विशेष संवाददाता :
आज के दौर में लोग केवल पेट भरने के लिए भोजन नहीं, बल्कि स्वस्थ और सुरक्षित भोजन की तलाश कर रहे हैं। बढ़ते रासायनिक उपयोग, मिलावटी खाद्य पदार्थों और गंभीर बीमारियों के खतरे ने लोगों का ध्यान ऑर्गेनिक उत्पादों और ऑर्गेनिक खेती की ओर तेजी से बढ़ाया है। यही कारण है कि देश ही नहीं, पूरी दुनिया में जैविक खेती एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है।
ऑर्गेनिक खेती वह पद्धति है जिसमें रासायनिक खाद, जहरीले कीटनाशक और कृत्रिम रसायनों का उपयोग किए बिना प्राकृतिक तरीकों से खेती की जाती है। इसमें गोबर की खाद, कम्पोस्ट, वर्मी कम्पोस्ट, जैविक उर्वरक और प्राकृतिक कीट नियंत्रण तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह खेती केवल उत्पादन का तरीका नहीं, बल्कि प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की जीवनशैली है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार रासायनिक खेती में उपयोग होने वाले कीटनाशकों और रसायनों का असर धीरे-धीरे मानव शरीर पर पड़ता है। कई शोधों में यह सामने आया है कि अत्यधिक रासायनिक अवशेष शरीर में गंभीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। वहीं ऑर्गेनिक फल, सब्जियां और अनाज अपेक्षाकृत अधिक सुरक्षित और पौष्टिक माने जाते हैं। इनमें पोषक तत्वों और एंटीऑक्सीडेंट की मात्रा बेहतर पाई गई है।
पर्यावरण संरक्षण के लिहाज से भी ऑर्गेनिक खेती को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है। लगातार रासायनिक खादों के उपयोग से मिट्टी की उर्वरता कम होती जा रही है और भूमि की प्राकृतिक क्षमता प्रभावित हो रही है। इसके अलावा रसायनों का असर भूजल और नदियों तक पहुंच रहा है। दूसरी ओर जैविक खेती मिट्टी की गुणवत्ता को बनाए रखने के साथ-साथ जल संरक्षण और जैव विविधता को भी बढ़ावा देती है।
कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले समय में टिकाऊ खेती के लिए ऑर्गेनिक मॉडल सबसे प्रभावी साबित हो सकता है। रासायनिक खेती में जहां किसानों की लागत लगातार बढ़ती जा रही है, वहीं जैविक खेती में स्थानीय संसाधनों के उपयोग से खर्च कम किया जा सकता है। हालांकि शुरुआती दौर में उत्पादन थोड़ा कम हो सकता है, लेकिन लंबे समय में मिट्टी की सेहत बेहतर होने से उत्पादन की गुणवत्ता और स्थिरता बढ़ती है।
देश और विदेश में ऑर्गेनिक उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। शहरी क्षेत्रों में लोग अब स्वास्थ्य के प्रति अधिक जागरूक हो रहे हैं और शुद्ध खाद्य पदार्थों के लिए अधिक कीमत चुकाने को भी तैयार हैं। इससे किसानों के लिए आय के नए अवसर पैदा हो रहे हैं। कई राज्यों में सरकारें भी किसानों को जैविक खेती अपनाने के लिए प्रोत्साहन और प्रशिक्षण दे रही हैं।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यदि किसानों को सही मार्गदर्शन, बाजार और तकनीकी सहायता मिले, तो भारत ऑर्गेनिक खेती के क्षेत्र में विश्व स्तर पर बड़ी ताकत बन सकता है। प्राकृतिक संसाधनों से समृद्ध भारत में जैविक खेती की अपार संभावनाएं मौजूद हैं।
स्पष्ट है कि ऑर्गेनिक खेती केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि भविष्य की आवश्यकता बनती जा रही है। स्वस्थ समाज, सुरक्षित पर्यावरण और टिकाऊ कृषि व्यवस्था के लिए जैविक खेती की ओर बढ़ना समय की सबसे बड़ी मांग मानी जा रही है।