युग पुरुष भारत की राजनीति को नई दिशा देने वाले डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की आज जन्म जयंती है। मैं पाठकगण से प्रार्थना सहित निवेदन करना चाहता हूँ कि मैं न तो कोई लेखक हूँ, न विद्वान हूँ। मैं एक छोटी सी ढ़ाणी में जन्म लेकर पूज्यनीय डॉ. केशवराव बलिराम हडेगवार विश्वविद्यालय का छात्र होने के नाते संघ में प्रचारक के नाते, कुछ समय काम करने के नाते और भारतीय जनता पार्टी का सामान्य कार्यकर्ता हूँ। मेरे भावुक मन ने मुझे कहा है कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जिसने भारत की राजनीति को एक नई दिशा दी। उनकी जन्म जंयती पर हमें अपने भाई-बहनों से अपने विचार साझा करने चाहऐं।
इसलिए मैं आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के संबंध में कुछ शब्द लिखने का साहस कर रहा हूँ। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का जन्म 6 जुलाई, 1901 कोलकता में श्री आशुतोष जी के घर में हुआ। श्री आशुतोष जी एक प्रतिभावान व्यक्ति थे। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने सन् 1923 में लॉ की उपाधि अर्जित करने के पश्चायत वे विदेश चले गये और 1926 में इंग्लेण्ड से बैरिस्टर बनकर स्वदेश लौटे। 33 बर्ष की अल्पायु में वे कलकता विश्वविद्यालय के कुलपति बने ।
डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी 12 दिसम्बर 1941 से 20 नवम्बर 1942 तक बंगाल विधान परिषद् के सांसद भी रहे और प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरु जी के मंत्रीमण्डल में उद्योग मंत्री रहे। उस समय श्रीमान शेख अबदुला वजीरेआला कहलाते थे। जम्मू कश्मीर जाने के लिए प्रमीट लेना पड़ता था। डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी जी ने संसद में घोषण किया कि एक देश में दो प्रधान एक देश में विधान और एक देश दो निशान नही चलेगें नहीं चलेगें और मैं मंत्री पद पर से इस्तीफा दे रहा हूँ और अपने देश के हिस्से में कश्मीर जा रहा हूँ । हम सब जानते है कि उनको कठवा में गिरफतार किया गया और पुरे देश में आंदोलन हुआ। डॉ. मुखर्जी की रिहाई की मांग हुई और 23 जून 1953 का कठवा जेल से उनकी लाश मिली। वो इस घटना से पहले जनसंघ की स्थापना कर चुके थे। इनकी रहस्यमय मृत्यु के बारे में अब तक खुलासा नही हुआ। इसके बाद पंडित दिनदयाल उपाध्याय जनसंघ के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पद कालीकट में चुने गए। उनका भाषण इतना सारग्रर्वित था। पंडित दिनदयाल उपाध्याय आर्थिक स्थिति में कमजोर परिवार से थे। उनकी आर्थिक नीति को एकात्म मानवतावद कहा गया, अंत का उद्द्य सबसे पहले ओर ये योजना अंत्योदय योजना कहलाई । परंतु दरुभाग्य से भारत ने सत्य सनातन के विरोध कि भारत राष्ट्र के विरोधी एक विचारधारा अंतराराष्ट्रीय स्तर चलती आए ह।
पंडित दिनदयाल उपाध्याय जी की लाश मुगल सराय रेलवे स्टेशन खम्में के पास तीन टुकड़ो में पड़ी मिली। जो सत्य सनातन की बात करेगा, जो राष्ट्रवाद की बात करेगा उसकी कुर्बानी होगी आर उसका खुलासा तक भी नही हो सकेगा। आज मैं दुरुभाग्य के साथ कह रहा हूँ कि पंडित दिनदयाल उपाध्याय जी मृत्यु का खुलासा आज तक नही हुआ ।
डॉ मुखर्जी जिस दल की स्थापना करके गऐ थे शुरु से न वो एक बिरादरी का था, न ही एक परिवार का था और उसके बाद पंडित दिनदयाल उपाध्यादय के बाद श्रीमान मौलि चंद्र शर्मा जो हरियाणा के झज्झर जिलें के रहने वाले थे, वो अध्यक्ष रहे थें।
श्रीमान प्रेमनाथ जी डोगरा जो जम्मू कश्मीर के रहने वाले थे, वो अध्यक्ष के पद पर रहे थे। अनेक लोगों ने इस कड़ी को
आगे बढ़ाया। श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी, श्रीमान लाल कृष्ण जी अडवानी और मेरा सौभाग्य है कि भारतीय जनता पार्टी की स्थापना मुम्बई में हुई। श्रीमान अटल बिहारी वाजपेयी भारतीय जनता पार्टी के पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष वहाँ चुने गऐ वहाँ बंदा समुद्र की लहरे यह ब्यान कर रही है।
माननीय श्री अटल बिहारी वाजपेयी जी न कहा है कि छटेगा, सुरज निकलेगा कमल खिलेगा" अंधेरा चीफ जस्टिस रहे श्री मोहम्मद छागला जी इसमें गेस्ट स्पीकर के नाते आऐ उनके शब्द आज भी मेरे कानों में गुज रहे है कि I May live or not but you people will see that finest person of indian politics.
