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ईरान पर सख्त हुआ यूएनएससी, खाड़ी देशों पर हमलों की निंदा वाला प्रस्ताव पास

Updated on Thursday, March 12, 2026 13:27 PM IST

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) ने खाड़ी देशों पर ईरान के हमलों के खिलाफ प्रस्ताव को पारित कर दिया। इसके बाद तेहरान ने सुरक्षा परिषद के खुलेआम दुरुपयोग की निंदा की। ईरान के खिलाफ ये प्रस्ताव बहरीन की ओर से रखा गया, जिसमें खाड़ी देशों पर ईरान के हालिया मिसाइल और ड्रोन हमलों की निंदा की गई।

इससे पहले बहरीन के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा था था कि खाड़ी सहयोग परिषद (GCC) के सदस्य देशों ने सामूहिक रूप से ईरान की ओर से दागी गई 954 से अधिक मिसाइलों, 2,500 ड्रोन और 17 विमानों को इंटरसेप्ट किया है। जमाल फारिस अलरोवैई ने कहा था कि तेहरान की निंदा के लिए सुरक्षा परिषद में प्रस्ताव लाया जाएगा।

उन्होंने कहा कि छह सदस्यीय जीसीसी देशों पर हुए ये हमले व्यापार और समुद्री मार्गों को बाधित कर रहे हैं, जिससे क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय अर्थव्यवस्था प्रभावित हो रही है और इसका असर सभी पर पड़ रहा है। ईरानी ने ये हमले आवासीय इमारतों, खाद्य वितरण केंद्रों, हवाई अड्डों, बंदरगाहों, ऊर्जा प्रतिष्ठानों और अन्य महत्वपूर्ण नागरिक ढांचे को निशाना बनाकर किए।

संयुक्त अरब अमीरात के संयुक्त राष्ट्र में स्थायी प्रतिनिधि मोहम्मद अबूशहाब ने कहा कि यूएई ने स्पष्ट कर दिया था कि उसकी जमीन, हवाई क्षेत्र और क्षेत्रीय जल का उपयोग ईरान पर हमले के लिए नहीं किया जाएगा। इसके बावजूद तेहरान ने उनके देश को निशाना बनाया। यूएई ने अपने रक्षा संसाधनों का उपयोग कर इन हमलों का सामना किया और यदि ये क्षमताएं न होतीं तो भारी नुकसान और जान-माल की क्षति हो सकती थी। उन्होंने बताया कि 25 देशों के नागरिक ईरानी हमलों से प्रभावित हुए हैं।

प्रस्ताव में बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात और जॉर्डन पर ईरान के हमलों की निंदा की गई इसमें इस बात पर जोर दिया गया है कि ऐसे कृत्य अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन और अंतरराष्ट्रीय शांति और सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा हैं। बहरीन ने ईरान द्वारा इन देशों के खिलाफ किए जा रहे सभी हमलों को तुरंत बंद करने की मांग की। साथ ही संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 के तहत मान्यता प्राप्त व्यक्तिगत और सामूहिक आत्मरक्षा के अधिकार पर जोर दिया।

इस प्रस्ताव में होर्मुज जलडमरूमध्य और उसके आसपास के क्षेत्रों सहित नागरिकों, महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे और वाणिज्यिक जहाजों को जानबूझकर निशाना बनाने की कड़ी आलोचना की गई है।

बहरीन के इस प्रस्ताव को सुरक्षा परिषद ने 13 वोटों से पारित कर लिया गया, जबकि चीन और रूस ने मतदान में हिस्सा नहीं लिया। पाकिस्तान ने इस प्रस्ताव के पक्ष में मतदान करते हुए कहा कि वह इन हमलों से अछूता नहीं है। सुरक्षा परिषद ने ईरान के साथ संवाद को सुगम बनाने और विवादों को शांतिपूर्ण ढंग से हल करने के उद्देश्य से जीसीसी देशों और अन्य क्षेत्रीय पक्षों के मध्यस्थता प्रयासों को भी स्वीकार किया।

साथ ही आगे तनाव बढ़ने से रोकने की आवश्यकता पर जोर दिया। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने मध्य पूर्व में स्थिरता और शांति को बढ़ावा देने की अपनी प्रतिबद्धता की पुष्टि की। साथ ही खाड़ी राज्यों और जॉर्डन की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राजनीतिक स्वतंत्रता के लिए अपने समर्थन को दोहराया।

इससे पहले रूस ने मध्य पूर्व में सैन्य तनाव बढ़ने पर एक मसौदा प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें सभी पक्षों से अपनी सैन्य गतिविधियों को तुरंत रोकने और आगे तनाव बढ़ाने से बचने का आग्रह किया गया था, लेकिन अमेरिका ने इसे वीटो कर दिया।

रूस के इस प्रस्ताव के पक्ष में रूस, चीन, सोमालिया और पाकिस्तान के चार मत प्राप्त हुए, जबकि संयुक्त राज्य अमेरिका और लातविया ने इसके विरुद्ध मतदान किया। वहीं, यूनाइटेड किंगडम, फ्रांस, बहरीन, कोलंबिया, डेमोक्रेटिक रिपब्लिक ऑफ कांगो, डेनमार्क, ग्रीस, लाइबेरिया और पनामा सहित नौ सदस्यों ने मतदान से परहेज किया।

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