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लेख

नारी शक्ति वंदन अधिनियमः सशक्त भारत की ओर एक ऐतिहासिक कदम

Updated on Wednesday, April 15, 2026 16:48 PM IST

भारत में महिलाओं की भूमिका सदियों से महत्वपूर्ण रही है, लेकिन सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक क्षेत्रों में उन्हें बराबरी का स्थान दिलाने के लिए निरंतर प्रयास किए जाते रहे हैं। इसी दिशा में नारी शक्ति वंदन अधिनियम एक ऐतिहासिक और दूरदर्शी पहल के रूप में सामने आया है। यह अधिनियम न केवल महिलाओं को राजनीतिक प्रतिनिधित्व प्रदान करता है, बल्कि उन्हें निर्णय लेने की प्रक्रिया में सक्रिय भागीदारी का अवसर भी देता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के कुशल नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम का मुख्य उद्देश्य महिलाओं को राजनीति में अधिक भागीदारी सुनिश्चित करना है। इसके तहत लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान किया गया है।

यह अधिनियम भारत के लोकतांत्रिक ढांचे को और अधिक समावेशी बनाता है, जहां महिलाओं की आवाज को समान महत्व मिलता है। इससे महिलाओं को नीति निर्माण और प्रशासनिक निर्णयों में भाग लेने का अवसर मिलेगा। यह अधिनियम महिलाओं को केवल प्रतिनिधित्व नहीं देता, बल्कि उन्हें नेतृत्व की भूमिका निभाने के लिए प्रेरित करता है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी ने कई मंचों पर यह स्पष्ट किया है कि "नारी शक्ति" भारत की प्रगति का आधार है। उनका मानना है कि जब महिलाएं सशक्त होंगी, तभी देश तेजी से विकास करेगा। उनके नेतृत्व में सरकार ने महिलाओं को "लाभार्थी" से "निर्माता बनाने की दिशा में काम किया है। यानी महिलाएं अब केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली नहीं, बल्कि देश के विकास में सक्रिय भागीदार बन रही हैं।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण को प्राथमिकता देते हुए अनेक योजनाएं और नीतियां लागू की हैं, जिनका उद्देश्य महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बनाना है। 'बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ योजना का उद्देश्य बालिका जन्म दर में सुधार करना और लड़कियों की शिक्षा को बढ़ावा देना है। इससे समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक सोच विकसित हुई है। हर घर-हर गृहिणी योजना के तहत गरीब महिलाओं को मुफ्त गैस कनेक्शन दिए गए, जिससे उन्हें धुएं से मुक्ति मिली और उनके स्वास्थ्य में सुधार हुआ। जन-धन योजना के माध्यम से महिलाओं के बैंक खाते खोले गए, जिससे वे आर्थिक रूप से सशक्त बनीं और वित्तीय समावेशन को बढ़ावा मिला।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत गर्भवती महिलाओं को आर्थिक सहायता प्रदान कर उनके स्वास्थ्य और पोषण का ध्यान रखा गया है। सुकन्या समृद्धि योजना बालिकाओं के भविष्य को सुरक्षित करने के लिए शुरू की गई, जिसमें उनकी शिक्षा और विवाह के लिए बचत की जाती है। मोदी सरकार ने स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय निर्माण ने महिलाओं की गरिमा और सुरक्षा को बढ़ाया है। महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देकर उन्हें स्वरोजगार के अवसर प्रदान किए गए। डिजिटल इंडिया अभियान के तहत महिलाओं को डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़ा गया, जिससे वे ऑनलाइन सेवाओं का लाभ उठा सकें।

राजनीति में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी नारी शक्ति वंदन अधिनियम के लागू होने से महिलाओं की राजनीतिक भागीदारी में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा। संसद और विधानसभाओं में महिलाओं की संख्या बढ़ेगी और महिला नेताओं को नए अवसर मिलेंगे। नीति निर्माण में महिलाओं का दृष्टिकोण शामिल होगा। मोदी सरकार का यह कदम भारतीय लोकतंत्र को और अधिक मजबूत बनाएगा। यह अधिनियम केवल राजनीतिक सुधार नहीं है, बल्कि सामाजिक परिवर्तन का माध्यम भी है। महिलाओं के प्रति समाज की सोच बदलेगी तथा लड़कियों को आगे बढने की प्रेरणा मिलेगी। यह महिलाओं को समान अधिकार और अवसर प्रदान करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल है।


इस अधिनियम के लागू होने का सबसे बड़ा लाभ यह होगा कि शासन की प्राथमिकताओं में व्यापक बदलाव देखने को मिलेगा। जब निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी बढ़ती है, तो शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, सुरक्षा, जल और स्वच्छता जैसे विषय अधिक प्राथमिकता के साथ सामने आते हैं। स्थानीय निकायों में महिलाओं के आरक्षण का अनुभव पहले ही यह दर्शा चुका है कि महिला प्रतिनिधित्व से नीतियां अधिक जन-केंद्रित और प्रभावी बनती हैं। अब यही प्रभाव संसद और विधानसभाओं के स्तर पर दिखाई देगा, जिससे विकास की दिशा अधिक संतुलित और समावेशी होगी।

इस परिवर्तन की पृष्ठभूमि पिछले एक दशक में तैयार की गई है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं के सशक्तिकरण को एक व्यापक और जीवन-चक्र आधारित दृष्टिकोण से देखा गया है। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ अभियान ने सामाजिक सोच में सकारात्मक बदलाव लाया है और लड़कियों की माध्यमिक स्तर की नामांकन दर 80.2 प्रतिशत तक पहुंची है। सुकन्या समृद्धि योजना के तहत 4.6 करोड़ से अधिक खाते खोले गए हैं, जो बेटियों के भविष्य को आर्थिक सुरक्षा प्रदान करते हैं। उच्च शिक्षा और तकनीकी क्षेत्रों में महिलाओं की भागीदारी में लगातार वृद्धि इस बदलाव की स्पष्ट तस्वीर प्रस्तुत करती है।

प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी और उनकी सरकार ने महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए जो कदम उठाए हैं, वे देश के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं। आज की महिला केवल घर तक सीमित नहीं है, बल्कि हर क्षेत्र में अपनी पहचान बना रही है। नारी शक्ति वंदन अधिनियम इसी बदलाव को और गति देगा और भारत को एक सशक्त, समावेशी और प्रगतिशील राष्ट्र बनाने में अहम भूमिका निभाएगा।

"जब नारी सशक्त होगी, तभी राष्ट्र सशक्त होगा" यही इस अधिनियम का मूल संदेश है।


लेखिका - सुमन सैनी
उपाध्यक्ष, हरियाणा राज्य बाल कल्याण परिषद् ।

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