श्री अटल बिहारी वाजपेयी will be the Prime Minister of India मैं जिंदा रहूं या न रहूँ परंतु भारत की राजनीति के सबसे लोकप्रिय नेता गुणवान व्यक्ति श्री अटल विहारी वाजपेयी एक दिन देश के प्रधानमंत्री बनेगें ।
13 दिन की सरकार के बाद एक वोट से उनकी सरकार गिर रही थी उससे पहले प्रधानमंत्री हाउस में एक बैठक हुई जिस समय उस समय के राष्ट्रीय अध्यक्ष श्रीमान कुशाभाव ठाकरे, श्रीमान लाल कृष्ण जी आडवानी, श्रीमान कृष्ण लाल जी शर्मा और श्री प्रमोद महाजन सौभाग्य से इस बैठक में मैं (राम बिलास शर्मा) उपस्थित था । श्रीमान प्रमोद महाजन ने कहा की मेरे कार्यालय में छः सांसद बैठे है तो अटल जी कहने लगे वो क्या चाहते है तो अटल जी के चेहरे के भाव देखकर कहा कि वो अपनी कीमत चाहते है। मैं (वाजपेयो जी) एक काठ की कुर्सी के
लिए भारत जैसे बडे देश के प्रजातंत्र को नीलाम कर दु और ये कहते हुऐ अटल जी अंदर चले गए और अगले दिन एक वोट की कमी रह गई और अटल की वो एतिहासिक भाषण सरकार आऐगी, जाऐगी पार्टियां टुटेगी, बिखरेगी पर ये भारत माता रहनी चाहऐ ये देश रहना चाहऐ मैं देश का प्रधानमंत्री हूँ कुछ देर के बाद मैं नही रहूँगा।
श्रीमान चंद्रशेखर उनको गुरुदेव कहते थे आप तो अच्छे है और आपकी पार्टी है आप समझौता कर ले तो श्रीमान वाजपेयी जी ने कहा देश को बेचकर के प्रधानमंत्री की कुर्सी को बेचकर के ऐसी सता को मैं चिम्टी से भी नही छुउंगा और राष्ट्रपति भवन जा कर के अपना इस्तीफा दे दिया ।
आज डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी ने पहले भारत सरकार को त्याग पत्र देकर कुर्बानी दी। भारतीय जनता पार्टी का इतिहास कुर्बानियों और बलिदानियों का इतिहास है, राष्ट्रवाद का इतिहास है। इसके बाद एक साधारण परिवार का बेटा, एक हिरा बा का बेटा, एक चाय बनाने वाले का बेटा। वडनगर का रेलवे स्टेशन मैंने देखा है, वो बड़ का पेड मैंने देखा है और 20 बाई 20 का तिरपाल उस बड़ के पेड पर लगाकर के चाय बनाते थे उनक पुज्य पिता दामोदर दास जी और एन.सी.सी. की निकर पहन के श्रीमान नरेन्द्र भाई मोदी जो आज दुनिया में सबसे लोकप्रिय राजनेता और भारत के बहादुर प्रधानमंत्री है वो चाय बेचते थे। श्री नरेन्द्र भाई मोदी गुजरात के मुख्यमंत्री रहे। श्रीमति सोनिया गाँधी और डॉ. मनमोहन जी वडोदा में एक किनारे में सभा कर रहे थे और दूसरी ओर श्रीमान नरेन्द्र मोदी जी हमारी सभा को संबोधित कर रहे थे श्रीमति सोनिया गाँधी ने कहा कि नरेन्द्र भाई मौत का सौदागर है और इनकी सी.बी.आई. से जाँच करवाये और गोदरा कांड का आरोप लगाऐं।
