Saturday, 17 October 2026
BREAKING
• जवाहर नवोदय विद्यालय में कक्षा 9वीं व 11वीं में प्रवेश के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 22 अक्टूबर तक बढ़ी • बांग्लादेश मॉडल का महिमामंडन करने वालों पर राहुल गांधी चुप क्यों, कांग्रेस देश को दे जवाब : डॉ. सीमा ठाकुर • सारी योजनाएं बंद करके, गारंटियां भूल नए जिले बनाने का शिगूफा छोड़ रहे हैं मुख्यमंत्री : जयराम ठाकुर • जागरूकता कार्यक्रम में एमएसएमई की उत्पादकता बढ़ाने को सरकारी योजनाओं की दी जानकारी • पलमपुर में अखिल भारतीय वरिष्ठ नागरिक महासंघ प्रतिनिधिमंडल ने शांता कुमार जी से की मुलाकात • कांग्रेस चाहती है कि देश में अराजकता फैल जाए, देश की तरक्की रूक जाए : अनिल विज • पलवल में 3 हजार रुपये रिश्वत लेते पटवारी का निजी सहायक गिरफ्तार, हल्का पटवारी फरार • हरियाणा ने स्वीडिश कंपनियों के साथ 4,000 करोड़ रुपए के आशय पत्रों पर हस्ताक्षर किए • पंजाब: अवैध माइनिंग पर सियासत तेज, पूर्व सीएम चन्नी ने मान सरकार को बताया माइनिंग माफिया • सीएम भगवंत मान के फ्रांस दौरे को हाई कोर्ट की अनुमति, केंद्र की राजनीतिक मंजूरी न मिलने पर मिली राहत

लेख

साइबर सुरक्षा: डिजिटल युग में सतर्कता ही सबसे बड़ी सुरक्षा

Updated on Sunday, June 28, 2026 19:25 PM IST

आज का समय डिजिटल क्रांति का युग है। मोबाइल फोन, इंटरनेट और सोशल मीडिया ने हमारे जीवन को पहले की अपेक्षा अधिक सरल, तेज और सुविधाजनक बना दिया है। बैंकिंग से लेकर शिक्षा, स्वास्थ्य, खरीदारी और सरकारी सेवाओं तक लगभग हर कार्य ऑनलाइन माध्यम से होने लगा है। लेकिन डिजिटल सुविधाओं के साथ-साथ साइबर अपराधों में भी तेजी से वृद्धि हुई है। ऐसे में साइबर सुरक्षा केवल तकनीकी विशेषज्ञों का विषय नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी बन गई है।


साइबर सुरक्षा का अर्थ है इंटरनेट और डिजिटल माध्यमों का सुरक्षित उपयोग करना तथा अपनी व्यक्तिगत जानकारी, बैंकिंग विवरण और डिजिटल पहचान को साइबर अपराधियों से सुरक्षित रखना। वर्तमान समय में साइबर अपराधी नए-नए तरीके अपनाकर लोगों को ठगी का शिकार बना रहे हैं। फर्जी कॉल, फिशिंग ईमेल, नकली वेबसाइट, सोशल मीडिया हैकिंग, ओटीपी धोखाधड़ी और ऑनलाइन निवेश के नाम पर ठगी जैसी घटनाएँ लगातार बढ़ रही हैं। इन अपराधों का शिकार केवल आम नागरिक ही नहीं, बल्कि विद्यार्थी, शिक्षक, व्यापारी और सरकारी संस्थान भी हो रहे हैं।


आज अधिकांश लोग ऑनलाइन बैंकिंग और यूपीआई भुगतान का उपयोग करते हैं। सुविधा के साथ यह जिम्मेदारी भी आती है कि हम अपने बैंक खाते और डिजिटल लेन-देन की सुरक्षा का पूरा ध्यान रखें। किसी भी व्यक्ति के साथ अपना ओटीपी, एटीएम पिन, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए। यदि कोई व्यक्ति स्वयं को बैंक अधिकारी या सरकारी कर्मचारी बताकर गोपनीय जानकारी माँगे, तो उसकी सत्यता की पुष्टि किए बिना कोई जानकारी साझा नहीं करनी चाहिए।


विद्यार्थियों और युवाओं के लिए साइबर सुरक्षा का महत्व और भी अधिक है क्योंकि वे इंटरनेट और सोशल मीडिया का सबसे अधिक उपयोग करते हैं। कई बार आकर्षक ऑफर, फर्जी छात्रवृत्ति, नौकरी के विज्ञापन या गेमिंग लिंक के माध्यम से साइबर अपराधी युवाओं को अपना निशाना बनाते हैं। इसलिए किसी भी अनजान लिंक पर क्लिक करने से पहले उसकी विश्वसनीयता अवश्य जाँचनी चाहिए। केवल आधिकारिक वेबसाइटों और विश्वसनीय मोबाइल एप्लिकेशन का ही उपयोग करना चाहिए।


