी संगठनों ने अपनी सरकार को दो टूक कह दिया कि उनका कोई भी कर्मचारी हरियाणा में हड़ताल तोड़ने के लिए ड्यूटी पर नहीं जाएगा।
'हड़ताल बेवजह, फैसला सरकार का नहीं विनियामक आयोग का': अनिल विज
बढ़ते संकट के बीच हरियाणा के ऊर्जा मंत्री अनिल विज ने बिजली कर्मियों के इस कदम को पूरी तरह गैर-जरूरी और अनुचित करार दिया। मंत्री अनिल विज ने कड़े शब्दों में कहा:
आयोग का स्वायत्त निर्णय: यह हड़ताल पूरी तरह बेवजह की जा रही है। निजीकरण का फैसला सरकार ने नहीं लिया है, बल्कि यह विद्युत विनियामक आयोग (HERC) का निर्णय है।
कानूनी लड़ाई का रास्ता: उन्होंने कहा कि जो लोग यह दुष्प्रचार कर रहे हैं कि सरकार ने पहले निजीकरण किया और अब खुद अपील में जा रही है, वे नासमझ हैं। यदि किसी को कानूनी स्थिति समझ नहीं आ रही है तो उसे संबंधित एक्ट का अध्ययन करना चाहिए।
अपील में जाएगी सरकार: इस मामले में विनियामक आयोग के फैसले के खिलाफ केवल कोर्ट और कानूनी मंचों पर ही लड़ाई लड़ी जा सकती है, हड़ताल से जनता को परेशान करना किसी भी समस्या का समाधान नहीं है।

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