श्री नरेन्द्र भाई मोदी चुने हुऐ गुजरात में 188 सीटों में 127 सीटों के विधायक के नेता श्री नरेन्द्र भाई मोदी को सी.बी.आई. ने पुछताछ के लिए छः घण्टे खडा रखा। मैं ये इस लिए नही कह रहा कि मैं भारतीय जनता पार्टी का कार्यकर्ता हूँ मैं नरेन्द्र भाई मोदी के साथ काम किया हैं वो हमारे नेता है। मैं केवल ये बात इसलिए नही कह रहा हूँ लायक संतान जो होती हैं अपने पुर्वाजों का श्राद्वा निकालती है। उनकी अंतिम इच्छा को पुरा करती है।
कल डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की जयंती पर ये बात नही कही जाऐ तो ये वाणी का पाप होगा और जेड सुरक्षा जिसको उपलब्ध है सारी सुरक्षा को छोड़कर के एक पानी की बोतल को लकर के छः घण्टे खडे करके सी.बी.आई. ने जांच की, पुछताछ की, आज कुछ भी थोडी सी बात भी हो जाती है। एंजेसी अपना काम करती है और गाली नरेन्द्र भाई मोदी को मिलकर के देते है। श्री नरेन्द्र भाई मोदी ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी को श्रद्वाांजली देते हुऐ कश्मीर से धारा 370 को समाप्त किया । आदरणीय बहन सुषमा स्वराज पूर्व में विदेश मंत्री रही उनका 6 अगस्त को निधन हो गया और 5 अगस्त को बोली मैं इस दिन का इंतजार कर रही थी। भाई और बहनों मैं कुछ शब्द लिखने की हिमाकत की हैं डॉ श्याम प्रसाद मुखर्जी को श्रद्वाांजली देते हुऐ आज देश की राजनीति में गोंगात्री से लेकर गंगा सागर तक डॉ. मुखर्जी ने जो पौधा गया था वो सनातन की विरासत को जो चाहे वो सोमनाथ का मंदिर हो, चाहे वो काशी का घाट हो चाहे वो राम जी का मंदिर हो 500 साल के सनातन के लोगों का हमें कारसेवा में जाने का सौभाग्य मिला। बुलंद शहर की जेल में रहने को सौभाग्य मिला। जिन लोगों ने कारसेवकों के उपर गोली चलावाई वो लोग आज राम मंदिर की चोरी को राजनैतिक मुद्दा बनाते
हैं। जिन लोगों ने सुप्रीम कोर्ट में एफिडेवेट दे रखा है कि राम का कोई अस्तित्व नही है। राम सेतु के बारे में कांग्रेस के लोगों ने कपिल सिबल साहब ने एफिडेवेट दे रखा है कि राम कल्पना है और मुद्दा बनाते है। भारत का समाज इस बात को अच्छी तरह से पहचानता है। श्रीमान योगीआदित्य नाथ ने कहा है कि एक-एक पाई हिसाब और सब परिकिया चल रही है। आज हमारा नेता, आज हम सब लोग मिलकर के डॉ. श्याम प्रसाद मुखर्जी को नमन करते है, उनकी जन्म जयती पर उनको प्रणाम करते है।
ओम शांति शांति शांति ।
राम बिलास शर्मा पाँच बार विधायक, महेन्द्रगढ़ विधानसभा तीन बार कैबिनेट मंत्री, हरियाणा सरकार दो बार प्रदेश अध्यक्ष भाजपा, हरियाणा संघ प्रचारक