सोशल मीडिया का उपयोग करते समय भी सावधानी आवश्यक है। अपनी निजी जानकारी, यात्रा की जानकारी, घर का पता, बैंक संबंधी दस्तावेज़ या पहचान पत्र जैसी संवेदनशील जानकारी सार्वजनिक रूप से साझा नहीं करनी चाहिए। मजबूत पासवर्ड का उपयोग करना, समय-समय पर पासवर्ड बदलना तथा दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (Two-Factor Authentication) को सक्रिय रखना डिजिटल सुरक्षा के महत्वपूर्ण उपाय हैं।


शिक्षण संस्थानों की भूमिका भी साइबर सुरक्षा के प्रति जागरूकता बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण है। विद्यालयों और विश्वविद्यालयों में समय-समय पर साइबर सुरक्षा से संबंधित कार्यशालाएँ, विशेषज्ञ व्याख्यान और जागरूकता अभियान आयोजित किए जाने चाहिए। विद्यार्थियों को केवल तकनीक का उपयोग करना ही नहीं, बल्कि उसका सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग करना भी सिखाया जाना चाहिए।


सरकार द्वारा भी साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए अनेक प्रयास किए जा रहे हैं। विभिन्न जागरूकता अभियानों, हेल्पलाइन सेवाओं और डिजिटल सुरक्षा कार्यक्रमों के माध्यम से नागरिकों को सतर्क रहने के लिए प्रेरित किया जा रहा है। फिर भी सबसे प्रभावी सुरक्षा जागरूक नागरिक ही हैं। यदि प्रत्येक व्यक्ति डिजिटल दुनिया में सतर्कता, जिम्मेदारी और सावधानी के साथ व्यवहार करे, तो साइबर अपराधों की संख्या में उल्लेखनीय कमी लाई जा सकती है।


डिजिटल तकनीक हमारे विकास का आधार है, लेकिन उसका सुरक्षित उपयोग ही उसकी वास्तविक शक्ति है। इसलिए हमें स्वयं भी साइबर सुरक्षा के नियमों का पालन करना चाहिए और अपने परिवार, विद्यार्थियों तथा समाज को भी इसके प्रति जागरूक करना चाहिए। याद रखें, साइबर सुरक्षा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि डिजिटल जीवन की अनिवार्य आवश्यकता है।

लेखिका:- परुल सूद
सहायक प्राध्यापक
कंप्यूटर साइंस एंड इंजियरिंग विभाग
चंडीगढ़ यूनिवर्सिटी, मोहाली

Have something to say? Post your comment
इंजीनियर्स डे : राष्ट्र निर्माण से तकनीकी आत्मनिर्भरता तक भारत की नई उड़ान

: इंजीनियर्स डे : राष्ट्र निर्माण से तकनीकी आत्मनिर्भरता तक भारत की नई उड़ान

संवाद से परिणाम तक: आसियान-भारत कृषि सहयोग के तीन दशकों को किसानों की समृद्धि में बदलना

एम. एल. जाट और नवीन पी. सिंह : संवाद से परिणाम तक: आसियान-भारत कृषि सहयोग के तीन दशकों को किसानों की समृद्धि में बदलना

विकास के आंकड़ों की जांच-परख

डॉ. सौरभ गर्ग और डॉ. वी. अनंत नागेश्वरन : विकास के आंकड़ों की जांच-परख

पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम : युवाओं की मेहनत, पारदर्शिता और विश्वास की सुरक्षा का सशक्त कानूनी आधार

: पब्लिक एग्जामिनेशंस (प्रिवेंशन ऑफ अनफेयर मीन्स) अधिनियम : युवाओं की मेहनत, पारदर्शिता और विश्वास की सुरक्षा का सशक्त कानूनी आधार

स्टीम से हाइड्रोजन तक भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से चलेगी विकसित हरियाणा - विकसित भारत

: स्टीम से हाइड्रोजन तक भारत की पहली हाइड्रोजन ट्रेन जींद से चलेगी विकसित हरियाणा - विकसित भारत

विकसित भारत, विकसित हरियाणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हरियाणा बना आधुनिक रेल क्रांति का अग्रदूत

: विकसित भारत, विकसित हरियाणा प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में हरियाणा बना आधुनिक रेल क्रांति का अग्रदूत

आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती, स्वदेशी युद्धपोतों से सशक्त हो रहा भारतीय नौसेना बेड़ा

: आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती, स्वदेशी युद्धपोतों से सशक्त हो रहा भारतीय नौसेना बेड़ा

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर राम बिलास शर्मा का श्रद्धांजलि संदेश

: डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर राम बिलास शर्मा का श्रद्धांजलि संदेश

राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के महान पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

: राष्ट्र की एकता, अखंडता और गौरव के महान पुरोधा डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी

सेवा, सुशासन और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय

: सेवा, सुशासन और संकल्प का स्वर्णिम अध्याय

X