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आत्मनिर्भर भारत को नई मजबूती, स्वदेशी युद्धपोतों से सशक्त हो रहा भारतीय नौसेना बेड़ा

Updated on Monday, July 13, 2026 13:22 PM IST

भारतीय नौसेना अपनी समुद्री सुरक्षा क्षमता को लगातार मजबूत कर रही है। इसी दिशा में स्वदेशी रूप से विकसित नीलगिरि, संध्यायक और अर्नाला श्रेणी के युद्धपोत भारत की समुद्री सुरक्षा व्यवस्था की तीन महत्वपूर्ण कड़ियों के रूप में उभरकर सामने आए हैं। हाल ही में आईएनएस दुनागिरि, आईएनएस संशोधक, आईएनएस अग्रय और आईएनएस महेंद्रगिरि के नौसेना में शामिल होने से देश की समुद्री रक्षा क्षमता को नई मजबूती मिली है।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार ये सभी युद्धपोत उच्च स्वदेशी तकनीक से तैयार किए गए हैं और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान को गति देने के साथ-साथ रक्षा विनिर्माण क्षेत्र को भी मजबूती प्रदान कर रहे हैं। इनका उद्देश्य समुद्री सुरक्षा बढ़ाने, ब्लू इकोनॉमी को समर्थन देने तथा हिंद महासागर क्षेत्र में भारत की रणनीतिक उपस्थिति को मजबूत करना है।

भारत की लगभग 11,098 किलोमीटर लंबी तटरेखा, करीब 24 लाख वर्ग किलोमीटर के विशेष आर्थिक क्षेत्र (EEZ) तथा समुद्री मार्गों से होने वाले लगभग 90 प्रतिशत व्यापार की सुरक्षा भारतीय नौसेना की प्रमुख जिम्मेदारी है। इसी आवश्यकता को ध्यान में रखते हुए बहुस्तरीय नौसैनिक क्षमता विकसित की जा रही है।

नीलगिरि श्रेणी के स्टील्थ फ्रिगेट आधुनिक युद्ध के लिए तैयार किए गए हैं। इन युद्धपोतों में रडार, थर्मल और ध्वनि संकेतों को कम करने वाली स्टील्थ तकनीक का उपयोग किया गया है, जिससे दुश्मन के लिए इन्हें पहचानना कठिन हो जाता है। ये युद्धपोत सतह, वायु और पनडुब्बी विरोधी अभियानों को अंजाम देने में सक्षम हैं।

संध्यायक श्रेणी के सर्वे जहाज समुद्र की तलहटी का सर्वेक्षण, नौवहन चार्ट तैयार करने तथा समुद्री संसाधनों के वैज्ञानिक उपयोग में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ये जहाज मानवीय सहायता, आपदा राहत और खोज एवं बचाव अभियानों में भी उपयोगी हैं।

वहीं अर्नाला श्रेणी के एंटी-सबमरीन वॉरफेयर शैलो वॉटर क्राफ्ट तटीय क्षेत्रों में दुश्मन की पनडुब्बियों का पता लगाने और उन्हें निष्क्रिय करने के लिए विशेष रूप से तैयार किए गए हैं। ये छोटे लेकिन अत्याधुनिक पोत उथले समुद्री क्षेत्रों में प्रभावी ढंग से संचालन कर सकते हैं।

रक्षा मंत्रालय के अनुसार इन स्वदेशी युद्धपोतों का महत्व केवल सैन्य क्षमता तक सीमित नहीं है। इनके निर्माण से भारतीय शिपयार्ड, एमएसएमई और रक्षा उद्योग को बढ़ावा मिला है तथा हजारों प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार भी सृजित हुए हैं। साथ ही भारत की रक्षा निर्यात क्षमता और ‘सागर’ तथा ‘महासागर’ जैसी समुद्री रणनीतियों को भी मजबूती मिली है।

मंत्रालय का कहना है कि इन स्वदेशी युद्धपोतों के माध्यम से भारत न केवल अपनी समुद्री सीमाओं की सुरक्षा को और मजबूत कर रहा है, बल्कि हिंद महासागर क्षेत्र में एक जिम्मेदार और विश्वसनीय समुद्री शक्ति के रूप में अपनी भूमिका भी सुदृढ़ कर रहा है।

 

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